पूरा सचः ये सड़क ओडिशा के गांव की नहीं है

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नईदिल्ली(विश्वास न्यूज़) सोशल मीडिया पर अलग-अलग पेज से एक पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है। इस पोस्ट में कहा गया है कि यह तस्वीर ओडिशा की है। यहां आजादी के बाद पहली बार प्रधानमंत्री ग्राम योजना के तहत सड़कों का निर्माण हुआ है। यातायात के साधनों के अभाव में यह इलाका अभी तक पूरी तरह से कटा हुआ था। देश के सूदूरवर्ती इलाके में आजादी के बाद पहली बार इन बच्चों ने अपने गांव में सड़क देखी तो उस पर चलने से पहले चप्पल उतार दिया। बता दें कि ओडिशा में हॉकी विश्वकप का आयोजन हो रहा है इस कारण से भी राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है। हमारी पड़ताल में ये पोस्ट गलत पाई गई है।


इस तस्वीर को अलग-अलग पेज से सोशल मीडिया पर कई लोगों ने शेयर किया और यह तेजी से वायरल हो रहा है। तेजी से वायरल हो रहे इस पोस्ट को देखकर विश्वास न्यूज की टीम ने इसकी सच्चाई जानने के लिए पड़ताल करना जरूरी समझा।

पड़ताल

इस फोटो की सच्चाई जानने के लिए विश्वास न्यूज टीम ने गूगल रिवर्स इमेज की सहायता से सर्च किया तो इंडोनेशिया की एक साइट LIPUTAN 6 का लिंक खुला जिसका शीर्षक था – Bahagia Aspal Masuk Desa, Bocah Lepas Sandal Main di Atasnya.

जब हमने इसे गूगल ट्रांसलेट की सहायता से अनुवाद किया तो उसका जो अर्थ था वह यह था कि पहली बार जब गांव में सड़क बनी तो बच्चों ने चप्पल उतार कर उसका स्वागत किया। 30 अगस्त, 2018 को यह पोस्ट प्रकाशित की गई है।
Liputan6.com, Jakarta Bagi kalian yang tinggal di kota-kota besar tentu sudah tak asing ya melalui jalan beraspal. Bahkan setiap hari tentunya kita melewati jalan beraspal tersebut. Namun berbeda halnya dengan mereka yang tinggal di pedesaan.

Pembangunan yang belum merata membuat beberapa daerah di Indonesia tak bisa menikmati infrastruktur yang memadai. Seperti salah satu yang sangat krusial ialah akses jalan.
पोस्ट की शुरुआती कुछ पंक्तियों को हम अपने पाठकों के लिए हूबहू प्रकाशित कर रहे हैं। इसका अर्थ यह है- आप में से बड़े लोग जो विकसित शहरों/महानगरों में रहते हैं, वो निश्चित रूप से सड़कों से परिचित होंगे,लेकिन ये गांव के बच्चे हैं, इन्होंने पहली बार सड़क देखी है। इंडोनेशिया के ग्रामीण इलाकों में मूलभूत आवश्यकतों की काफी कमी है। आप कह सकते हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में शहरों की तरह विकास की काफी कमी है। सड़क उन्हीं में से एक हैं।

इसी पोस्ट में मास रूफी का 27 अगस्त 2018 का एक ट्वीट है, जिसका अर्थ है- इन बच्चों को देखिए, इनके चेहरे पर कितनी खुशी है। अपने गांव में पहली बार सड़क देखा तो उस पर चलने से पहले चप्पल उतार दिया।
इस तरह से यह स्पष्ट हो गया कि ओडिशा के नाम से सोशल मीडिया पर किया जा रहा यह पोस्ट पूरी तरह से फेक है।

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Written BY Haresh Kumar
  • Claim Review : ओडिशा के गांव की सड़क का झूठा दावा किया जा रहा है
  • Claimed By : रवि राजपूत
  • Fact Check : False

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