Fact Sheet : वेतन आयोग से कैसे होता है कर्मचारियों को फायदा, जानें वेतन आयोग के बारे में
वेतन आयोग एक सरकारी कमेटी होती है। यह कमेटी सरकारी कर्मचारियों के वेतन, भत्तों, पेंशन, और अन्य लाभों का निर्धारण करने के लिए बनाई जाती है।
- By: Ashish Maharishi
- Published: Jan 23, 2025 at 04:24 PM
नई दिल्ली (Vishvas News)। केंद्र सरकार ने आठवें वेतन आयोग के गठन का फैसला कर लिया है। यह आयोग केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन, भत्ते व पेंशन में वृद्धि की सिफारिश करेगा। इसी के साथ लोगों के मन में वेतन आयोग को लेकर कई सवाल हैं। आइये इस आर्टिकल में जानते हैं वेतन आयोग से जुड़ी कुछ खास बातें।
पीएम मोदी ने दी आठवें वेतन आयोग को मंजूरी
16 जनवरी 2025 को हुई कैबिनेट की मीटिंग में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आठवें वेतन आयोग के गठन के प्रस्ताव को मंजूरी दी। जिसके बाद यह तय हो गया कि आठवें वेतन आयोग का गठन होगा। यह जानकारी खुद सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दी।
50 लाख से ज्यादा कर्मचारियों को होगा फायदा
केंद्र सरकार के इस फैसले से केंद्र सरकार में कार्यरत (सैन्य बलों में कार्यरत कर्मियों समेत) 50 लाख कर्मचारियों और 65 लाख पेंशनभोगियों को सीधे लाभ होगा। पीआईबी के एक्स हैंडल पर 16 जनवरी 8वें केंद्रीय वेतन आयोग की स्थापना को मंजूरी की सूचना दी गई।
राजपत्र में होगा प्रकाशन
8वें वेतन आयोग के गठन के लिए भारत के राजपत्र में इसका प्रकाशन किया जाएगा। इसमें बकायदा बताया जाएगा कि भारत सरकार ने आठवें केंद्रीय वेतन आयोग का गठन करने का निर्णय लिया है। इसके अलावा आयोग के अध्यक्ष, अन्य सदस्यों के अलावा इसका मुख्यालय कहां होगा, जैसी जानकारी भी इसमें दी जाती है।
मनमोहन सिंह ने किया 2014 में सातवें वेतन आयोग का गठन
सातवें वेतन आयोग का गठन फरवरी, 2014 में तब के मनमोहन सिंह सरकार ने किया था और उसकी सिफारिशें मोदी सरकार ने एक जनवरी, 2016 से लागू की थी। सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति और सैन्य बल न्यायाधिकरण के सेवानिवृत्त अध्यक्ष न्यायमूर्ति अशोक कुमार माथुर की अध्यक्षता में 7वें केन्द्रीय वेतन आयोग के गठन को मंजूरी दी गई थी।
वेतन और पेंशन की जाएगी तय
वेतन आयोग एक उच्च स्तरीय सरकारी कमेटी होती है। इसमें सरकारी कर्मचारियों की सैलरी और रिटायर्ड हो चुके कर्मचारियों की पेंशन तय की जाती हे। यह तय करते समय महंगाई, देश की आर्थिक स्थिति जैसे प्रमुख फैक्टर का ध्यान रखा जाता है। यह हर 10 साल में तय किया जाता है। इसके बाद यह आयोग रिपोर्ट बनाकर सरकार को देता है। इसके आधार पर सरकार इसकी सिफारिशें को स्वीकार करती है। वेतन आयोग वित्त मंत्रालय के अंतर्गत आता है।
मई 1946 में बना था पहला वेतन आयोग
देश में पहला वेतन आयोग मई 1946 में बनाया गया था। इसने एक साल बाद मई 1947 में अपनी रिपोर्ट सौंपी थ। इसके बाद दूसरा वेतन आयोग, अगस्त 1957, तीसरा अप्रैल 1970, चौथा जून 1983 को बनाया गया था। पांचवें वेतन आयोग का गठन अप्रैल 1994 को किया गया था।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, 1947 के बाद से, सात वेतन आयोगों का गठन किया गया है, जिनमें से आखिरी वेतन आयोग 2016 में लागू किया गया था। चूंकि 7वें वेतन आयोग का कार्यकाल 2026 में समाप्त हो रहा है, 2025 में प्रक्रिया शुरू करने से इसके पूरा होने से पहले सिफारिशें प्राप्त करने और समीक्षा करने के लिए पर्याप्त समय होगा।
ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर अवनींद्र ठाकुर ने विश्वास न्यूज से कहा , “जब भी सरकारी कर्मचारियों की सैलरी बढ़ती है, तो इसका असर हर सेक्टर पर पड़ता है। निजी सेक्टर पर भी दबाव पड़ता है कि कर्मचारियों की सैलरी उसी अनुपात में बढ़ाई जाए। सैलरी बढ़ने से बाजार में मांग बढ़ती है। जिसके कारण अर्थव्यवस्था में सुधार होता है। वहीं, वेतन आयोग की सिफारिश के अनुसार, जब सरकारी कर्मचारियों की सैलरी बढ़ती है, तो सरकार के आयकर कलेक्शन में भी इजाफा होता है,क्योंकि बहुत सारे कर्मचारियों का टैक्स स्लैब बदल जाता है।”
बिजनेस जर्नलिस्ट कमल शर्मा कहते हैं, “आमतौर पर केंद्र सरकार हर दस साल में वेतन आयोग का गठन करती है, ताकि महंगाई और देश की आर्थिक स्थिति के आधार पर कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन में इजाफा किया जा सके। वेतन आयोग सरकारी कर्मचारियों के जीवन स्तर और महंगाई इन दो कारणों को खासतौर पर ध्यान में रखते हुए वेतन को बढ़ाने की सिफारिश करता है।”
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