सावधान! नेताओं से लेकर सितारों तक का डीपफेक वायरल, ऐसे पहचानें AI से बनाए कंटेंट को
- By: Ashish Maharishi
- Published: Feb 25, 2026 at 12:37 PM
- Updated: Feb 25, 2026 at 05:49 PM
नई दिल्ली (Ashish Maharishi)। एपस्टीन फाइल्स के सार्वजनिक होने के बाद से ही पूरी दुनिया में हंगामा मचा हुआ है। फर्जी सूचना फैलाने वाले भी इसका फायदा उठा रहे हैं। भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की जेफरी एपस्टीन के साथ फेक तस्वीरें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से बनाकर वायरल की गईं। इसके अलावा भारत-पाकिस्तान मैच के बीच कांग्रेस नेता शशि थरूर का डीपफेक वीडियो वायरल करके भ्रम फैलाने की कोशिश की गई।
भारत में सिर्फ चुनावों के दौरान ही नहीं, बल्कि सामान्य तौर पर भी नेताओं और सेलेब्स की एआई तस्वीरों व डीपफेक वीडियो का इस्तेमाल किया जाता है। अक्सर सोशल मीडिया पर यूजर्स इन्हें सही समझकर वायरल कर देते हैं।
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद भी कह चुके हैं कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में, चुनाव के दौरान डीपफेक वीडियो का खतरा बढ़ जाता है। इनके जरिए फर्जी व भ्रामक खबरें फैलाने का काम किया जाता है। सरकार इसे रोकने के लिए कंपनियों के संपर्क में है। ऐसे कंटेंट पर वॉटरमार्क अनिवार्य रूप से होना चाहिए, ताकि लोगों को पता चल सके कि यह एआई जेनरेटेड है।
विश्वास न्यूज ने पिछले 100 दिनों (1 नवंबर 2025 से 10 फरवरी 2026 तक) में ऐसी कई सोशल मीडिया पोस्ट की पड़ताल की, जिन्हें एआई तकनीक की मदद से तैयार किया गया था। विश्वास न्यूज ने पिछले साल नवंबर, दिसंबर और इस साल जनवरी और फरवरी के शुरूआती 10 दिनों के एआई आधारित फैक्ट चेक का एनालिसिस किया।
1-10 फरवरी 2026 के बीच 6 फैक्ट चेक
जानवरों से जुड़े फर्जी वीडियो बनाने में एआई का काफी इस्तेमाल किया जा रहा है। पुल से टकराते हुए जिराफ का एक वीडियो फरवरी में वायरल किया गया। जांच में यह एआई निर्मित साबित हुआ। इसी तरह कश्मीर में हिमस्खलन का एआई से वीडियो बनाकर पैनिक क्रिएट करने की कोशिश की गई। इतना ही नहीं, पीएम मोदी का एक डीपफेक वीडियो बनाकर उन्हें ईसा मसीह के बारे में बोलते हुए दिखाया गया। इस वीडियो को भी सच मानकर सोशल मीडिया पर खूब वायरल किया गया।
एपस्टीन फाइल्स में भारतीय फिल्म निर्देशक मीरा नायर का भी जिक्र आया। इसी दौरान दो तस्वीरें वायरल की गईं। लेकिन ये दोनों तस्वीरें फेक साबित हुईं और इन्हें एआई की मदद से बनाया गया था।

जनवरी 2026 में 25 फैक्ट चेक
विश्वास न्यूज ने 2026 के पहले महीने में करीब 25 एआई बेस्ड फैक्ट चेक किए। इनमें एआई के माध्यम से पीएम मोदी, राहुल गांधी, बॉलीवुड के कई एक्टर, कई क्रिकेटर और वेनेजुएला के राष्ट्रपति की पत्नी से जुड़े कंटेंट बनाकर वायरल किए गए। इनके अलावा हादसों से जुड़े कंटेंट और जंगली जानवरों के फर्जी वीडियो भी खूब वायरल हुए। विश्वास न्यूज ने इन सबकी विस्तार से जांच की।
एक वीडियो में तो रोहित शर्मा और विराट कोहली को केदारनाथ मंदिर के सामने दिखाया गया। एक अन्य वीडियो में एक मोर को अयोध्या के राम मंदिर में भगवान राम की प्रतिमा के सामने माला चढ़ाते हुए दिखाया गया।
दिसंबर 2025 में किया गया 23 एआई बेस्ड कंटेंट का फैक्ट चेक
दिसंबर 2025 में ट्रेन धमाके से लेकर सांप्रदायिकता से जुड़े एआई वीडियो वायरल किए गए। इनके अलावा यूपी के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ का एक डीपफेक वीडियो भी शेयर किया गया, जिसमें उन्हें पीएम मोदी से इस्तीफा मांगते हुए दिखाया गया है। इसके अलावा बाघ, साधु संन्यासियों के एआई वीडियो भी वायरल किए गए। इतना ही नहीं, देश की भूतपूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला, तमिलनाडु के डिप्टी सीएम उदयनिधि स्टालिन, राष्ट्रीय जनता दल के राज्यसभा सांसद मनोज झा, तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष और पत्रकार राजदीप सरदेसाई के डीपफेक वीडियो भी शेयर किए गए।
