Fact Check: पश्चिमी विक्षोभ की वजह से हो रही है उत्तर भारत में बारिश, बिल गेट्स के फंडेड रिसर्च प्रोग्राम से नहीं है कोई संबंध
पिछले कुछ दिनों में पश्चिमी विक्षोभ के कारण दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत में बारिश हुई है। इसका बिल गेट्स की फंडिंग वाले रिसर्च प्रोग्राम से कोई संबंध नहीं है। सोशल मीडिया पर वायरल दावा अफवाह है।
- By: Sharad Prakash Asthana
- Published: Mar 24, 2026 at 05:30 PM
- Updated: Mar 24, 2026 at 05:34 PM
नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत के कई हिस्सों में कुछ दिनों से बारिश का मौसम बना हुआ है। गाजियाबाद और नोएडा के लोगों को 23 मार्च 2026 को भी बारिश से दो-चार होना पड़ा था। इस बीच सोशल मीडिया पर एक पोस्ट काफी वायरल हो रही है। इसमें दावा किया जा रहा है कि यह बारिश माइक्रोसॉफ्ट कंपनी के सह-संस्थापक एवं अध्यक्ष बिल गेट्स के कृत्रिम बारिश के प्रयोग की वजह से हो रही है।
विश्वास न्यूज ने इसकी जांच की तो पता चला कि यह बारिश पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) की वजह से हो रही है। हाल ही में हुई बारिश का बिल गेट्स की फंडिंग वाले रिसर्च प्रोग्राम से कोई संबंध नहीं है।
क्या है वायरल पोस्ट?
इंस्टाग्राम यूजर ‘xtylish_fact_news’ ने 22 मार्च 2026 को पोस्ट (आर्काइव लिंक) करते हुए लिखा, “बारिश में मत भीगना वरना…बिल गेट्स ने पूरी दुनिया पर एक्सपेरिमेंट करके आर्टिफिशियल बारिश करा रहा है अगर गलती से इस बारिश में भीग गए तो भयंकर तबियत खराब होगा यहां तक मर भी सकते हो, क्योंकि यह पानी नहीं बल्कि सल्फर और बहुत सारे कैमिकल है…।”
पोस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिल गेट्स की तस्वीर भी लगी हुई है।

इंस्टाग्राम यूजर ‘chhoti_jinu341’ (आर्काइव लिंक) ने भी 21 मार्च 2026 को एक वीडियो पोस्ट कर इस तरह का दावा किया था।
पड़ताल
वायरल दावे की जांच के लिए हमने सबसे पहले भारतीय मौसम विभाग की वेबसाइट और सोशल मीडिया हैंडल को चेक किया। वेबसाइट पर 15 मार्च 2026 को जारी की गई प्रेस रिलीज के अनुसार, “एक नए पश्चिमी विक्षोभ के कारण 18 मार्च से पश्चिमी हिमालय क्षेत्र और उससे सटे मैदानी इलाकों में बारिश/गरज, बिजली और तेज हवाओं के साथ ओलावृष्टि होने की संभावना है।”
19 मार्च 2026 को वेबसाइट पर अपलोड प्रेस रिलीज के मुताबिक, “देश के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर गरज-चमक के साथ तूफान आने और वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के लगातार आने के कारण अगले एक सप्ताह के दौरान दिन का तापमान सामान्य से कम रहने की संभावना है।”

‘भारतीय मौसम विभाग’ (India Meteorological Department) के एक्स अकाउंट से 23 मार्च 2026 को पोस्ट कर जानकारी दी गई, “लगातार तीन सक्रिय पश्चिमी विक्षोभों के कारण उत्तर-पश्चिम भारत में इस सप्ताह के दौरान छिटपुट बारिश, गरज-चमक और तेज हवा के जारी रहने की संभावना है।”
भारतीय मौसम संबंधी जानकारी देने वाली कंपनी स्काईमेट के यूट्यूब चैनल पर 20 मार्च 2026 को अपलोड वीडियो के अनुसार, ”यह कोई दुर्लभ मौसम संबंधी घटना नहीं है। यह वेस्टर्न डिस्टर्बेंस है। भूमध्य सागर (Mediterranean Sea) से उठने वाले बादल पश्चिम से पूरब की ओर आते हैं, इसलिए इन्हें पश्चिमी विक्षोभ या वेस्टर्न डिस्टर्बेंस कहते हैं। वेस्टर्न हिमालय पर जाकर इनको रुकावट मिलती है, जिस कारण यहां पर बर्फबारी होती है।”
क्या है संदर्भ?
‘सेंटर फॉर यूरोपियन पॉलिसी एनालिसिस’ (CEPA) की वेबसाइट पर 20 दिसंबर 2024 को छपी रिपोर्ट के अनुसार, ”हार्वर्ड के रिसर्चर्स रिफ्लेक्टिव पार्टिकल्स (कणों) को बिखेरकर सूर्य के प्रकाश को रोकने की काल्पनिक तकनीक को सबके सामने लाए थे। इसके लिए उन्होंने स्वीडन के एसरेंज अंतरिक्ष केंद्र को चुना था, लेकिन 2021 में हुए प्रदर्शनों के कारण प्रयोग रद्द हो गया। सोलर जियोइंजीनियरिंग (Solar Geoengineering) का मकसद सूर्य के प्रकाश को अंतरिक्ष में वापस भेजकर पृथ्वी को ठंडा करना था। इस प्रोजेक्ट को सोलर रेडिएशन मोडिफिकेशन (SRM) भी कहा जाता है। बिल गेट्स सहित कई अन्य लोगों और संस्थाओं ने हार्वर्ड सोलर जियोइंजीनियरिंग रिसर्च प्रोग्राम को वित्तीय सहायता प्रदान की थी।”
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी स्थित ‘सलाता इंस्टीट्यूट फॉर क्लाइमेट एंड सस्टेनेबिलिटी’ (The Salata Institute for Climate and Sustainability) की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार, ”हार्वर्ड सोलर जियोइंजीनियरिंग रिसर्च प्रोग्राम (SGRP) अप्रैल 2017 में शुरू किया गया था। SGRP ने स्ट्रैटोस्फेरिक कंट्रोल्ड पर्टर्बेशन एक्सपेरिमेंट (SCoPEx) को फंडिंग और सहायता प्रदान की, जो मार्च 2024 में समाप्त हो गया।”

वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक, ”सोलर जियोइंजीनियरिंग की कई प्रस्तावित तकनीकें हैं। इनमें समुद्री बादलों को चमकाना, सिरस बादलों (वायुमंडल में बहुत ऊंचाई पर पाए जाने वाले पतले और हल्के बादल) को पतला करना, अंतरिक्ष-आधारित तकनीकें और स्ट्रैटोस्फेरिक एरोसोल स्कैटरिंग आदि शामिल हैं। समुद्री बादलों को चमकाने की तकनीक का मकसद समुद्री बादलों को और ज्यादा चमकीला बनाना होगा, ताकि वे सूरज की रोशनी को ज्यादा मात्रा में वापस अंतरिक्ष में भेज सकें।
सिरस बादलों को पतला करने की तकनीक का मकसद ऊंचाई पर मौजूद पतले सिरस बादलों को कम करना होगा, ताकि पृथ्वी से अंतरिक्ष की ओर ज्यादा लंबी-तरंगों वाला रेडिएशन निकल सके।
अंतरिक्ष-आधारित तकनीकों का मकसद अंतरिक्ष में ‘सन शील्ड’ (सूरज से बचाने वाली ढाल) लगाकर, सूरज की रोशनी के एक छोटे से हिस्से को पृथ्वी से दूर अंतरिक्ष में भेजना होगा।
आखिर में, स्ट्रैटोस्फेरिक एरोसोल स्कैटरिंग तकनीक के तहत ऊपरी वायुमंडल में छोटे-छोटे चमकीले कण, जैसे सल्फेट एरोसोल या शायद कैल्शियम कार्बोनेट डाले जाएंगे। ये कण सूरज की रोशनी के एक छोटे से हिस्से को वापस अंतरिक्ष में बिखेर देंगे।

वेबसाइट के फंडिंग सेक्शन में बिल गेट्स समेत अन्य संस्थाओं और लोगों के नाम दिए गए हैं।
‘सलाता इंस्टीट्यूट’ की वेबसाइट पर 18 मार्च 2024 को अपलोड रिपोर्ट के अनुसार, ”SCoPEx के मुख्य शोधकर्ता प्रोफेसर फ्रैंक केउश ने घोषणा की है कि अब वे इस प्रयोग को आगे नहीं बढ़ा रहे हैं।”
क्या है क्लाउड सीडिंग?
बीबीसी की 17 अप्रैल 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक, ”क्लाउड सीडिंग में मौजूदा बादलों में बदलाव करके ज्यादा बारिश करवाने में मदद की जाती है। यह काम हवाई जहाजों का इस्तेमाल करके बादलों में छोटे-छोटे कण (जैसे सिल्वर आयोडाइड) गिराकर किया जा सकता है। इससे पानी की भाप ज्यादा आसानी से जम जाती है और बारिश में बदल जाती है।”
इस बारे में हमने मौसम विज्ञानी और ‘स्काईमेट’ के वाइस प्रेसिडेंट महेश पालावत से संपर्क किया। उन्होंने कहा कि यह बारिश पश्चिमी विक्षोभ की वजह से हो रही है। सोशल मीडिया पर काफी अफवाह फैल रही है। इतने बड़े पैमाने पर क्लाउड सीडिंग संभव नहीं है।
गलत पोस्ट शेयर करने वाले इंस्टाग्राम यूजर के 1300 से अधिक फॉलोअर्स हैं।
निष्कर्ष: पिछले कुछ दिनों में पश्चिमी विक्षोभ के कारण दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत में बारिश हुई है। इसका बिल गेट्स की फंडिंग वाले रिसर्च प्रोग्राम से कोई संबंध नहीं है। सोशल मीडिया पर वायरल दावा अफवाह है।
- Claim Review : यह बारिश माइक्रोसॉफ्ट कंपनी के सह-संस्थापक एवं अध्यक्ष बिल गेट्स के कृत्रिम बारिश के प्रयोग की वजह से हो रही है।
- Claimed By : Insta User- xtylish_fact_news
- Fact Check : झूठ
- Press Release of IMD, Dated 15 March 2026
- Press Release of IMD, Dated 19 March 2026
- X Post of IMD, Dated 23 March 2026
- Video of Skymet Youtube Channel, Dated 20 March 2026
- Report of Centre for European Policy Analysis, Dated 20 December 2024
- Report of The Salata Institute for Climate and Sustainability
- Report of The Salata Institute for Climate and Sustainability, Dated 18 March 2026
- Report of BBC, Dated 17 April 2024
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