Fact Check: सीरिया की सैयदनाया जेल से निकाले गए कैदी का यह वीडियो असली नहीं AI से बना है
विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में पाया कि वायरल वीडियो असली नहीं है। इस वीडियो को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की मदद से बनाया गया है। एआई की मदद से तैयार किये गए वीडियो को फर्जी दावे के साथ सीरिया की सैयदनाया जेल से निकाले गए कैदी का बताते हुए फैलाया जा रहा है।
- By: Umam Noor
- Published: Dec 19, 2024 at 06:31 PM
- Updated: Dec 19, 2024 at 06:39 PM
नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक शख्स को सुरंग जैसी कैद से बाहर निकलते हुए देखा जा सकता है। वीडियो शेयर करते हुए यूजर्स दावा कर रहे हैं कि यह सीरिया की सैयदनाया जेल के कैदी का है, जो पिछले 13 साल से जेल में कैद था और अब बशर अल-असद के शासन के पतन के बाद आजाद हुआ है।
विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में पाया कि वायरल वीडियो असली नहीं है। इस वीडियो को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की मदद से बनाया गया है। एआई की मदद से तैयार किये गए वीडियो को फर्जी दावे के साथ सीरिया की सैयदनाया जेल से निकाले गए कैदी का बताते हुए फैलाया जा रहा है।
क्या है वायरल पोस्ट में?
वायरल पोस्ट को शेयर करते हुए फेसबुक यूजर ने लिखा, ”सीरियाई पत्रकार के अनुसार, कह रहा है (सैयदनाया जेल) भूमिगत कैदियों ने कुछ बीस साल, कुछ 15,10,5 साल से सूरज की रोशनी भी नहीं देखी है, और उनमें से एक ये है जिसको 13 वर्षों पहली बार रौशनी देखने को मिली है।”
पोस्ट के आर्काइव वर्जन को यहां देखें।

पड़ताल
पड़ताल के पहले चरण में हमने सबसे पहले वीडियो को ध्यान से देखा। वीडियो में व्यक्ति की उंगलियों और दांतों की बनावट अलग दिख रही हैं। वहीं, वीडियो का मंजर देखने में असली नहीं लग रहा है। इससे हमें संदेह हुआ कि वीडियो को एआई की मदद से बनाया गया है।
इसी बुनियाद पर पड़ताल को शुरू करते हुए हमने वायरल वीडियो को एआई वीडियो और तस्वीरों की पहचान करने वाले टूल हाइव मॉडरेशन पर अपलोड किया। यहां मिले नतीजों के मुताबिक, यह 82% एआई के जरिये बनाया गया है। (0-1 के स्केल पर) इस वीडियो को hailuo की मदद से बनाये जाने की सम्भावना करीब पचास फीसदी (0.46) है।

सर्च को आगे बढ़ाते हुए हमने hailuo सर्च किया और हम hailuoai.video नाम की वेबसाइट पर पहुंचे। इसमें दी गई जानकारी के मुताबिक, इसके जरिये एआई वीडियो और शार्ट क्लिप्स तैयार की जा सकती हैं।

वायरल वीडियो के फ्रेम को हमने एक दूसरे एआई कॉन्सेप्ट टेस्टिंग टूल ‘एआई इमेज डिटेक्टर डॉट ओआरजी’ पर भी अपलोड किया। यहां दी गई जानकारी के अनुसार, ये फोटो 79.55 फीसद AI से क्रिएटेड है।

अधिक जानकारी के लिए हमने डीएयू (एमसीए की पहल) से संपर्क किया। उन्होंने हमारे साथ हाईव एआई की एनालिसिस को शेयर किया जिसके मुताबिक, इस वीडियो पर एआई से बने होने की संभावना बेहद अधिक है और इसके hailuo से बनाए जाने की संभावना (0.97) सर्वाधिक है।

हाईव एआई और हाईव मॉडरेशन दोनों ही टूल्स की एनालिसिस इस वीडियो के hailuo प्लेटफार्म से बनाये जाने की अधिकतम संभावना की पुष्टि करता है।
अब बारी थी फोटो शेयर करने वाले फेसबुक यूजर की सोशल स्कैनिंग करने की। हमने पाया कि यूजर ने कोई निजी जानकारी साझा नहीं की है। वहीं, यूजर को 43 लोग फॉलो करते हैं।
निष्कर्ष: विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में पाया कि वायरल वीडियो असली नहीं है। इस वीडियो को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की मदद से बनाया गया है। एआई की मदद से तैयार किये गए वीडियो को फर्जी दावे के साथ सीरिया की सैयदनाया जेल से निकाले गए कैदी का बताते हुए फैलाया जा रहा है।
- Claim Review : यह सीरिया की सैयदनाया जेल का कैदी है, जो पिछले 13 साल से जेल में कैद था।
- Claimed By : FB User- Kashmiri kashmiri
- Fact Check : झूठ
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