Explainer : सांसदों के वेतन-भत्ते में इजाफा, अब बढ़कर हुआ 1.24 लाख
आखिर सांसदों का वेतन, भत्ते और पेंशन का निर्धारण कौन करता है। कैसे यह तय होता है कि इसमें इजाफा करना है। आखिर आजादी के बाद से लेकर अब तक इसमें कितनी बढ़ोतरी हो चुकी है। इन्हीं सब सवालों का जवाब इस आर्टिकल में देने की कोशिश की गई है।
- By: Ashish Maharishi
- Published: Apr 4, 2025 at 05:51 PM
नई दिल्ली। भारत सरकार ने सांसदों और पूर्व सांसदों के वेतन, दैनिक भत्ते, पेंशन बढ़ा दिया है। इसे लेकर सरकार की ओर से एक 24 मार्च 2025 को एक अधिसूचना जारी की गई। इस अधिसूचना के अनुसार, यह वृद्धि 1 अप्रैल 2023 से प्रभावी होगी। इसमें लिखा गया कि संसद सदस्य वेतन, भत्ता और पेंशन अधिनियम 1954 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, केंद्र सरकार इसके द्वारा आय-कर अधिनियम 1961 (1961 का 43) की धारा 48 के स्पष्टीकरण के खंड (v) के लागत मुद्रास्फीति सूचकांक पर आधारित है। अधिसूचना संसदीय कार्य मंत्रालय द्वारा जारी की गई।
ऐसे में प्रश्न यह खड़ा होता कि आखिर सांसदों का वेतन, भत्ते और पेंशन का निर्धारण कौन करता है। कैसे यह तय होता है कि इसमें इजाफा करना है। आखिर आजादी के बाद से लेकर अब तक इसमें कितनी बढ़ोतरी हो चुकी है। इन्हीं सब सवालों का जवाब इस आर्टिकल में देने की कोशिश की गई है।
कैसे बढ़ती है सांसदों की सैलरी, भत्ते व पेंशन
सबसे पहले जानते हैं कि आखिर सांसदों के वेतन, भत्ते और पेंशन का निर्धारण कैसे होता है। इसका जवाब 24 मार्च 2025 की अधिसूचना में ही दिया गया है। इसमें साफ-साफ लिखा है कि संसद सदस्य वेतन, भत्ता और पेंशन अधिनियम 1954 (1954 का 30) की धारा 3 की उपधारा (2) और धारा 8क की उप-धारा (1क) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, केंद्र सरकार इसके द्वारा आय-कर अधिनियम 1961 (1961 का 43) की धारा 48 के स्पष्टीकरण के खंड (v) के तहत उपबंधित लागत मुद्रास्फीति सूचकांक के आधार पर संसद सदस्यों और पूर्व संसद सदस्यों के वेतन, दैनिक भत्ते, पेंशन और अतिरिक्त पेंशन में 01 अप्रैल, 2023 से निम्नानुसार वृद्धि अधिसूचित करती है।

आम बोलचाल की भाषा में कहें तो बढ़ती महंगाई के आधार पर सांसदों के वेतन, भत्ते और पेंशन का निर्धारण किया गया है। पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च के आउटरीच प्रमुख चक्षु रॉय कहते हैं कि जब सांसदों को विभिन्न भत्ते मिलते हैं, शोध कर्मचारियों को नियुक्त करने के लिए भत्ता प्रदान करने से सदन में बहस की गुणवत्ता में सुधार हो सकता है।

कब कितना हुआ इजाफा
वर्तमान में सांसदों का वेतन एक लाख से बढ़ाकर 1.24 लाख किया गया है। जबकि वर्ष 2010 में वेतन को 16 हजार से बढ़ाकर 50 हजार रुपए किया गया था। उस वक्त इसे लेकर सड़क पर काफी हंगामा देखने को भी मिला था। उसी वक्त दैनिक भत्ता एक हजार रुपए से बढ़ाकर दो हजार रुपए किया गया था। साल 2018 में वेतन को 50 हजार रुपए से बढ़ाकर सीधे एक लाख रुपए कर दिया गया था।

दिल्ली में मिलता है घर
सांसदों को दिल्ली में रहने के लिए घर मिलता है। इसमें टू बीएचके फ्लैट से लेकर बंगले तक शामिल हैं। इसका चयन इस बात से होता है कि सांसद पहली बार संसद पहुंचे है या फिर कई बार संसद पहुंच चुके हैं। घर के अलावा फ्री बिजली, पानी, टेलीफोन, इंटरनेट जैसी सुविधाएं भी सांसदों को मिलती है। 50 हजार यूनिट बिजली निशुल्क मिलती है। हवाई जहाज से लेकर ट्रेन में प्रथम श्रेणी में यात्रा का लाभ भी सांसद उठा सकते हैं। 34 नि:शुल्क विमान यात्रा में सांसद अपनी पत्नी/पति के अलावा एक सहयोगी को भी ले जा सकते हैं।
टाइम्स ऑफ इंडिया की एक खबर के अनुसार, सांसद का निर्वाचन क्षेत्र भत्ता 70 हजार से बढ़कर 87 हजार हो गया है। इसी तरह ऑफिस खर्च के लिए 60 हजार मिलने वाली राशि अब बढ़कर 75 हजार रुपए हो गई है।
पूर्व सांसदों को पेंशन और अतिरिक्त पेंशन
संसद सदस्य वेतन, भत्ता और पेंशन अधिनियम 1954 के अनुसार, संसद के दोनों सदनों के पूर्व सदस्यों को पेंशन देने का प्रावधान है। इतना ही नहीं, संसद सदस्य ने पांच साल पूरे कर लिए हैं तो अतिरिक्त पेंशन देने का भी प्रावधान है। नई अधिसूचना के मुताबिक, अब पूर्व सांसदों की पेंशन 25 हजार रुपए से बढ़ाकर 31 हजार रुपए कर दी गई है। इसी तरह पांच वर्ष से अधिक सेवा के प्रत्येक वर्ष के लिए अतिरिक्त पेंशन दो हजार से रुपए से बढ़ाकर ढाई हजार कर दिया गया है।
कोविड के वक्त घट गया था सांसदों का वेतन व भत्ता
पीआरएस इंडिया के अनुसार, देश जब कोविड का प्रकोप झेल रहा था, उस वक्त सांसदों के वेतन और भत्तों में कटौती की गई थी। वेतन-भत्तों में कटौतियों का उद्देश्य यह है कि केंद्र को कोविड-19 महामारी की रोकथाम के लिए वित्तीय संसाधन हासिल हो सके। उस वक्त मूल वेतन एक लाख से घटाकर 70 हजार कर दिया गया था। इसके अलावा निर्वाचन क्षेत्र भत्ता 70 हजार को 49 हजार किया गया था।
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