Fact Check : SC ने नहीं सुनाई पीएम को छह साल की सजा, रवीश कुमार का डीपफेक वीडियो वायरल
विश्वास न्यूज ने विस्तार से इसकी पड़ताल की। दावा फर्जी साबित हुआ। दरअसल रवीश कुमार का डीपफेक ऑडियो इस्तेमाल करके वायरल वीडियो को तैयार किया गया है।
- By: Ashish Maharishi
- Published: Oct 2, 2025 at 01:49 PM
नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री को लेकर सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल किया जा रहा है। इसमें देश के वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार को कथित तौर पर यह कहते हुए सुना जा सकता है कि सुप्रीम कोर्ट ने प्रधानमंत्री की डिग्री को फर्जी घोषित करते हुए उन्हें छह साल की सजा सुनाई है। इस वीडियो को सच समझकर कई सोशल मीडिया यूजर्स शेयर कर रहे हैं।
विश्वास न्यूज ने विस्तार से इसकी पड़ताल की। दावा फर्जी साबित हुआ। दरअसल रवीश कुमार का डीपफेक ऑडियो इस्तेमाल करके वायरल वीडियो को तैयार किया गया है। पीएम की डिग्री को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा कोई फैसला नहीं सुनाया है, जैसा कि वायरल वीडियो में दावा किया गया है।
क्या हो रहा है वायरल?
इंस्टाग्राम Adil Raza Qadari ने 28 सितंबर को एक वीडियो पोस्ट करते हुए दावा किया कि पीएम नरेंद्र मोदी को छह साल की सजा हो गई।

पोस्ट को सच मानकर कई यूजर शेयर कर रहे हैं। पोस्ट के आर्काइव वर्जन को यहां देखें।
पड़ताल
विश्वास न्यूज ने वायरल दावे की पड़ताल के लिए सबसे पहले गूगल ओपन सर्च टूल का इस्तेमाल किया। इसके लिए हमने कुछ कीवर्ड बनाकर सर्च किया । हमें कई मीडिया रिपोर्ट्स मिलीं, जिनमें बताया गया कि दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि विश्वविद्यालय डिग्री दिखाने के लिए बाध्य नहीं है।
भास्कर डॉट कॉम की वेबसाइट पर अगस्त में प्रकाशित एक रिपोर्ट में बताया गया, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बैचलर डिग्री सार्वजनिक नहीं होगी। दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्रीय सूचना आयोग का आदेश पलट दिया। कोर्ट ने कहा कि विश्वविद्यालय डिग्री दिखाने के लिए बाध्य नहीं है। दरअसल, केंद्रीय सूचना आयोग ने 2016 में एक याचिका पर दिल्ली यूनिवर्सिटी को 1978 में बीए की परीक्षा पास करने वाले सभी छात्रों के रिकॉर्ड सार्वजनिक करने का आदेश दिया था।”
25 अगस्त 2025 को आजतक ने भी अपनी वेबसाइट पर दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर विस्तार से खबर प्रकाशित की।
पड़ताल के दौरान हमें Ravish Kumar Official नाम के चैनल पर रवीश कुमार का एक वीडियो मिला। 25 अगस्त 2025 के इस वीडियो में दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर टिप्पणी की गई।
वायरल वीडियो से जुड़ी पुष्टि के लिए हमने पत्रकार रवीश कुमार से संपर्क किया और वीडियो उनके साथ शेयर किया। उन्होंने हमें पुष्टि देते हुए बताया कि वायरल पोस्ट फर्जी है।
जांच के अगले चरण में ज्यादा पुष्टि के लिए हमने हमारे सहयोगी एमसीए की पहल डीपफेक्स एनालिसिस यूनिट (डीएयू) से संपर्क किया। वायरल मल्टीमीडिया में इस्तेमाल ऑडियो को जांच के लिए हमने इसे डीएयू के साथ शेयर किया। डीपफेक डिटेक्शन टूल्स की मदद से डीएयू ने इसे चेक किया। उन्होंने अपनी जांच में इस ऑडियो ट्रैक के एआई से क्रिएटेड होने की संभावना की पुष्टि की। डीएयू ने हिया टूल की एनालिसिस को हमारे साथ शेयर किया, जिसमें इस ऑडियो के एआई से क्रिएटेड होने की आशंका की पुष्टि होती है। टूल की एनालिसिस ऑडियो ट्रैक के एआई से क्रिएटेड होने की संभावना की पुष्टि करता है। यह संभावना 99 प्रतिशत बताई गई।

इसी तरह Aurigin.ai ने ऑडियो को 100% जेनरेटेड बताया। Aurigin.ai एक स्विस डीप-टेक कंपनी है जिसके पास उन्नत ऑडियो डीपफेक डिटेक्शन इंजन है।

हमारी पड़ताल से स्पष्ट है कि रवीश कुमार की आवाज में वायरल हो रहा वीडियो डीपफेक है।
जांच के अंत में हमने फर्जी पोस्ट शेयर करने वाले यूजर की जांच की । पता चला कि इस इंस्टाग्राम यूजर Adil Raza Qadari को सात हजार से ज्यादा लोग फॉलो करते हैं। यह अकाउंट मार्च 2025 में बनाया गया है।
निष्कर्ष: विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में पाया कि वायरल हो रहा वीडियो में रवीश कुमार का डीपफेक ऑडियो इस्तेमाल किया गया है। पीएम मोदी की डिग्री को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें कोई सजा नहीं सुनाई है। वायरल दावा पूरी तरह बेबुनियाद साबित हुआ।
- Claim Review : सुप्रीम कोर्ट ने नरेंद्र मोदी को सुनाई छह साल की सजा
- Claimed By : IG User Adil Raza Qadari
- Fact Check : झूठ
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