X
X

Fact Check: मुस्लिम महिलाओं के कांवड़ लेकर जाने की तस्वीर दस साल पुरानी, भ्रामक दावे से हुई वायरल 

बुर्का पहने कांवड़ यात्रा लेकर जाती महिलाओं की तस्वीर को गलत दावे के साथ शेयर किया जा रहा है। असल में वायरल तस्वीर साल 2015 की है और इंदौर की है। दस साल पहले सावन के आखिरी सोमवार के दिन अलग-अलग धर्म की महिलाओं ने मिलकर कांवड़ यात्रा निकाली थी।

नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। सोशल मीडिया पर बुर्का पहने कांवड़ लेकर जाती महिलाओं की एक तस्वीर तेजी से वायरल हो रही है। फोटो को शेयर कर दावा किया जा रहा है कि इंदौर में मुस्लिम महिलाएं पहली बार कांवड़ लेकर निकली।

विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में पाया कि वायरल दावा भ्रामक है। असल में वायरल तस्वीर साल 2015 की है और इंदौर की है। दस साल पहले सावन के आखिरी सोमवार के दिन अलग-अलग धर्म की महिलाओं ने मिलकर कांवड़ यात्रा निकाली थी। इस यात्रा में शामिल होने के लिए  मुस्लिम, हिंदू, सिख, ईसाई और पारसी समाज की महिलाएं आई थी। इसी यात्रा की तस्वीर को अब गलत दावे के साथ शेयर किया जा रहा है। 

क्या हो रहा है वायरल ?

फेसबुक यूजर ‘suryavanshi_saini_shab’ ने 15 जुलाई 2025 को शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा है, “फतवे देना शुरू कराे बे इतिहास में पहली बार कावड़ लेकर निकलीं मुस्लिम महिलाएं, बाबा भोले का किया जलाभिषेक साक्षात परमब्रह्म परमेश्वर हैं भगवान शिव, हर धर्म-मजहब-पंथ में इन्ही परमात्मा की इबादत होती है। मामला इंदौर का है।”

पोस्ट के आर्काइव लिंक को यहां पर देखें।

पड़ताल 

वायरल दावे की सच्चाई जानने के लिए हमने गूगल पर संबंधित कीवर्ड्स की मदद से सर्च किया। हमें दावे से जुड़ी एक रिपोर्ट न्यूज 18 की आधिकारिक वेबसाइट पर मिली। रिपोर्ट को 24 अगस्त 2015 को प्रकाशित किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, “इंदौर में सावन के आखिरी सोमवार पर साम्प्रदायिक सद्भाव की अनूठी मिसाल देखने को मिली। शहर में पहली बार अपनी तरह की अनूठी कांवड़ यात्रा सर्व धर्म एकता का संदेश दिया। इस कांवड़ यात्रा में हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई और पारसी समाज की महिलाएं कांवड़ लेकर शामिल हुईं। मुस्लिम महिलाओं ने बुर्का पहनकर कांवड़ यात्रा की। शहर के मधुमिलन चौराहे से शुरू हुई कांवड़ यात्रा गीता भवन मंदिर पर संपन्न हुई। यात्रा में हिन्दू महिलाएं पारंपरिक केसरिया वस्त्र, मुस्लिम महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा बुर्के में नजर आईं। क्रिश्चियन, पारसी व सिख समाज भी पारंपरिक वेशभूषा के साथ इस अनूठे आयोजन में शामिल हुआ।”

प्राप्त जानकारी के आधार पर हमने यूट्यूब पर संबंधित कीवर्ड्स की मदद से सर्च किया। हमें दावे से जुड़ा एक वीडियो उमेश चौधरी नामक एक यूट्यूब चैनल पर मिला। वीडियो को 26 अगस्त 2015 को शेयर किया गया था। वीडियो को इंदौर में निकली कांवड़ यात्रा का बताया गया है। 

अधिक जानकारी के लिए हमने नईदुनिया डॉट कॉम, इंदौर के चीफ रिपोर्टर उदय सिंह से संपर्क किया। उन्होंने हमें बताया कि वायरल तस्वीर हाल-फिलहाल की नहीं, बल्कि साल 2015 की है। कई धर्मों की महिलाएं इस कांवड़ यात्रा में शामिल हुई थी। 

पहले भी यह तस्वीर कई सोशल मीडिया पर इसी दावे के साथ वायरल हो चुकी है। विश्वास न्यूज ने इसकी जांच कर सच्चाई सामने रखी थी। पूरी रिपोर्ट को यहां पर पढ़ा जा सकता है।

अंत में हमने फोटो को गलत दावे के साथ शेयर करने वाले यूजर के अकाउंट को स्कैन किया। हमने पाया कि यूजर को एक हजार छह सौ लोग से ज्यादा लोगों फॉलो करते हैं। 

निष्कर्ष : विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में पाया कि बुर्का पहने कांवड़ यात्रा लेकर जाती महिलाओं की तस्वीर को भ्रामक दावे के साथ शेयर किया जा रहा है। असल में वायरल तस्वीर साल 2015 की है और इंदौर की है। दस साल पहले सावन के आखिरी सोमवार के दिन अलग-अलग धर्म की महिलाओं ने मिलकर कांवड़ यात्रा निकाली थी। इस यात्रा में शामिल होने के लिए  मुस्लिम, हिंदू, सिख, ईसाई और पारसी समाज की महिलाएं आई थी। इसी यात्रा की तस्वीर को अब गलत दावे के साथ शेयर किया जा रहा है। 

  • Claim Review : इंदौर में सावन के महीने में कांवड़ लेकर जाती मुस्लिम महिलाओं की तस्वीर।
  • Claimed By : FB User suryavanshi_saini_shab
  • Fact Check : भ्रामक

पूरा सच जानें... किसी सूचना या अफवाह पर संदेह हो तो हमें बताएं

सब को बताएं, सच जानना आपका अधिकार है। अगर आपको ऐसी किसी भी मैसेज या अफवाह पर संदेह है जिसका असर समाज, देश और आप पर हो सकता है तो हमें बताएं। आप हमें नीचे दिए गए किसी भी माध्यम के जरिए जानकारी भेज सकते हैं...

टैग्स

अपनी प्रतिक्रिया दें

No more pages to load

संबंधित लेख

Next pageNext pageNext page

Post saved! You can read it later