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Fact Check: ग्रेटर नोएडा में कुछ साल पहले हुए निर्वस्‍त्र लोगों की तस्‍वीर कर्नाटक के नाम पर वायरल

विश्‍वास न्‍यूज की पड़ताल में दावा फर्जी साबित हुआ। तस्‍वीर में दिख रही घटना अभी की नहीं, 7 अक्‍टूबर 2015 की यूपी के ग्रेटर नोएडा की है।

  • By Vishvas News
  • Updated: September 27, 2022

नई दिल्‍ली (विश्‍वास न्‍यूज)। कर्नाटक में भगवान की मूर्ति को छूने पर दलित लड़के की पिटाई और परिवार पर पंचायत द्वारा जुर्माना लगाए जाने की घटना के बाद से सोशल मीडिया पर कुछ निर्वस्त्र लोगों की एक फोटो वायरल हो रही है। इस तस्‍वीर के बारे में दावा किया जा रहा है कि यह कर्नाटक की तस्वीर है जहाँ इस दलित परिवार को निर्वस्त्र कर उन्हें बेइज़्ज़त किया गया है।

विश्‍वास न्‍यूज की पड़ताल में वायरल पोस्‍ट भ्रामक फर्जी साबित हुई। तस्‍वीर में दिख रही घटना अभी की नहीं, 7 अक्‍टूबर 2015 की यूपी के ग्रेटर नोएडा की है। घटना की तस्‍वीरों को अब गलत दावे के साथ वायरल किया जा रहा है।

क्‍या है वायरल पोस्‍ट में

ट्विटर यूजर The Occasional Prime Minister ने इस तस्वीर को पोस्ट करते हुए दावा किया, “Feeling ashamed to know a #Dalit family in #Karnataka badly tortured nakedly & fined for entering temple & touching idol. Simply curse! R we Humans?”

अनुवाद: #कर्नाटक में एक #दलित परिवार को मंदिर में प्रवेश करने और मूर्ति को छूने के लिए नग्न रूप से बुरी तरह से प्रताड़ित किया गया।

पोस्‍ट का सच मानकर दूसरे यूजर्स भी वायरल कर रहे हैं। इसका आर्काइव्‍ड वर्जन को यहां देखें।

पड़ताल

विश्‍वास न्‍यूज ने सबसे पहले वायरल तस्‍वीर को गूगल रिवर्स इमेज पर सर्च किया। वायरल तस्‍वीर हमें कई जगह मिली। हमें यह फोटो इंडिया टुडे की वेबसाइट पर प्रकाशित 10 अक्टूबर 2015 की एक स्‍टोरी में मिली। खबर के अनुसार घटना ग्रेटर नोएडा के दनकौर पुलिस स्‍टेशन की है। खबर के अनुसार “A National Commission for Scheduled Castes team on Friday visited the Dankaur area in Uttar Pradesh’s Gautam Budh Nagar and met the Dalits, who were arrested on charges of public obscenity. Five people, including three women, were arrested on Thursday after they allegedly stripped in a market in Dankaur in Gautam Budh Nagar, to protest the police’s alleged refusal to register a complaint of robbery.”

इसका हिंदी अनुवाद है : “अनुसूचित जाति आयोग की एक राष्ट्रीय टीम ने उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्धनगर के दनकौर इलाके का दौरा किया और दलितों से मुलाकात की, जिन्हें सार्वजनिक अश्लीलता के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। तीन महिलाओं सहित पांच लोगों को गुरुवार को कथित रूप से कपड़े उतारने के बाद गिरफ्तार किया गया था। डकैती की शिकायत दर्ज करने से पुलिस के कथित इनकार के विरोध में यह घटना गौतमबुद्धनगर के दनकौर में एक बाजार में हुई थी।”

इस पूरे मामले पर हमें एक खबर जागरण डॉट कॉम पर भी मिली।

खबर के अनुसार, “लूट के मामले में पुलिस कार्रवाई को लेकर दलित परिवार बुधवार को दनकौर में निर्वस्त्र हो गया था। पीड़ित परिवार ने पुलिस पर लूट का मामला दर्ज व आरोपियों की गिरफ्तारी न करने का आरोप लगाया था। कस्बे में हुए हाइवोल्टेज ड्रामे में पुलिस ने दलित परिवार पर पिस्टल लूटने व जानलेवा हमला करने का आरोप लगाते हुए रिपोर्ट दर्ज की थी। कस्बे के लोगों ने भी दलित परिवार पर अश्लीलता फैलाने का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया है। पुलिस ने तीन महिलाओं समेत परिवार के पांच लोगों को जेल भेज दिया है।”

इस खबर को लेकर हमें Youtube पर एक वीडियो भी मिला। यह वीडियो इंडिया टुडे के यूटयूब चैनल पर 9 अक्‍टूबर 2015 को अपलोड किया गया था। वीडियो दनकौर वाली ही घटना का था। इस खबर में बताया गया कि 7 अक्‍टूबर को दलितों ने दनकौर पुलिस स्‍टेशन के सामने नग्‍न प्रदर्शन किया था। इसके बाद इन्‍हें अरेस्‍ट करके जेल भेज दिया गया था।

वायरल पोस्‍ट की सच्‍चाई जानने के लिए हमने दैनिक जागरण के नोएडा के रिपोर्टर अर्पित त्रिपाठी से संपर्क किया। उन्‍होंने हमें बताया कि “यह तस्वीर अक्‍टूबर 2015 को ग्रेटर नॉएडा में हुई घटना की है। इन लोगों ने अपने कपड़े खुद ही फाड़े थे।”

आपको बता दें कि कर्नाटक के कोलार जिले में हिंदू भगवान की मूर्ति को छूने के बाद एक दलित परिवार पर 60,000 रुपये का जुर्माना लगाने का मामला सामने आया था। जुलूस के दौरान निकाली जाने वाली मूर्ति को छूने पर आरोपी ने दलित लड़के की पिटाई भी कर दी थी। मगर ढूंढ़ने पर भी हमें कहीं भी इस परिवार को निर्वस्त्र किये जाने की घटना पर कोई खबर नहीं मिली। इस मामले में पूरी खबर यहाँ पढ़ें।

यह तस्वीर पहले भी गलत दावों के साथ वायरल हो चुकी है। विश्वास न्यूज़ द्वारा इस तस्वीर को लेकर किये गए पुराने फैक्ट चेक को यहाँ पढ़ा जा सकता है।

अंत में हमने ट्विटर पेज The Occasional Prime Minister की सोशल स्‍कैनिंग की। हमें पता चला कि इस पेज को मई 2021 में बनाया गया था।

निष्कर्ष: विश्‍वास न्‍यूज की पड़ताल में दावा फर्जी साबित हुआ। तस्‍वीर में दिख रही घटना अभी की नहीं, 7 अक्‍टूबर 2015 की यूपी के ग्रेटर नोएडा की है।

  • Claim Review : कर्नाटक में दलित परिवार को मंदिर में प्रवेश करने और मूर्ति को छूने के लिए नग्न रूप से प्रताड़ित किया गया और जुर्माना लगाया गया।
  • Claimed By : Twitter user The Occasional Prime Minister
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