Explainer: जानें, भारतीय रिजर्व बैंक लगातार क्यों बढ़ा रहा गोल्ड रिजर्व?
भारत दुनिया के उन देशों में हैं, जहां का केंद्रीय बैंक लगातार अपने गोल्ड भंडार में इजाफा कर रहा है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के मुताबिक, पोलैंड, हंगरी, भारत, तुर्की और उज्बेकिस्तान की गोल्ड होल्डिंग में सबसे अधिक इजाफा हुआ है, वहीं कजाकिस्तान, फिलिपींस, मंगोलिया, जॉर्डन और सिंगापुर के गोल्ड रिजर्व में कमी आई है।
- By: Abhishek Parashar
- Published: Dec 16, 2024 at 05:38 PM
- Updated: Jan 9, 2025 at 01:23 PM
नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। पिछल पांच वर्षों में भारत के गोल्ड भंडार में करीब 40% की भारी बढ़ोतरी हुई है। 30 जून 2020 को जहां भारत का कुल गोल्ड रिजर्व यानी सोने का भंडार 661.41 मीट्रिक टन था, वह 2024 (31 मार्च तक) में बढ़कर 822.10 मीट्रिक टन हो गया। इस अवधि में न केवल भारत के गोल्ड भंडार (फिजिकल होल्डिंग) में इजाफा हुआ, बल्कि भारत की घरेलू गोल्ड होल्डिंग में भी वृद्धि देखने को मिली है।
आरबीआई की 2023-24 की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का कुल गोल्ड रिजर्व या गोल्ड भंडार 822.10 मीट्रिक टन है, जिसमें में भारत में रखे गए कुल गोल्ड रिजर्व की मात्रा 408.31 मीट्रिक टन है, जो आरबीआई के कुल गोल्ड रिजर्व का करीब पचास फीसदी है।

बैंकिंग विभाग का अहम असेट्स – गोल्ड रिजर्व
गोल्ड रिजर्व, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की महत्वपूर्ण परिसंपत्तियों में से एक है और 31 मार्च 2023 के 794.64 मीट्रिक टन के मुकाबले 31 मार्च 2024 तक आरबीआई का कुल गोल्ड रिजर्व 822.10 मीट्रिक टन रहा। गोल्ड रिजर्व में इस बढ़ोतरी की वजह साल के दौरान 24.47 मीट्रिक गोल्ड की खरीदारी रही।
इस 822.10 मीट्रिक टन में से 308.03 मीट्रिक टन गोल्ड भारत में जारी बैंक नोटों के एवज में रखा गया है। 31 मार्च 2023 को यह मात्रा 301.90 मीट्रिक टन थी।
वहीं, 514.07 मीट्रिक टन गोल्ड बैंकिंग विभाग की परिसंपत्ति या असेट के तौर पर रखी गई है, जो 31 मार्च 2023 के 493.54 मीट्रिक टन के मुकाबले अधिक है। वैल्यू के लिहाज से देखें तो 31 मार्च 2023 के 2,30,733.95 करोड़ रुपये के मुकाबले 31 मार्च 2024 को गोल्ड रिजर्व का कुल वैल्यू 2,74,714.27 करोड़ रुपये रहा।
गोल्ड होल्डिंग वाले शीर्ष 10 में शुमार भारत
गोल्ड रिजर्व या होल्डिंग्स के मामले में भारत दुनिया के शीर्ष 10 देशों में शुमार है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों (2024 की तीसरी तिमाही) के मुताबिक, संयुक्त राज्य अमेरिका जहां 8,133.46 टन के साथ गोल्ड रिजर्व के मामले में शीर्ष पायदान पर है, वहीं जर्मनी, इटली, फ्रांस, चीन और स्विट्जरलैंड क्रमश: दूसरे, तीसरे, चौथे और पांचवें पायदान पर हैं।

वहीं, 853.63 टन (30 नवंबर 2024 के आंकड़ों के मुताबिक) के साथ भारत सातवें पायदान पर है, जबकि जापान, नीदरलैंड्स और तुर्की क्रमश: आठवें, नौवें और दसवें पायदान पर हैं।
केंद्रीय बैंकों के लिए महत्वपूर्ण असेट है गोल्ड
लगातार जटिल होते भू-राजनीतिक समीकरण और वित्तीय व्यवस्था में होने वाले उतार-चढ़ाव की वजह से गोल्ड रिजर्व की अहमियत में इजाफा करता है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक, 2023 में केंद्रीय बैंकों ने कुल 1,037 टन गोल्ड की खरीदारी की, जो किसी भी साल में की गई सर्वाधिक दूसरी बड़ी खरीदारी है। इससे पहले केंद्रीय बैंकों ने सर्वाधिक 1,082 टन गोल्ड की खरीदारी 2022 में की थी।

