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Fact Check: RSS प्रमुख को वसुंधरा राजे ने नहीं लिखा महिला आरक्षण के खिलाफ पत्र, फर्जी लेटर हुआ वायरल

विश्वास न्‍यूज की जांच में वायरल पत्र फर्जी साबित हुआ। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि वसुंधरा राजे द्वारा मोहन भागवत को ऐसा कोई पत्र नहीं लिखा गया है।

  • By: Ashish Maharishi
  • Published: Apr 21, 2026 at 12:37 PM
  • Updated: Apr 21, 2026 at 06:21 PM

नई दिल्‍ली (विश्वास न्‍यूज)। राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के नाम से सोशल मीडिया पर एक पत्र वायरल हो रहा है। इसमें कथित रूप से राजे ने महिला आरक्षण को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। साथ ही राष्ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत को पत्र लिखकर उन्होंने अपनी नाराजगी जताई है।

विश्वास न्‍यूज ने वायरल पोस्‍ट की जांच की। यह फर्जी साबित हुआ। वसुंधरा राजे की ओर से ऐसा कोई पत्र नहीं लिखा गया है। खुद राजे और भाजपा ने इसका खंडन किया है।

क्‍या हो रहा है वायरल?

फेसबुक यूजर ‘दिलीप कुमार’ ने 20 अप्रैल 2026 को एक पत्र शेयर करते हुए दावा किया, “महिला आरक्षण बिल के खिलाफ राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे जी ने भेदभाव का आरोप लगाते हुए RSS प्रमुख मोहन भागवत जी को पत्र लिखा है। आपको इसे जरूर पढ़ना चाहिए, यह देश और समाज के लिए महत्वपूर्ण विषय है।”

वायरल पोस्‍ट के कंटेंट को यहां ज्‍यों का त्‍यों लिखा गया है। इसे सच मानकर कई यूजर्स शेयर कर रहे हैं। पोस्‍ट का आर्काइव वर्जन यहां देखें।

पड़ताल

विश्वास न्‍यूज ने वायरल पत्र की सच्‍चाई जानने के लिए सबसे पहले वसुंधरा राजे के एक्‍स हैंडल को स्‍कैन किया। वहां हमें 18 अप्रैल 2026 की एक पोस्‍ट मिली। इसमें उन्होंने लिखा, “साँच को आँच की ज़रूरत नहीं है। वायरल पत्र शुभचिंतकों की कारगुज़ारी मात्र है। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में महिलाओं को निर्णय प्रक्रिया में समान भागीदारी देने के प्रयास का मैं ही नहीं, देश की हर महिला स्वागत कर रही है। यह भी तय मान लीजिए कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम का विरोध करने वाले ऐसे लोग चौथी बार भी विपक्ष में ही बैठने की तैयारी कर चुके हैं। ऐसे लोग चाहे जितना भ्रम फैलाएँ, बाधाएँ उत्पन्न करें…देश की नारी शक्ति न रुकी है, न रुकेगी।”

राजस्‍थान भाजपा के एक्‍स हैंडल से इस पोस्‍ट को 18 अप्रैल 2026 को शेयर करते हुए लिखा गया, “कांग्रेस की राजनीति अब पूरी तरह झूठ और प्रोपेगेंडा पर टिकी है। अपनी डूबती साख बचाने के लिए ये लोग किसी भी हद तक गिर सकते हैं। भाजपा के मजबूत नेतृत्व से घबराई कांग्रेस अब फेक न्यूज़ और मनगढ़ंत कहानियों का सहारा ले रही है। हाल ही में कांग्रेस के एक नेता ने एक मीडिया चैनल का नाम लेकर फर्जी पत्र फैलाया- लेकिन सच सामने आ गया। जिस चैनल का नाम लेकर झूठ फैलाया गया, उसी ने अब इस फेक न्यूज़ पैडलर के खिलाफ FIR दर्ज करवा दी है। कांग्रेस का असली चेहरा फिर बेनकाब-झूठ, भ्रम और सिर्फ सत्ता की भूख!”

गूगल ओपन सर्च में हमें ऐसी कई न्‍यूज रिपोर्ट मिलीं, जिनमें वसुंधरा राजे के नाम पर वायरल पत्र को फेक बताया गया है। इन रिपोर्ट्स को यहां और यहां पढ़ा जा सकता है।

विश्वास न्‍यूज ने जांच को आगे बढ़ाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के मीडिया सलाहकार महेंद्र भारद्वाज से संपर्क किया और उनके साथ वायरल पत्र को शेयर किया। उन्‍होंने बताया कि वसुंधरा राजे के नाम पर कई दिनों से यह फेक लेटर वायरल हो रहा है। इसमें कोई सच्‍चाई नहीं है।

क्‍या है संदर्भ?

लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 2029 के आम चुनाव से ही महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए सरकार द्वारा लाया गया 131वां संविधान संशोधन बिल वोटिंग के बाद गिर गया। यह बिल महिला आरक्षण कानून में संशोधन के लिए लाया गया था। इसे दो तिहाई बहुमत नहीं मिल पाने के कारण यह गिर गया। मत विभाजन के दौरान कुल 528 वोट पड़े। इनमें समर्थन में 298 व विरोध में 230 वोट पड़े। 

पीआईबी के अनुसार, “लोकसभा में संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक 2026, केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 और परिसीमन विधेयक, 2026 पेश किए गए, जिनका उद्देश्य क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन द्वारा लोकसभा और विधान सभाओं में महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित करना था। संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक, 2026 को भारत के संविधान के अनुच्छेद 368(2) के अनुसार विचार के लिए आवश्यक बहुमत प्राप्त नहीं हो सका, इसलिए इस पर आगे कोई कार्यवाही नहीं की गई। इसके अलावा, केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 और परिसीमन विधेयक, 2026 से संबंधित दो विधेयकों पर भी आगे कोई कार्यवाही नहीं हुई।”

विश्‍वास न्‍यूज ने जांच के अंत में फर्जी पत्र शेयर करने वाले यूजर की जांच की। पता चला कि दिलीप कुमार नाम के इस यूजर को फेसबुक पर 49 हजार से ज्‍यादा लोग फॉलो करते हैं। यह अकाउंट फरवरी 2011 को बनाया गया था। यूजर दिल्‍ली में रहता है।

निष्कर्ष: विश्वास न्‍यूज की जांच में वायरल पत्र फर्जी साबित हुआ। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि वसुंधरा राजे द्वारा मोहन भागवत को ऐसा कोई पत्र नहीं लिखा गया है।

  • Claim Review : महिला आरक्षण के खिलाफ राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने मोहन भागवत को पत्र लिखा।
  • Claimed By : FB User Dilip Kumar
  • Fact Check : झूठ

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