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Explainer : सर्वाइकल कैंसर के खात्मे के लिए सरकार सक्रिय, एक्सपर्ट से जानें कैसे बचें इस जानलेवा बीमारी से

एचपीवी वैक्‍सीन के अलावा, सुरक्षित सेक्‍स और जीवनशैली में सकारात्‍मक बदलाव करके सर्वाइकल कैंसर से बचा जा सकता है।

  • By: Ashish Maharishi
  • Published: Mar 31, 2025 at 03:34 PM
  • Updated: Mar 31, 2025 at 03:56 PM

नई दिल्‍ली। भारत सरकार सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए जागरूकता के साथ वैक्‍सीनेशन को भी बढ़ावा दे रही है। इस क्रम में सरकार सर्वाइकल कैंसर से बचाने वाली एचपीवी वैक्सीन को बढ़ावा दे रही है। केंद्र सरकार की ओर से 9 से 14 साल की लड़कियों के लिए सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए यह वैक्‍सीन फ्री में लगाई जा रही है। इसके लिए बाकायदा केंद्रीय बजट में प्रावधान भी किया गया है। एक्‍सपर्ट कहते हैं कि एचपीवी वैक्‍सीन के अलावा, सुरक्षित सेक्‍स और जीवनशैली में सकारात्‍मक बदलाव करके सर्वाइकल कैंसर से बचा जा सकता है।

एचपीवी इन्फॉर्मेशन सेंटर की एक रिपोर्ट के अनुसार, अनुमान है कि हर साल भारत में 1,23,907 महिलाओं का गर्भाशय और ग्रीवा के कैंसर का इलाज किया जाता है। इसमें से 77,348 महिलाएं इस बीमारी के कारण मर जाती हैं।

वर्ष 2024-25 का बजट पेश करते हुए केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने गर्भाशय और ग्रीवा कैंसर की रोकथाम के लिए टीकाकरण का प्रस्‍ताव रखा था। जिसके बाद से ही देश में यह चर्चा का विषय बन गया।

केंद्र सरकार ने सर्वाइकल कैंसर के खात्‍मे के लिए सितंबर 2024 में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के साथ मिलकर क्वाड कैंसर मूनशॉट नाम की एक पहल शुरू की। इसका लक्ष्‍य सवाईकल कैंसर की जांच और वैक्‍सीनेशन कार्यक्रम को बढ़ाने के साथ प्रारंभिक स्‍टेज की पहचान और प्रभावी इलाज उपलब्‍ध करना है।

क्‍यों होता है सर्वाइकल कैंसर

बीएचयू के चिकित्‍सा विज्ञान संस्‍थान के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रो. मनोज पांडेय कहते हैं कि ह्यूमन पैपिलोमा वायरस की वजह से महिलाओं को सर्वाइकल कैंसर होता है। भारत में महिलाओं को यह कैंसर काफी ज्‍यादा होता है। इससे बचाव का यही उपाय है कि नियमित जांच और एचपीवी वैक्सीन लगवाएं। किसी भी प्रकार का लक्षण दिखने पर डॉक्‍टर से परामर्श जरूर लें।

दिल्‍ली की वरिष्‍ठ गायनेकोलॉजिस्ट डॉक्टर कल्‍पना श्रीवास्‍तव कहती हैं कि सर्वाइकल कैंसर से बचने के लिए इसके लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्‍टर को दिखाएं, क्‍योंकि यदि एक बार यह बढ़ गया तो मरीज को काफी दिक्‍कतों का सामना करना पड़ सकता है।

सर्वाइकल कैंसर क्‍या होता है?

सर्वाइकल कैंसर को आम बोलचाल की भाषा में बच्‍चेदानी के मुंह का कैंसर भी बोलते हैं। दिल्‍ली की वरिष्‍ठ गायनेकोलॉजिस्ट डॉक्टर कल्‍पना श्रीवास्‍तव सर्वाइकल कैंसर के बारे में विस्‍तार से बताते हुए कहती हैं कि यह कैंसर गर्भाशय ग्रीवा में होता है। गर्भाशय बच्चे के विकास का स्थान होता है, जबकि ग्रीवा गर्भाशय को योनि से जोड़ता है। यह कैंसर गर्भाशय और ग्रीवा की परत में असामान्य कोशिकाओं की वृद्धि है। इस कैंसर का मुख्‍य कारण ह्यूमन पैपिलोमा वायरस है। इसके सौ से ज्‍यादा प्रकार होते हैं।

सर्वाइकल कैंसर के लक्षण

सर्वाइकल कैंसर के लक्षण शुरुआत में बिल्कुल पता नहीं चलते हैं। कई सालों बाद इसके लक्षण उभरने लगते हैं। जैसे-जैसे यह बढ़ता है, शरीर में इसके लक्षण दिखने लगते हैं। डॉक्टर कल्‍पना श्रीवास्‍तव बताती हैं कि सर्वाइकल कैंसर के प्रमुख लक्षणों में योनि से बदबूदार पानी निकलना, संबंध बनाने के दौरान दर्द और खून निकलना है। इसके अलावा पीठ में हल्‍का दर्द, पैरों में सूजन होना इसके लक्षण हो सकते हैं।

सर्वाइकल कैंसर से कैसे बचें

डॉक्‍टर्स कहते हैं कि जागरूकता और नियमित जांच से सर्वाइकल कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसके अलावा इसके कोई भी लक्षण दिखने पर तुरंत अपने डॉक्‍टर से संपर्क करें। किसी भी लक्षण को हल्‍के में लेना भारी पड़ सकता है। डॉ. मनोज पांडेय कहते हैं कि हमेशा सुरक्षित संभोग ही करें। एक से ज्‍यादा पार्टनर से संभोग से सर्वाइकल कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। डॉक्टर कल्‍पना श्रीवास्‍तव कहती हैं कि नियमित जांच से इसके खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। यदि सर्वाइकल कैंसर को शुरुआत में ही पहचान लिया जाए, तो हजारों जान बचाई जा सकती हैं।

डिस्क्लेमर : यह आर्टिकल एक्सपर्ट्स की मदद से लिखा गया है। यहां दी गई जानकारी केवल सूचना के लिए है। किसी भी सलाह के लिए अपने डॉक्‍टर से परामर्श लें।

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