FAKE कस्टमर केयर नंबर के जरिए साइबर ठग खाली कर रहे हैं लोगों के बैंक अकाउंट, जानें बचने के उपाय
क्या आप भी किसी कंपनी के कस्टमर केयर नंबर के लिए इंटरनेट का सहारा लेते हैं? यदि जवाब हां है, तो सावधान हो जाएं। साइबर ठग इंटरनेट सर्च में अपना नंबर फीड करके लोगों को ठग रहे हैं।
- By: Ashish Maharishi
- Published: Sep 9, 2025 at 11:08 AM
- Updated: Sep 29, 2025 at 11:26 AM
नई दिल्ली (Ashish Maharishi)। क्या आप भी किसी कंपनी के कस्टमर केयर नंबर के लिए इंटरनेट का सहारा लेते हैं? यदि जवाब हां है, तो सावधान हो जाएं। साइबर ठग इंटरनेट सर्च में अपना नंबर फीड करके लोगों को ठग रहे हैं। लोगों को ठगने के लिए स्कैमर्स अपना नंबर इंटरनेट पर फेक लिस्टिंग करवा लेते हैं। जब ग्राहक इंटरनेट पर दिए गए फर्जी नंबरों पर कॉल करता है, तो जालसाज उनसे पर्सनल और बैंकिंग जानकारी लेकर खाते से पैसे उड़ा लेते हैं। सबसे पहले जानते हैं कुछ हालिया ठगी के बारे में।
केस नंबर 1
यूपी के गाजियाबाद निवासी बासुकी नाथ अपने जियो हॉटस्टार ऐप के ऑटो पे सब्सक्रिप्शन शुल्क को हटाने के लिए ऑनलाइन कस्टमर केयर नंबर सर्च किया। उनके हाथ जो नंबर लगा, वह फर्जी नंबर था। साइबर ठग ने उन्हें एक लिंक भेजा। जिस पर क्लिक करने के बाद उनके बैंक अकाउंट से कुल 14.78 लाख रुपए निकाल लिए गए। ठग ने मोबाइल हैक करके रुपए ट्रांसफर करने के बाद मोबाइल पर मैसेज भी डिलीट कर दिया।
केस नंबर 2
हरियाणा के गुरुग्राम निवासी आनंद कुमार सिंह को अपने पिता के घुटनों के दर्द के इलाज के लिए पतंजलि योग पीठ सेंटर हरिद्वार का ऑनलाइन मोबाइल नंबर खोजना भारी पड़ गया। इंटरनेट पर सर्च करने पर एक नंबर मिला। इस नंबर पर कॉल करने पर साइबर ठग ने एक लाख 80 हजार रुपए ठगी कर ली। घटना मई 2025 की है।
गाजियाबाद के संजय नगर निवासी बासुकी नाथ ने बताया कि 24 जून को उनके जियो हॉटस्टार का 299 रुपये का सब्सक्रिप्शन ऑटो-पे हो गया। अगले दिन भी 299 रुपये का भुगतान ऑटो-पे पर हो गया। उन्होंने मामले की शिकायत करने के लिए कस्टमर केयर नंबर सर्च किया। बातचीत के बाद उन्हें एक लिंक भेजा गया। इसके बाद उनके अकाउंट से लाखों रूपए चले गए।
इन दोनों केस में साइबर ठगी के लिए एक लिंक पर क्लिक कराया गया। एपीके फाइल डाउनलोड करके साइबर ठगी का यह कोई नया मामला नहीं है। जानकारी के अभाव में लोग साइबर ठग के जाल में फंस जाते हैं और ठगी का शिकार होते हैं।

ऐसे मामलों की तह में जाने के लिए विश्वास न्यूज ने साइबर एक्सपर्ट और पुलिस के आला अधिकारी की मदद ली। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ चातक वाजपेयी ने बातचीत में बताया कि कस्टमर केयर नंबर सर्च करते समय यदि हम अलर्ट नहीं रहते हैं, तो ठगी आसानी से हो सकती है। दरअसल, स्कैमर्स सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन (SEO) का इस्तेमाल करते हुए अपना नंबर गूगल के टॉप सर्च में लिस्ट करवा लेते हैं। इसके बाद जैसे ही कोई कस्टमर गूगल पर किसी कंपनी का नंबर सर्च करता है, तो उसे फर्जी नंबर सबसे पहले दिखता है। कस्टमर इसे असली नंबर समझकर कॉल कर देता है।
वाजपेयी आगे कहते हैं कि इसके बाद ठगी की प्रक्रिया आगे बढ़ती है। स्कैमर्स कस्टमर को लिंक भेजकर फोन हैक कर लेता है। यही एपीके फाइल होती है। कुछ मामलों में स्क्रीन शेयरिंग ऐप की भी मदद से भी ठगी की जाती है।

