Fact Check: ईरान ने हिजाब की कानूनी बाध्यता नहीं की खत्म, 2022 में हुए प्रदर्शन का वीडियो फर्जी दावे से वायरल
विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में पाया कि वायरल हो रहा वीडियो साल 2022 का ईरान में हिजाब के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों का है। वहीं, ईरान ने हिजाब की कानूनी बाध्यता को खत्म नहीं किया है, यह कानून अभी भी मौजूद है।
- By: Umam Noor
- Published: Oct 30, 2025 at 02:23 PM
- Updated: Jan 13, 2026 at 01:24 PM
नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। ईरान में पिछले कई सालों से हिजाब की कानूनी बाध्यता को खत्म करने की मांग की जा रही है। यह मांग साल 2022 में विरोध प्रदर्शनों में उस वक्त बदल गई, जब कथित तौर पर सही से हिजाब न पहनने को लेकर 22 वर्षीय महसा अमिनी नाम की महिला की ईरानी सुरक्षाबलों द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद मौत हो गई थी। अमिनी की मौत के बाद ईरान में हिजाब के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन हुए, इन प्रदर्शनों में सिर्फ ईरान ही नहीं, बल्कि कई देश के लोगों तथा महिलांओं ने हिस्सा लिया।
इसी कड़ी में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल किया जा रहा है। वायरल वीडियो में एक महिला को डांस करते हुए देखा जा सकता है। वहीं, महिला अपना हिजाब आग के हवाले करते हुए भी नजर आ रही है। वीडियो में और बहुत-से लोगों की भीड़ को इर्द-गिर्द खड़े हुए देखा जा सकता है। वीडियो को शेयर करते हुए दावा किया जा रहा है कि ईरान ने हिजाब की कानूनी बाध्यता को खत्म कर दिया है। अब हिजाब लगाना है या नहीं ये वहां की महिलाओं की मर्जी पर निर्भर करेगा। इस मामले में कोई कानूनी बाध्यता नहीं होगी।
विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में पाया कि ईरान ने हिजाब की कानूनी बाध्यता को खत्म नहीं किया है। यह कानून अभी भी मौजूद है। इसके अलावा इस दावे के साथ वायरल हो रहा वीडियो साल 2022 का ईरान में हिजाब के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों से जुड़ा हुआ है। वहीं, कुछ खबरों के अनुसार, ईरान की नैतिकता पुलिस अब सार्वजनिक जगहों से हटाई जा चुकी है।
क्या है वायरल पोस्ट में?
इंस्टाग्राम यूजर ‘हिन्दू नारायण जाट पंचेड़’ ने 27 अक्टूबर को वायरल पोस्ट को शेयर करते हुए लिखा, ‘बिग ब्रेकिंग। ईरान ने हिजाब की कानूनी बाध्यता खत्म की। अब हिजाब लगाना है या नही ये वहां की महिलाओं की मर्जी पर डिपेंड होगा , कोई कानूनी बाध्यता नही। ईरान की जनता सड़को पर आ कर सामूहिक रूप से हिजाब जला कर जश्न मना रही है।हमारे यहां तो लोगो को स्कूल कॉलेजों में भी हिजाब चाहिए।”
पोस्ट के आर्काइव वर्जन को यहां देखें।

पड़ताल
वायरल पोस्ट की पड़ताल हमने तीन हिस्सों में करने का फैसला किया। पहले हिस्से में हमने वायरल वीडियो की पड़ताल की, वहीं दूसरे हिस्से में वायरल हो रहे दावे यानी ईरान के हिजाब कानून को लेकर किये जा रहे दावे की सच्चाई जानने की कोशिश की और तीसरे हिस्से में हमने ईरान की धार्मिक (मोरालिटी) पुलिस की मौजूदा स्थिति की पड़ताल की।
पहला हिस्सा (वायरल वीडियो)
अपनी पड़ताल को शुरू करते हुए सबसे पहले हमने वायरल वीडियो के की-फ्रेम्स निकाले और उन्हें गूगल लेंस के जरिए सर्च किया। सर्च करने पर हमें यह वीडियो mamamiaaus नाम के एक वेरिफाइड इंस्टाग्राम हैंडल पर 21 सितंबर 2022 को अपलोड किया हुआ मिला। दी गई जानकारी के अनुसार, ईरान में 22 वर्षीय महसा अमिनी की मौत के बाद महिलाएँ विरोध प्रदर्शन कर रही हैं और अपने हिजाब जला रही हैं।

