X
X

Fact Check : राजस्‍थान के टोंक के नाम पर वायरल की गई Fake पोस्‍ट

विश्‍वास न्‍यूज ने वायरल पोस्‍ट की जांच की। यह फर्जी साबित हुई। टोंक के नाम पर एक काल्पनिक कहानी बनाई गई है।

नई दिल्‍ली (Vishvas News)। सोशल मीडिया में इनदिनों आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग काफी बढ़ गया है। इसकी मदद से कभी फर्जी रिपोर्टर तो कभी प्‍लेन क्रैश के फर्जी वीडियो बनाकर वायरल किए जाते रहे हैं। अब इसी क्रम में चार तस्‍वीरों का एक कोलाज वायरल करते हुए दावा किया जा रहा है कि राजस्‍थान के टोंक में सोयाबीन की फसल बर्बाद होने से दुखी एक किसान जब खेत में डूबकर आत्‍महत्‍या करने की कोशिश कर रहा था तो उसकी बेटी ने उसे बचा लिया।

विश्‍वास न्‍यूज ने वायरल पोस्‍ट की जांच की। यह फर्जी साबित हुई। टोंक के नाम पर एक काल्‍‍पनिक कहानी बनाई गई है। इस पोस्‍ट में इस्‍तेमाल की गईं तस्‍वीरें एआई की मदद से बनाई गई हैं। हमारी जांच में वायरल पोस्‍ट पूरी तरह से झूठी साबित हुई।

क्‍या हो रहा है वायरल

फेसबुक यूजर Prathviraj Rawat Farkiya ने 14 जुलाई को एक कोलाज शेयर करते हुए दावा किया, “राजस्थान की टोंक जिले मे रहने वाली बेटी की बहादुरी देख कर आप भी काँप उठोगे। पिता एक किसान उसने पहली बार हि सोयाबीन की खेती जमीन उधार ले कर करी थी और इसी बारिश के दौरान उनकी फसल सारी बाढ़ की तरह बह कर चली गई तभी पिता को पानी मे डुबके मरने की कोशिश करते हुए देखा तो उनको बचा लिया जहां देखो जहां किसानों के साथ धोखा ही धोखा है नकली डीपी, नकली पेस्टिसाइड, नकली दवाइयां किसानों को बेचकर सभी मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। किसान का हमदर्द कोई भी नहीं है।”

वायरल पोस्‍ट के कंटेंट को यहां ज्‍यों का त्‍यों लिखा गया है। इसे सच मानकर कई यूजर्स शेयर कर रहे हैं। पोस्‍ट का आर्काइव वर्जन यहां देखा जा सकता है।

पड़ताल

विश्‍वास न्‍यूज ने वायरल पोस्‍ट में किए गए दावे की हकीकत जानने के लिए सबसे पहले गूगल ओपन सर्च टूल का इस्‍तेमाल किया। सर्च के दौरान हमें एक भी मीडिया रिपोर्ट्स नहीं मिली, जो वायरल दावे की पुष्टि कर सके।

जांच को आगे बढ़ाते हुए हमने वायरल कोलाज की जांच की। इन तस्‍वीरों में हमें कई खामियां नजर आई। यदि ध्‍यान से किसान और उसकी बेटी की हथेलियों को देखेंगे तो पहली नजर में ही अंगुलियों की बनावट में खामी नजर आएगी । किसान की कानी अंगुली और बेटी की मध्‍य वाली अंगुली की लंबाई काफी ज्‍यादा थी। तस्‍वीरों में इसके अलावा भी कई विजुअल एलिमेंट स्वाभाविक नहीं दिखे। इसलिए हमें इन तस्‍वीरों के एआई निर्मित होने का शक हुआ। हमने इन तस्‍वीरों को एआई डिटेक्टर टूल की मदद से चेक किया।

हाइव मॉडरेशन की एनालिसिस में इस तस्वीर के एआई से बने होने की संभावना 78% प्रतिशत बताया गया। इसी तरह डीकॉपी डॉट एआई टूल ने वायरल तस्‍वीर के 97.85 फीसदी एआई निर्मित होने का रिजल्‍ट दिया।

जांच को आगे बढ़ाते हुए विश्‍वास न्‍यूज ने एआई एक्‍सपर्ट मोहित साहू से संपर्क किया। उनके साथ भी वायरल तस्‍वीर को शेयर किया। उन्‍होंने बताया कि वायरल तस्‍वीरें एआई निर्मित हैं।

पड़ताल के दौरान विश्‍वास न्‍यूज ने राजस्‍थान के वरिष्‍ठ पत्रकार संतोष पांडेय से संपर्क किया। उन्‍होंने भी जानकारी देते हुए बताया कि टोंक में ऐसा कोई हादसा नहीं हुआ है, जैसा कि वायरल पोस्‍ट में दावा किया गया है।

निष्‍कर्ष : विश्‍वास न्‍यूज की पड़ताल में टोंक के नाम पर वायरल हुई पोस्‍ट फर्जी साबित हुई। वहां किसी किसान ने खेत में डूबकर जान देने की कोशिश नहीं की। वायरल तस्‍वीरें भी एआई की मदद से बनाई गईं हैं।

  • Claim Review : एक किसान जब खेत में डूबकर आत्‍महत्‍या करने की कोशिश कर रहा था तो उसकी बेटी ने उसे बचा लिया।
  • Claimed By : FB User Prathviraj Rawat Farkiya
  • Fact Check : झूठ

पूरा सच जानें... किसी सूचना या अफवाह पर संदेह हो तो हमें बताएं

सब को बताएं, सच जानना आपका अधिकार है। अगर आपको ऐसी किसी भी मैसेज या अफवाह पर संदेह है जिसका असर समाज, देश और आप पर हो सकता है तो हमें बताएं। आप हमें नीचे दिए गए किसी भी माध्यम के जरिए जानकारी भेज सकते हैं...

टैग्स

अपनी प्रतिक्रिया दें

No more pages to load

संबंधित लेख

Next pageNext pageNext page

Post saved! You can read it later