Fact Check: UGC के नए नियम के विरोध में मनोज तिवारी के नाम से फर्जी बयान वायरल
भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने यूजीसी के नए नियम को लेकर ऐसा कोई बयान नहीं दिया है। सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट फेक है।
- By: Sharad Prakash Asthana
- Published: Jan 28, 2026 at 02:53 PM
- Updated: Jan 30, 2026 at 06:13 PM
नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए नियमों को लेकर कुछ संगठन विरोध कर रहे हैं। इससे जोड़कर सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हो रही है। इसमें भाजपा सांसद मनोज तिवारी की तस्वीर के साथ दावा किया जा रहा है कि उन्होंने यूजीसी के नए नियमों को गलत बताते हुए पीएम मोदी की आलोचना की है।
विश्वास न्यूज की जांच में वायरल बयान फेक निकला। उत्तर-पूर्वी दिल्ली से भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने यूजीसी के नए नियम को लेकर ऐसा कोई बयान नहीं दिया है।
क्या है वायरल पोस्ट?
इंस्टाग्राम यूजर netajiunfiltered ने इस पोस्ट को शेयर (आर्काइव लिंक) किया है। इस पर लिखा है, “भाजपा दिल्ली के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सांसद मनोज तिवारी ने मोदी द्वारा पास किए गए UGC बिल को गलत बताते हुए कहा है की मोदी सवर्ण विरोधी हैं मोदी सवर्णों को बर्बाद करने पर तुले हैं आपने समाज की पीडा को समझा।“

पड़ताल
वायरल दावे की जांच के लिए हमने कीवर्ड से इस बारे में गूगल पर सर्च किया, लेकिन ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं मिली। अगर मनोज तिवारी ऐसा कोई बयान देते मीडिया में जरूर आता।
पड़ताल के दौरान हमें ईटीवी भारत की वेबसाइट पर 24 जनवरी को छपी खबर (आर्काइव लिंक) मिली। इसमें दावा किया गया है कि मनोज तिवारी ने एक पोस्ट कर नियम की आलोचना की है। खबर में पोस्ट का लिंक नहीं दिया गया है। हालांकि, यह वायरल बयान से अलग है।

लोकमत हिंदी के यूट्यूब चैनल पर 25 जनवरी को अपलोड वीडियो न्यूज (आर्काइव लिंक) में इस फेसबुक पोस्ट को देखा जा सकता है।
इसमें फेसबुक पेज Manoj Tiwari BJP पर 24 जनवरी को की गई पोस्ट (आर्काइव लिंक) का स्क्रीनशॉट प्रयोग किया गया है।

फेसबुक पेज Manoj Tiwari BJP (आर्काइव लिंक) को चेक करने पर पता चला कि यह मनोज तिवारी का आधिकारिक पेज नहीं है।

इसके बाद हमने हमने मनोज तिवारी के आधिकारिक एक्स और फेसबुक अकाउंट को स्कैन किया, लेकिन उस पर यूजीसी के नए नियम से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिली। स्कैनिंग में हमें ईटीवी भारत की खबर में दी गई पोस्ट भी नहीं मिली।
इस बारे में हमने उत्तर-पूर्वी दिल्ली के भाजपा सांसद मनोज तिवारी के पीए रोहित राठौर से संपर्क कर उनको वायरल पोस्ट भेजी। उन्होंने कहा कि मनोज तिवारी ने ऐसा कोई बयान नहीं दिया है। उनको बदनाम करने के मकसद से इस तरह की पोस्ट वायरल की जा रही है। इससे पहले भी ऐसा हो चुका है। वह इस मामले में पुलिस से शिकायत करेंगे।
क्या है नया नियम?
यूजीसी के गजट के अनुसार, उच्च शिक्षण संस्थानों में ‘विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थान में समता के संवर्धन हेतु) विनियम, 2026’ को लागू किया जाता है। इसका मकसद धर्म, जाति, दिव्यांगता और लिंग आधारित भेदभाव को खत्म करना है। इसमें एससी, एसटी, ओबीसी, दिव्यांग और महिलाएं शामिल हैं। इसके तहत प्रत्येक संस्थान में ‘समान अवसर केंद्र’ बनेगा और ‘समता समिति’ गठित होगी। समिति भेदभाव संबंधी शिकायतों की तय समय में जांच करेगी। इसमें एससी-एसटी, ओबीसी, दिव्यांग और महिलाओं का प्रतिनिधित्व जरूरी होगा।
इसको लेकर कुछ संगठन विरोध कर रहे हैं। एनडीटीवी की 27 जनवरी की खबर के अनुसार, इसके नियम 3(सी) को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर इसको रद्द करने की मांग की गई है।
यूजीसी के नए नियम को लेकर कुछ और फेक पोस्ट वायरल हो चुकी हैं, जिनकी पड़ताल को यहां पढ़ा जा सकता है।
फेक पोस्ट को शेयर करने वाले यूजर की प्रोफाइल को हमने स्कैन किया। एक विचारधारा से प्रभावित यूजर के 58 हजार से अधिक फॉलोअर्स हैं।
निष्कर्ष: भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने यूजीसी के नए नियम को लेकर ऐसा कोई बयान नहीं दिया है। सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट फेक है।
- Claim Review : भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने यूजीसी के नए नियमों को गलत बताते हुए पीएम मोदी की आलोचना की है।
- Claimed By : Insta User- netajiunfiltered
- Fact Check : झूठ
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