इसी बुनियाद पर हमने अपनी पड़ताल को आगे बढ़ाया और हमें स्पेक्टेटर डॉट को डॉट यूके की वेबसाइट पर 21 सितंबर 2022 को इससे जुड़ी एक खबर मिली। खबर में बताया, ईरान में महसा अमिनी नाम की एक 22 वर्षीय युवती की हिरासत में हुई मौत के विरोध में महिलाएं साहसिक कदम उठा रही हैं। वे सार्वजनिक रूप से अपने हिजाब उतारकर जला रही हैं, सड़कों पर खुले बालों से नाच रही हैं।
ये वीडियो हमें और भी कई सोशल मीडिया हैंडल तथा न्यूज़ पोर्टल पर सितंबर 2022 को मिला। इन सभी जगह इस वीडियो को ईरान में हिजाब के खिलाफ प्रदर्शनों का बताया गया है।
दूसरा हिस्सा (ईरान में हिजाब कानून)
वायरल पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि ईरान की सरकार ने महिलाओं के लिए हिजाब की कानूनी बाध्यता समाप्त कर दी है। बता दें, 1979 की ईरानी क्रांति के बारे में कहा जाता है कि इसने वहां की महिलाओं के जीवन में बड़े बदलाव लाए। क्रांति के बाद नई इस्लामी सरकार ने नियम बनाए, जिसमें सभी महिलाओं के लिए हिजाब पहनना अनिवार्य कर दिया गया। (बीबीसी रिपोर्ट)।
ईरान ह्यूमन राइट्स डॉक्यूमेंटेशन सेंटर पर दी गई जानकारी के मुताबिक, इस्लामिक दंड संहिता (इस्लामिक पीनल कोड) की धारा 638 को ईरान में अनिवार्य हिजाब का मुख्य कानूनी आधार माना जाता है। इस धारा में कहा गया है कि अगर कोई महिला सार्वजनिक जगह पर हिजाब नहीं पहनती है, तो उसको प्रशासनिक सजा दी जा सकती है।

बीबीसी की 17 दिसंबर 2024 की खबर के अनुसार, ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने विवादित “हिजाब और शालीनता कानून” को फिलहाल रोक दिया है, जिसे शुक्रवार से लागू किया जाना था। बताया जा रहा है कि इस नए कानून में बाल, हाथ या पैर दिखाने पर सख्त सजा का प्रावधान था, जिस पर मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने आपत्ति जताई थी।

24 मार्च 2025 द गार्जियन की खबर में दावा किया गया, ईरान की सरकार देश में हिजाब अनिवार्यता को लेकर अब भी सख्त रुख अपनाए हुए है। बताया गया है कि पुलिस डिजिटल तकनीकों की मदद से उन महिलाओं की पहचान कर रही है, जो इन नियमों का उल्लंघन करती हैं।
14 अक्टूबर 2025 की ईरान की न्यूज वेबसाइट ईरान इंटरनेशनल की खबर के अनुसार, ईरान की न्यायपालिका के प्रवक्ता अली असगर जहांगीर ने पुष्टि की कि देश में हिजाब कानून अब भी लागू है। यह बयान उस समय आया है, जब देश में अनिवार्य हिजाब को लेकर बहस फिर से तेज हो गई है और सार्वजनिक रूप से इसके उल्लंघन के मामले बढ़ते दिख रहे हैं।

