Fact Check: लेबनान में ‘अमेरिकी बेस’ पर ईरान के अटैक का वायरल वीडियो एआई-निर्मित
लेबनान में अमेरिकी बेस पर हमले का वायरल वीडियो एआई-निर्मित है। असल में यह वीडियो वास्तविक घटना का नहीं है, बल्कि क्रिएटेड है।
- By: Pragya Shukla
- Published: Mar 23, 2026 at 04:01 PM
- Updated: Mar 26, 2026 at 11:53 AM
नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। मिसाइल गिरने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो को अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध से जोड़ते हुए शेयर किया जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि लेबनान में ईरान ने ‘अमेरिकी बेस’ पर मिसाइल से हमला किया और यह वीडियो उसी हमले का है।
विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में पाया कि वायरल दावा गलत है। असल में यह वीडियो वास्तविक घटना का नहीं है, बल्कि इसे एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की मदद से बनाया गया है।
क्या हो रहा है वायरल?
एक्स यूजर ‘कामेश कुमार’ ने 19 मार्च 2026 को वायरल वीडियो को शेयर करते हुए कैप्शन लिखा, “लेबनान में अमेरिकी बेस पर जब ईरानी मिसाइल गिरी तो अफरा तफरी मच गई। अमेरिका अपने लेबनान बेस के बारे में सूचना को छुपा रहा है और होने वाले नुकसान को दुनिया के सामने नहीं आने देना चाहता।”
पोस्ट के आर्काइव लिंक को यहां पर देखें।
पड़ताल
वायरल दावे की सच्चाई जानने के लिए हमने वीडियो को गौर से देखा। हमने पाया कि वीडियो में कई तकनीकी कमियां हैं। लोगों के भागने का तरीका, कैमरा मूवमेंट और लाइटिंग काफी रोबोटिक नजर आते हैं। ऐसे में हमें वीडियो के एआई से बने होने का संदेह हुआ।
पड़ताल को आगे बढ़ाते हुए हमने एआई डिटेक्शन टूल्स का इस्तेमाल किया। हमने ‘Bitmind’ का इस्तेमाल करते हुए वीडियो को चेक किया गया। इस टूल ने वीडियो के 93 फीसदी एआई से बने होने की संभावना जताई।

अधिक पुष्टि के लिए हमने वीडियो को अपने सहयोगी, ‘डीपफेक्स एनालिसिस यूनिट’ (DAU) के साथ शेयर किया, जो ‘ट्रस्टेड इन्फॉर्मेशन एलायंस’ (TIA) की एक पहल है। इस टीम ने वीडियो के स्क्रीनशॉट को ‘एआई ऑर नॉट’ से चेक किया, जिसमें इसे 92 फीसदी एआई संभावित बताया गया।

DAU ने ‘Sight Engine’ पर भी वीडियो को चेक किया। इस टूल ने 95 फीसदी वीडियो के एआई होने की संभावना जताई।

अधिक जानकारी के लिए हमने एआई टेक्नोलॉजी में काम कर रहे एक्सपर्ट अजहर माचवे से संपर्क किया। उन्होंने हमें बताया कि वीडियो में जो प्लेन खड़ा है, वह ठीक से नहीं बना है। उसके पंख के नीचे के हिस्से नहीं हैं। वीडियो में जिस तरह से लोग भाग रहे हैं और कैमरा हिल रहा है, वह सब कुछ काफी रोबोटिक है। इतना ही नहीं, वीडियो में 6 सेकंड पर नजर आ रहा सैनिक का शरीर भी काफी अटपटा लगता है। एआई से निर्मित वीडियो में अक्सर ऐसा होता है।
क्या है संदर्भ?
बीबीसी की वेबसाइट पर 22 मार्च 2026 को प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, “इजरायल-ईरान और यूएस की जंग अब लेबनान तक पहुंच गई है। इजरायल, ईरान के अलावा लेबनान पर भी हमले कर रहा है। इजरायल ने हिजबुल्लाह के खिलाफ दक्षिणी लेबनान में हमला करना शुरू कर दिया है। इजरायली सेना का कहना है कि लेबनानी सशस्त्र समूह हिजबुल्लाह के खिलाफ जमीनी और हवाई हमलों के विस्तार की योजनाओं को मंजूरी दे दी गई है। इजरायल वहां बड़े पैमाने पर जमीनी आक्रमण की तैयारी कर रहा है।”
अंत में हमने वीडियो को गलत दावे के साथ शेयर करने वाले एक्स यूजर के अकाउंट को स्कैन किया। हमने पाया कि यूजर को छह हजार से ज्यादा लोग फॉलो करते हैं। यूजर ने प्रोफाइल में खुद को उत्तर प्रदेश का रहने वाला बताया है।
निष्कर्ष: विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में पाया कि लेबनान में ‘अमेरिकी बेस‘ पर हमले का वायरल वीडियो एआई-निर्मित है। असल में यह वीडियो वास्तविक घटना का नहीं है, बल्कि क्रिएटेड है। इसे एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की मदद से बनाया गया है।
- Claim Review : ईरान की ओर से लेबनान में अमेरिकी बेस पर किए गए हमले का वीडियो।
- Claimed By : FB User कामेश कुमार
- Fact Check : झूठ
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