नवंबर 2025 में 13 एआई बेस्ड फैक्ट चेक
विश्वास न्यूज ने नवंबर 2025 में एआई बेस्ड 13 फैक्ट चेक किए। इनमें भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा, शेर-बाघ से जुड़े वीडियो, ट्रेन दुर्घटना और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ वीडियो शामिल थे। इसी महीने दिल्ली बम धमाके से जुड़ीं फर्जी तस्वीरों और आगरा के ताजमहल को एआई वीडियो में जलते हुए वायरल किया गया।
लाखों पोस्ट हुईं पीएम मोदी और राहुल गांधी के नाम पर

विश्वास न्यूज ने 1 नवंबर 2025 से लेकर 10 फरवरी 2026 तक, सोशल मीडिया पोस्ट का एनालिसिस किया। हमारी रिसर्च में यह सामने आया कि 100 दिनों में पीएम मोदी को लेकर, इंस्टाग्राम पर हिंदी और अंग्रेजी में छह लाख से ज्यादा पोस्ट की गईं। राहुल गांधी को लेकर इसी अवधि में, दोनों भाषाओं में 2.9 लाख पोस्ट की गईं, जबकि फेसबुक पर पीएम मोदी को लेकर 18 लाख और राहुल गांधी को लेकर 12 लाख पोस्ट की गईं।
इसी अवधि में पीएम मोदी और राहुल गांधी को गूगल पर काफी सर्च किया गया। इसमें भी टॉप पर पीएम मोदी ही रहे। इसमें दोनों नेताओं की उम्र के बारे में काफी सर्च किया गया। इसी तरह एपस्टीन फाइल्स से जोड़ते हुए भी दोनों नेताओं को सर्च किया गया।

गूगल ट्रेंड पर डीपफेक कीवर्ड से भी इस अवधि में काफी ज्यादा सर्च किया गया। इससे संबंधित एआई, डीपफेक मेकर, डीपफेक डिटेक्शन, डीपफेक न्यूज, डीपफेक मेकर एप और डीपफेक मेकर एआई जैसे कीवर्ड काफी ज्यादा सर्च किए गए।
AI कंटेंट पहचानने के तरीके
हमेशा इस बात का ध्यान रखें कि हर वायरल कंटेंट सच नहीं होता है। इसके अलावा कुछ और बातों का ध्यान रखकर, एआई से बनाए गए कंटेंट को पहचाना जा सकता है।
ध्यान से देखें/सुनें
यदि एआई से बनाया गया कोई भी कंटेंट (फोटो या वीडियो) आपके सामने आता है, तो उसे ध्यान से देखें। चेहरे की बनावट, अंगुलियों के आकार, अंगुलियों की संख्या और बैकग्राउंड में अंतर जैसी मामूली बातों का ध्यान रखने से एआई जेनरेटेड कंटेंट की पहचान की जा सकती है। इनके अलावा डीपफेक वीडियो में लिप-सिंक और चेहरे के हावभाव में अंतर, डीपफेक का इशारा करते हैं। यदि आवाज को ध्यान से सुना जाए, तो भी डीपफेक वीडियो की पहचान की जा सकती है।
हमेशा असली सोर्स पर सर्च करें वायरल कंटेंट
यदि एआई से बनाया गया कोई कंटेंट आपके सामने आता है और आप उसकी पहचान नहीं कर पाते हैं, तो ऐसे कंटेंट को हमेशा असली सोर्स पर सर्च करें। इसके लिए गूगल ओपन सर्च टूल पर कीवर्ड सर्च की मदद ली जा सकती है। यदि तस्वीर या वीडियो है तो गूगल लेंस टूल की मदद से असली सोर्स पर सर्च करने की कोशिश करनी चाहिए।
एक्सपर्ट की मदद लें
यदि आप असली और नकली कंटेंट में अंतर नहीं कर पा रहे हैं तो इस क्षेत्र के एक्सपर्ट की मदद लेना न भूलें। इसके अलावा फैक्ट चेकिंग वेबसाइट की भी मदद ली जा सकती है, जो दिन-रात ऐसे कंटेंट की पहचान करके जनता के सामने सच्चाई रखते हैं।
फ्री में मौजूद हैं एआई डिटेक्शन टूल

