Fact Check: UGC के नए नियमों के विरोध में प्रदर्शनकारियों की पिटाई के दावे से वायरल तस्वीर पुरानी और असंबंधित घटना की है
कोलकाता में दिसंबर 2025 में बांग्लादेश में हिंदू युवक की हत्या के विरोध में प्रदर्शन हुआ था। इस दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज भी किया था। उस दौरान की तस्वीर को यूजीसी के नए नियम के खिलाफ प्रदर्शन की बताकर गलत दावा किया जा रहा है।
- By: Sharad Prakash Asthana
- Published: Jan 27, 2026 at 02:30 PM
- Updated: Jan 30, 2026 at 06:15 PM
नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए नियमों का कुछ संगठन विरोध कर रहे हैं। इससे जोड़कर सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हो रही है। इसमें शामिल तस्वीर में पुलिस को प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज करते हुए देखा जा सकता है। कुछ यूजर्स इसे शेयर कर दावा कर रहे हैं कि यह फोटो यूजीसी के नए नियम का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों पर हुए लाठीचार्ज का है।
विश्वास न्यूज की जांच में तस्वीर कोलकाता में करीब एक माह पहले हुए प्रदर्शन की निकली। उस समय पुलिस ने बांग्लादेश में हिंदू युवक की हत्या के विरोध में प्रदर्शन कर रहे लोगों पर लाठीचार्ज किया था। उस घटना की तस्वीर को यूजीसी के नए नियम के विरोध का बताकर गलत दावा किया जा रहा है।
क्या है वायरल पोस्ट?
फेसबुक यूजर Mukesh Kumar Singmare ने 27 जनवरी 2026 को तस्वीर पोस्ट (आर्काइव लिंक) की है। इस पर लिखा है, “यूजीसी विरोध करने वाले का हाल अंध भक्त प्रशासन ने कर दिया इसका विरोध”।

पड़ताल
वायरल तस्वीर की जांच के लिए हमने उसे गूगल लेंस से सर्च किया तो इससे संबंधित वीडियो हमें बांग्लादेश के यूट्यूब चैनल News24 Extra पर मिला। इसमें वायरल तस्वीर से जुड़ी क्लिप को शुरू में ही देखा जा सकता है। इसमें वीडियो को कोलकाता में बांग्लादेश दूतावास के सामने प्रदर्शन के दौरान का बताया गया है। वीडियो न्यूज को 23 दिसंबर 2025 को अपलोड किया गया है।
बांग्लादेश के फेसबुक पेज ‘কালের আলো‘ पर 24 दिसंबर 2025 को वायरल तस्वीर से संबंधित वीडियो को अपलोड किया गया है। इसमें भी इसे कोलकाता में हुए प्रदर्शन का बताया गया है।

वीडियो में लाठीचार्ज के दौरान पीछे लगे बैरिकेडिंग पर कोलकाता ट्रैफिक पुलिस लिखा हुआ देखा जा सकता है।

Taaza Bengal नाम के फेसबुक पेज पर 23 दिसंबर 2025 को अपलोड वीडियो में इस प्रदर्शन के कुछ अन्य क्लिप्स को अपलोड किया गया है। इसके अनुसार, “बांग्लादेश हाई कमीशन पर दीपू दास की लिंचिंग का विरोध कर रहे हिंदुओं पर लाठीचार्ज किया गया। ‘बांगिया हिंदू जागरण मंच’ ने कोलकाता में बांग्लादेश में दीपू चंद्र दास की हत्या की निंदा करने के लिए विरोध रैली का आयोजन किया। हालांकि, विरोध प्रदर्शन तब हिंसक हो गया जब प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बैरिकेड्स तोड़ दिए और कमीशन के पास धरना दिया। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया।”

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के यूट्यूब चैनल पर भी इस प्रदर्शन से संबंधित वीडियो न्यूज को 23 दिसंबर 2025 को अपलोड किया गया है।
इस बारे में कोलकाता में दैनिक जागरण के ब्यूरो चीफ जेके बाजपेयी का कहना है कि यह कोलकाता में हुए प्रदर्शन की पुरानी तस्वीर है।
क्या है नया नियम?
दिल्ली टेक्निकल यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पर यूजीसी के गजट को देखा जा सकता है। इसके अनुसार, ‘विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थान में समता के संवर्धन हेतु) विनियम, 2026’ को लागू किया जाता है। इसे धर्म, जाति, दिव्यांगता और लिंग आधारित भेदभाव को खत्म करने के लिए लागू किया गया है, जिसमें अनूसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), दिव्यांग और महिलाएं शामिल हैं। इसके तहत प्रत्येक संस्थान में ‘समान अवसर केंद्र’ बनेगा, जो सभी वर्गों को समान अवसर देना होगा। साथ ही ‘समता समिति’ होगी, जो भेदभाव संबंधी शिकायतों की जांच करेगी। इसमें एससी, एसटी, ओबीसी, दिव्यांग और महिलाओं का प्रतिनिधित्व जरूरी होगा।
नियम का विरोध!
एनडीटीवी की वेबसाइट पर 27 जनवरी को अपलोड खबर के अनुसार, यूजीसी के नए नियम पर विवाद हो गया है। देश के कुछ राज्यों में इसे लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। दिल्ली में सवर्ण समाज के लोगों ने यूजीसी ऑफिस के बाहर प्रदर्शन किया। वहीं, इसके नियम 3(सी) को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर इसको रद्द करने की मांग की गई है।

तस्वीर को गलत दावे के साथ शेयर करने वाले यूजर के करीब 15 हजार फॉलोअर्स हैं।
निष्कर्ष: कोलकाता में दिसंबर 2025 में बांग्लादेश में हिंदू युवक की हत्या के विरोध में प्रदर्शन हुआ था। इस दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज भी किया था। उस दौरान की तस्वीर को यूजीसी के नए नियम के खिलाफ प्रदर्शन की बताकर गलत दावा किया जा रहा है।
- Claim Review : यह फोटो यूजीसी के नए नियम का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों पर हुए लाठीचार्ज का है।
- Claimed By : Insta User- Mukesh Kumar Singmare
- Fact Check : झूठ
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