तीसरा हिस्सा (ईरान में नैतिकता पुलिस)
वायरल दावे के इस हिस्से में हम ईरान की नैतिकता पुलिस (मोरालिटी पुलिस या गश्त ए- इरशाद) के बारे में जानने की कोशिश की। बता दें, ईरान की नैतिकता पुलिस एक स्पेशल यूनिट है, जो हिजाब या कपडे पहनने से जुड़े कानून का उलंघन करने वालों को हिरासत में लेती है या उन्हें सार्वजनिक जगहों पर ढीले कपडे पहनने या हिजाब पहनने जैसे आदेश देती है। आम तौर पर यह लोगों को कानून को फॉलो किये जाने की निगरानी करती है। नैतिकता पुलिस को पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद के कार्यकाल में बनाया गया था। 1983 में हिजाब अनिवार्य होने के बाद, यह इकाई 2006 में सड़कों पर उतरकर इस्लामी पहनावे के नियम लागू करने लगी। (DW रिपोर्ट)।
बीबीसी की 17 सितंबर 2024 की खबर के अनुसार, ईरान के नए राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने कहा है कि अब “मोरैलिटी पुलिस” महिलाओं को अनिवार्य हिजाब न पहनने पर परेशान नहीं करेगी। यह बयान उस समय आया है, जब कुछ दिन पहले संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी थी कि देश में सख्त ड्रेस कोड तोड़ने पर महिलाओं को अब भी हिंसक सज़ाओं का सामना करना पड़ रहा है।

ईरान इंटरनेशनल डॉट कॉम पर 23 अक्टूबर 2025 को छपे ओपिनियन में दावा किया गया, ईरान की “गश्त-ए-इर्शाद” यानी “मोरैलिटी पुलिस” औपचारिक रूप से अब भी मौजूद है। हालांकि, उसकी सड़कों पर मौजूदगी पहले से काफी कम हो गई है। कानूनी रूप से हिजाब पहनना अभी भी अनिवार्य है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसकी स्थिति विशेषकर बड़े शहरों में बदलती नज़र आ रही है। रिपोर्ट में बताया गया है कि सरकार ने इस यूनिट की कार्यप्रणाली में बदलाव किए हैं। अब इसकी गतिविधियां पहले जैसी आक्रामक नहीं हैं। माना जा रहा है कि महिलाओं के विरोध प्रदर्शनों और अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते सरकार ने इस मामले में कुछ नरमी दिखाई है। हालांकि “मोरैलिटी पुलिस” को पूरी तरह भंग नहीं किया गया है, वह अब भी कानूनी तौर पर अस्तित्व में है।
इसी मामले पर वाशिंगटन पोस्ट के 27 अक्टूबर 2025 की खबर के अनुसार, ईरान में हिजाब अनिवार्य का कानून अब भी लागू है, लेकिन उसका पालन पहले जैसा सख्त नहीं रहा। तेहरान और दूसरे शहरों में कई महिलाएं बिना हिजाब या ढीले कपड़ों में सड़कों पर नजर आती हैं, और पुलिस ज्यादातर मामलों में कुछ नहीं कहती है। हालांकि, कुछ जगहों पर अब भी गिरफ्तारियां होती हैं, जैसे रश्त शहर में हाल ही में कुछ कैफे उन महिलाओं के आने के कारण अस्थायी रूप से बंद किए गए थे, जो ड्रेस कोड का पालन नहीं कर रही थीं।

ईरान की पत्रकार फातिमा करीम खान ने विश्वास न्यूज़ से इस बारे में बात करते हुए बताया, “सरकार की तरफ से हिजाब कानून को खत्म करने को लेकर ऐसा कोई आदेश नहीं आया है। यह पूरी तरह गलत है। हालांकि, नैतिकता पुलिस अब सार्वजिनक जगहों पर नहीं है, जिसकी वजह से लोग बिना हिजाब के भी घर से निकल सकते हैं, लेकिन हिजाब का कानून अभी भी मौजूद है इसलिए हिजाब अभी भी अनिवार्य है।”
अब बारी थी फर्जी पोस्ट को शेयर करने वाले इंस्टाग्राम यूजर हिन्दू नारायण जाट पंचेड़ की सोशल स्कैनिंग करने की। हमने पाया कि यूजर को 9325 लोग फॉलो करते हैं।
निष्कर्ष: विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में पाया कि वायरल हो रहा वीडियो साल 2022 का ईरान में हिजाब के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों का है। वहीं, ईरान ने हिजाब की कानूनी बाध्यता को खत्म नहीं किया है, यह कानून अभी भी मौजूद है।
- Claim Review : ईरान ने हिजाब की कानूनी बाध्यता खत्म कर दी है।
- Claimed By : इंस्टाग्राम यूजर 'हिन्दू नारायण जाट पंचेड़'
- Fact Check : झूठ
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