2024 के सेंट्रल बैंक गोल्ड रिजर्व्स (CBGR) के सर्वे के मुताबिक, 29% केंद्रीय बैंकों ने माना कि वे अगले 12 महीनों में अपने गोल्ड रिजर्व में इजाफा करेंगे। यह खरीदारी गोल्ड होल्डिंग, घरेलू सोना उत्पादन और वित्तीय बाजार की आशंकाओं (संकट और महंगाई का जोखिम) को संबोधित करने के लिए पसंदीदा रणनीतिक संतुलन से प्रेरित है।
1.महंगाई के खिलाफ सुरक्षा
गोल्ड को महंगाई के खिलाफ हेजिंग का विकल्प माना जाता है। स्पष्ट शब्दों में समझें तो जब महंगाई की वजह से करेंसी की वैल्यू में गिरावट आती है, तो इसकी एवज में रखा गया सोना इसकी वैल्यू को न केवल बरकरार रखता है, बल्कि उसमें इजाफा ही करता है। साथ ही यह भारत के विदेशी मुद्रा भंडार की खरीदारी क्षमता को भी बेहतर करता है।
2.सुरक्षित परिसंपत्ति
गोल्ड को अक्सर वैश्विक आर्थिक संकट के बीच सुरक्षित असेट या परिसंपत्ति के तौर पर देखा जाता है। युद्ध या अन्य संकट के समय जहां निवेश के अन्य साधनों की कीमतों में उतार-चढ़ाव होता है, वहीं गोल्ड इनके मुकाबले अपेक्षाकृत स्थिर होता है। साथ ही जरूरत पड़ने पर रिजर्व गोल्ड का इस्तेमाल कर्ज चुकाने के लिए किया जा सकता है।
किसी भी देश के लिए यह स्थिति उस वक्त ज्यादा अहम हो जाती है, जब दूसरा देश कमजोर वैल्यू की वजह से उनकी करेंसी को स्वीकार नहीं करता है, तो गोल्ड रिजर्व उनके काम आता है।
2.विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार फॉरेन करेंसी असेट्स (एफसीए), गोल्ड (गोल्ड डिपॉजिट समेत), स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (एसडीआर) होल्डिंग्स और रिजर्व ट्रांशे पोजिशन (आरटीपी) से मिलकर बना होता है। यानी भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को गोल्ड की भूमिका अहम होती है और यह किसी भी देश को उसकी करेंसी पर निर्भरता में कमी लाता है, जिसकी वैल्यू में आर्थिक अनिश्चितता के दौरान उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है।
1991 संकट
1991 के बजट के मुताबिक, देश में भुगतान संकट की समस्या गंभीर रूप ले चुकी थी और मौजूदा विदेशी मु्द्रा भंडार करीब 2500 करोड़ रुपये का था, जिससे महज दो हफ्ते के आयात बिल का भुगतान किया जा सकता था। 1991 का बजट, उस वक्त पेश किया गया, जब देश गंभीर आर्थिक स्थिति में था और 1990-91 में देश का राजकोषीय घाटा (सरकार की कुल राजस्व आय और खर्च के बीच का अंतर) 8 % से अधिक होने का अनुमान था, जो 1980 की शुरुआत में 6% और 1970 के मध्य में करीब 4% के स्तर पर था।
ऐसी स्थिति में सरकार को बैंक ऑफ इंग्लैंड के पास रखे गए गोल्ड रिजर्व के एक हिस्से को गिरवी रखना पड़ा था और इसके बदले में भारत को कुल 405 मिलियन डॉलर का कर्ज मिला था। हालांकि, नवंबर 1991 में इस कर्ज का भुगतान कर दिया या था।
भारत दुनिया के उन देशों में हैं, जहां का केंद्रीय बैंक लगातार अपने गोल्ड भंडार में इजाफा कर रहा है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के मुताबिक, पोलैंड, हंगरी, भारत, तुर्की और उज्बेकिस्तान की गोल्ड होल्डिंग में सबसे अधिक इजाफा हुआ है। 2024 की तीसरी तिमाही में भारत के गोल्ड रिजर्व में कुल 12.88 टन की वृद्धि हुई है।

वहीं कजाकिस्तान, फिलिपींस, मंगोलिया, जॉर्डन और सिंगापुर के गोल्ड रिजर्व में कमी आई है।

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के मुताबिक, 2024 की तीसरी तिमाही में केंद्रीय बैंकों की तरफ से की गई खरीदारी (186 टन) में कमी देखी गई लेकिन YTD आधार पर यह 2022 के खरीदारी रुझान के मुताबिक है।
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