इंटरनेट इस्तेमाल करने वाला हर यूजर, एआई और डीपफेक कंटेंट की पहचान खुद भी कर सकता है। लेकिन एआई डिटेक्शन टूल से ज्यादा महत्वपूर्ण है, खुद का कॉमन सेंस। यदि आपके पास कोई भी कंटेंट आता है, जिस पर आपको शक हो, तो थोड़ा सा ठहरें। एआई तस्वीर या डीपफेक वीडियो को ध्यान से देखें। इसमें कुछ न कुछ ऐसा संकेत जरूर मिलेगा, जो इसके एआई जेनरेटड होने का अंदेशा जता देगा। कई बार ऐसे वीडियो में आवाज रोबोटिक टाइप की होगी। इसके अलावा यदि एआई जेनरेटेड तस्वीरों की बात करें तो कई बार आंखों से लेकर अंगुलियों तक की बनावट में कोई न कोई ऐसा संकेत मिल ही जाएगा, जो इन्हें फेक साबित कर सकता है। इसके अलावा इंटरनेट पर कई एआई डिटेक्शन टूल हैं, जिनकी मदद से एआई जेनरेटेड कंटेंट व वीडियो की पड़ताल की जा सकती है। इनमें हाइव मॉडरेशन, एआईऑरनॉट, एआई वीडियो डिटेक्टर, बफलो यूनिवर्सिटी के डिटेक्शन टूल डीपफेक-ओ-मीटर और http://undetectable.ai जैसे कई टूल मौजूद हैं। एआई तस्वीरों की पड़ताल, Sightengine और decopy जैसे टूल्स की मदद से भी की जा सकती है।
केंद्र सरकार सख्त
सोशल मीडिया पर डीपफेक, आपत्तिजनक और अश्लील कंटेंट को लेकर केंद्र सरकार काफी सख्त है। पिछले दिनों सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ को लेकर केंद्र सरकार ने यह पाया था कि इस पर अश्लील, आपत्तिजनक और कई गैरकानूनी कंटेंट अपलोड किए जा रहे हैं, जो स्थानीय कानूनों का उल्लंघन करते हैं। इसके बाद इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय ने दो जनवरी 2026 को एक्स को निर्देश जारी किए। ‘एक्स’ को कहा गया कि वहसभी अश्लील, आपत्तिजनक और गैरकानूनी कंटेंट, खासकर एआई एप ‘ग्रोक’ द्वारा बनाए गए कंटेंट को तुरंत हटाए, या कानून के तहत कार्रवाई का सामना करे। मंत्रालय ने ‘एक्स’ से 72 घंटों में विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट भी तलब की थी।
AI और डीपफेक कंटेंट को लेकर दिशानिर्देश
केंद्र सरकार ने एआई से तैयार और डीपफेक कंटेंट को लेकर सभी आनलाइन प्लेटफॉर्म के लिए कड़े दिशानिर्देश जारी किए हैं। इंटरनेट मीडिया को अब अपने प्लेटफार्म पर शेयर किए जाने वाले एआई कंटेंट पर लेबल लगाना होगा और सभी डीपफेक वीडियो-फोटो भी तीन घंटे में हटाने होंगे। पहले यह समयसीमा 36 घंटे थी। इसके अलावा यूजर्स को भी एआई से तैयार या संशोधित कंटेंट को पोस्ट करते समय उसका जिक्र करना होगा। प्लेटफार्म को ऐसी घोषणाओं के सत्यापन के लिए तकनीकी व्यवस्था करनी होगी। ये नए नियम 20 फरवरी 2026 से प्रभावी होंगे।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने ‘सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021’ में संशोधन की अधिसूचना जारी कर दी है। संशोधन में पहली बार ‘एआई जेनरेटेड’ और ‘सिंथेटिक सूचना’ की औपचारिक परिभाषा दी गई है। इनमें ऐसे ऑडियो, वीडियो या ऑडियो-विजुअल कंटेंट शामिल हैं, जो कृत्रिम रूप से तैयार किए गए हों, लेकिन वास्तविक प्रतीत होते हों। हालांकि, सामान्य एडिटिंग, शैक्षणिक उपयोग और डिजाइन संबंधी कार्यों को इससे बाहर रखा गया है।
विश्वास न्यूज ने अपने एनालिसिस के बाद एआई एक्सपर्ट एस. के. साहिद से संपर्क किया। उनसे यह समझने कि कोशिश की गई कि एआई से जुड़े कंटेंट को सच समझकर आखिर कोई क्यों वायरल करता है? उन्होंने बताया, “वक्त के साथ एआई से बनाए गए कंटेंट भी पहले से बेहतर बन रहे हैं। ऐसे में आम यूजर के लिए यह पहचाना काफी मुश्किल होता है कि क्या सही है और क्या गलत। कई बार कुछ यूजर्स जानबूझकर ऐसे कंटेंट को वायरल करते हैं। इतना ही नहीं, अक्सर देखने में आया है कि राजनीति से जुड़े कंटेंट को दुष्प्रचार की मंशा से, सोच-समझकर वायरल किया जाता है।”
पूरा सच जानें... किसी सूचना या अफवाह पर संदेह हो तो हमें बताएं
सब को बताएं, सच जानना आपका अधिकार है। अगर आपको ऐसी किसी भी मैसेज या अफवाह पर संदेह है जिसका असर समाज, देश और आप पर हो सकता है तो हमें बताएं। आप हमें नीचे दिए गए किसी भी माध्यम के जरिए जानकारी भेज सकते हैं...