साइबर एक्सपर्ट आर्या त्यागी कहते हैं कि सामान्य तौर पर देखा गया है कि इंटरनेट पर किसी कंपनी के कस्टमर केयर नंबर को सर्च करने या ऐप डाउनलोड करने के दौरान हैकर्स यूजर के मोबाइल को हैक करके उसके फोन पर मौजूद सामग्री का दुरुपयोग करके ठगी करते हैं। इसलिए यदि कभी भी आपके मोबाइल पर कोई एपीके फाइल या अनजान नंबर से कोई लिंक, पीडीएफ आए तो उसे गलती से भी क्लिक न करें।
साइबर ठग एसईओ की मदद से अपनी फर्जी वेबसाइट या सोशल मीडिया पेज को रैंक करवाते हैं। इससे होता यह है कि इंटरनेट पर जब लोग किसी कंपनी का नंबर सर्च करते हैं, तो फर्जी वेबसाइट सबसे ऊपर आ जाती है। यूजर्स को लगता है कि यह असली वेबसाइट है। वहां पर मौजूद नंबर से संपर्क करने पर उस उधर से पूरी जानकारी लेने के बाद वॉट्सऐप पर एपीके फाइल भेजा जाता है। जैसे ही यूजर्स इस पर क्लिक करता है, तो पूरे फोन का एक्सेस हैकर्स के पास चला जाता है। जिसके माध्यम से साइबर ठग बैंक अकाउंट को खाली कर देते हैं।

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने 16 जून 2025 को अपने ग्राहकों को सचेत करते हुए एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट किया। इसमें बैंक ने अपने ग्राहकों को अलर्ट करते हुए कहा कि इंटरनेट पर कस्टमर केयर नंबर खोजते हैं, तो सावधान हो जाएं। स्कैमर्स इसके जरिए आपको ठग सकते हैं।
फर्जी वेबसाइट कैसे पहचानें
इंटरनेट पर यदि किसी कंपनी का कस्टमर केयर नंबर खोज रहे हैं, तो हमेशा असली वेबसाइट पर मौजूद जानकारी पर ही भरोसा करे। याद रखें कि सर्च के दौरान सबसे पहले आने वाली वेबसाइट असली हो, जरूरी नहीं है। गृह मंत्रालय के तहत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘Cyberdost’ ने नकली वेबसाइट पहचाने के कछ टिप्स बताएं हैं।
- नकली वेबसाइट में जरूरत से ज्यादा पॉप अप मैसेज खुल सकते हैं।
- फर्जी वेबसाइट में अक्सर स्पेलिंग और ग्रामर की गलतियां हो सकती हैं।
- असली नाम की नकल कर कुछ अक्षर या शब्द बदल दिए जाते हैं।
- गूगल सर्च में वेबसाइट के नाम के पास दिख रहे तीन बिंदु पर क्लिक कर वेबसाइट की लोकेशन, सुरक्षा स्तर व अन्य डिटेल्स देख सकते हैं।

फर्जी वेबसाइट की गूगल पर करें शिकायत
गूगल के अनुसार, किसी वेबसाइट को या उसके कंटेंट की शिकायत गूगल पर जाकर की जा सकती है। जो भी वेबसाइट गूगल की सेवा की शर्तों या नीतियों का उल्लंघन करती है, उसकी रिपोर्ट कर सकते हैं। इसके अलावा गूगल को सीधे फीडबैक भी भेज सकते हैं।
शिकायत कहां करें
वित्तीय धोखाधड़ी होने पर सबसे पहले अपने बैंक या जिस कंपनी के फर्जी कस्टमर केयर नंबर के कारण ठगी हुई है, वहां शिकायत करें। गृह मंत्रालय के भारतीय साइबर क्राइम समन्वय केंद्र के अनुसार, साइबर अपराध की शिकायतें भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) की वेबसाइट cybercrime.gov.in पर दर्ज की जा सकती हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करके भी शिकायत दर्ज की जा सकती हैं।

कई साइबर क्राइम केस को सुलझा चुके जयपुर, डीसीपी साउथ राजर्षि राज ने बताया कि लोगों को इस बात को समझना होगा कि अनजान नंबर से आए किसी भी लिंक पर क्लिक न करें, क्योंकि साइबर अपराधी इन लिंक के जरिए मोबाइल में एपीके फाइल डाउनलोड करके हैक कर लेते हैं। जिसके बाद मोबाइल की सारी जानकारी से लेकर ओटीपी तक अपराधियों के पास पहुंच जाती है।

विश्वास न्यूज अपने पाठकों को साइबर ठगी से बचाने के लिए समय-समय पर कई खास स्टोरी करता रहा है। इसमें साइबर अपराध के तरीकों से लेकर बचाव तक के बारे में जानकारी दी गई है। इन खबरों को नीचे पढ़ा जा सकता है।
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