नई दिल्ली (विश्वास न्यूज़ टीम)। सोशल मीडिया पर सरदार पटेल की स्‍टैचू से जुड़ी एक पोस्‍ट वायरल हो रही है। इसमें दावा किया जा रहा है कि दुनिया की सबसे बड़ी स्‍टैचू में दरार आ गई है। फेसबुक, ट्विटर से लेकर वॉट्सऐप तक में ये तेजी से वायरल हो रही है। विश्वास न्यूज टीम की जांच में ये मैसेज फर्जी साबित हुआ।

क्‍या है वायरल पोस्‍ट में?

इस पोस्ट को Rajeev Jain नामक यूजर ने फेसबुक पर पोस्ट किया जो वायरल हो गया है। अंग्रेजी में इस लाइन के साथ पोस्ट को शेयर किया गया था –After successfully damaged 2000 notes within 2 years Sardar Statue cracking in 2 weeks. इस पोस्ट को 1,687 लोगों ने शेयर किया और 30 कमेंट आए थे। इस पोस्ट को यूजर ने अपनी फेसबुक वॉल से डिलीट कर दिया है।

Tej Singh Jaglan नाम के एक अन्य यूजर ने भी इसे फेसबुक पर पोस्ट किया है। उसके अनुसार, एक महीना पुरानी Statue of Unity में दरारें आनी शुरू। 3000 करोड़ खर्च करके चीन में बनवाई गई इस मूर्ति का हाल. इसको बनाने का ठेका अंबानी की L&T को दिया गया था जिसने इसे आगे ठेके पर देकर चीन से बनवाई। ये घोटाले की एक नायाब मिसाल है। इस पोस्ट को 150 लाइक, 29 कमेंट्स और 62 लोगों ने शेयर किया है।

पड़ताल

सच्चाई जानने के लिए हमने गुजरात के स्थानीय समाचारपत्रों को देखने का फैसला लिया।

संदेश समाचारपत्र की हेडिंग-

સ્ટેચ્યૂ ઓફ યુનિટીમાં પડી ‘તિરાડો’, જાણો વધુ વિગત

इसका गूगल ट्रांसलेशन के जरिए हमने अनुवाद किया, तो हिंदी इस प्रकार थी। स्टैचू ऑफ यूनिटी की प्रतिमा में दरारें, अधिक जानकारी के लिए जानें

હાલ સ્ટેચ્યુ ઓફ યુનિટી પ્રતિમા પર તિરાડો પડી હોવાની અફવાએ સોશિયલ મીડીયામાં જોર પકડયું છે. એની સત્ય હકીકત એ છે કે 182 મીટર ઊંચી પ્રતિમા ઊભી કરવી હોય તો કોઇ સિંગલ પાર્ટથી ઉભી કરવી શક્ય જ નથી. સ્ટેચ્યૂ ઓફ યુનિટી પ્રતિમા પર તિરાડો પડી ગઇ હોવાની અફવા વેલ્ડિંગના કારણે જોઇન્ટની તિરાડો દેખાતા ભાષ થાય છે.

नीचे का पोस्ट कुछ यूं था। जिसका हमने गूगल ट्रांसलेशन के जरिए अनुवाद किया।

हाल ही में सोशल मीडिया में एक पोस्ट वायरल हुई जिसमें स्टैचू ऑफ यूनिटी की प्रतिमा में दरार आने की बात कही गई है। सच्चाई यह है कि 182 मीटर ऊंची मूर्ति बनाने के लिए इसके कई हिस्सों को जोड़ा गया है। नजदीक से देखेंगे तो पाएंगे कि यह मूर्ति को ज़ोड़ने के लिए की गई बेल्डिंग है, जो जोड़ने के लिए की जाती है।

આટલી મોટી પ્રતિમા અલગ અલગ પ્રકારના હજારોની સંખ્યામાં જોઇન્ટ ભેગા કરીને ઊભી કરવી પડે છે. એવી જ રીતે સરદાર પટેલની પ્રતિમા સ્ટેચ્યુ ઓફ યુનીટી પણ હજારોની સંખ્યામાં જોઇન્ટ ભેગા કરી ખાસ પ્રકારનું વેલ્ડીંગ મારી ઊભી કરાઇ છે.

इतनी बड़ी प्रतिमा को बनाने के लिए मूर्ति के हजारों छोटे-छोटे टुकड़ों को जोड़ा गया है। इस तरह मूर्ति को जोड़ने के लिए बेल्डिंग का प्रयोग हुआ है।

हमने तेज सिंह जगलान के फेसबुक प्रोफाइल का विश्लेषण किया, ताकि ये पता लगाया जा सके कि यूजर किसी विशेष विचारधारा की तरफ जुड़ाव तो नहीं रखते हैं। उनकी पोस्ट का विश्लेषण करने पर पता चला कि उनकी अधिकतर पोस्ट बीजेपी विरोधी दिखाई दे रही हैं। इससे ऐसा लगता है कि उन्होंने खास मकसद से इस फोटो को पोस्ट किया है।

हम और भी तसल्ली कर लेना चाहते थे इसलिए हमने स्टैचू ऑफ यूनिटी को बनाने वाली ऑथिरिटी से संपर्क करने का फैसला किया। हमने स्टैचू ऑफ यूनिटी के एक्जीक्यूटिव इंजीनियर जे के ग्रेसिया से बात की। उन्होंने इस पूरे मामले पर विस्तार से बताते हुए कहा कि ये मूर्ति डिजिटली डिजाइन है और ब्लॉक्स में बनाई गई है। इस कारण से इसमें सफेद रंग की लाइनिंग दिखाई दे रही हैं। ये सिर्फ मेकिंग पैटर्न है ना कि दरारें।

इसके बाद पड़ताल के दौरान हमारी बात स्टैचू ऑफ यूनिटी के चीफ एडमिनिस्ट्रेटर आई के पटेल से हुई। उन्होंने दरार वाली बात को पूरी तरह से खारिज किया।

हमारी पड़ताल में ये साफ हो जाता है कि स्टैचू ऑफ यूनिटी में किसी तरह की कोई दरार नहीं आई है।

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Claim Review : दावा किया जा रहा है कि स्टैचू ऑफ यूनिटी की मूर्ति में आई है 'दरार'
Claimed By : Tej Singh Jaglan
Fact Check : False

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