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Analysis: BRICS सम्मेलन और नेपाल आपदा के दौरान कैसे गढ़े गए झूठे नैरेटिव?

  • By: Abhishek Parashar
  • Published: Sep 22, 2026 at 04:05 PM
  • Updated: Sep 23, 2026 at 06:57 PM

नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। 10वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन 12 और13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में हुआ, जिसकी अध्यक्षता भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की। यह सम्मेलन कई कारणों से सुर्खियों में रहा, जिनमें सर्वाधिक प्रमुख ‘नई दिल्ली घोषणा’ रही। इस साझा घोषणापत्र में 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर में हुए उस आतंकवादी हमले की निंदा की गई, जिसमें 26 लोग मारे गए थे। इसके अलावा, इस समूह ने एकतरफा टैरिफ का विरोध करते हुए इजरायल-फिलीस्तीन संघर्ष के न्यायपूर्ण व स्थायी समाधान पर भी जोर दिया और इसके ल‍िए दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन किया।

ब्रिक्स सम्मेलन ऐसे समय में हुआ है जब दुनिया अभूतपूर्व भू-राजनीतिक संघर्षों और आर्थिक अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है। इस सम्मेलन में रूस-यूक्रेन युद्ध, मध्य पूर्व में जारी तनाव और ब्रिक्स के विस्तार समेत मुख्य अंतरराष्ट्रीय व भू-राजनीतिक परिस्थितियां हावी रहीं। हालांकि, नई दिल्ली में संपन्न हुआ वर्ष 2026 का यह सम्मेलन न केवल वैश्विक कूटनीति का केंद्र रहा, बल्कि सोशल मीडिया पर दुष्प्रचार और भ्रामक जानकारियों, यानी मिस-इन्फॉर्मेशन के ल‍िए भी चर्चा का विषय बना रहा।

विश्वास न्यूज के ‘BRICS 2026’ फैक्ट-चेक डेटा का विश्लेषण करने पर एक स्पष्ट और चिंताजनक पैटर्न सामने आता है। इस दौरान नेताओं की कूटनीतिक छवि को निशाना बनाने, घरेलू राजनीति में मनमुटाव दिखाने और व्यवस्था को लेकर गलत नैरेटिव सेट करने के लिए फेक न्यूज का सुनियोजित तरीके से इस्तेमाल किया गया, जिसमें एआई-क्रिएटेड कंटेंट की भूमिका अहम रही।

यह एनालिसिस विश्वास न्यूज के फैक्ट चेक रिपोर्ट्स के आधार पर की गई है।

1. AI-जेनरेटेड मल्टीमीडिया का इस्तेमाल: ब्रिक्स 2026 के दौरान नेताओं की छवि खराब करने या भ्रामक नैरेटिव सेट करने के लिए AI टूल्स का सहारा लिया गया। इस दौरान सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल किया गया, जिसमें दावा किया गया कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के सामने झुके थे। विश्वास न्यूज की जांच में सामने आया कि यह वीडियो असल में AI टूल्स की मदद से बनाया गया एक फेक वीडियो था।

ऐसी ही एक अन्य तस्वीर वायरल हुई, जिसमें दावा किया गया कि ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पीएम मोदी, शी चिनफिंग और अन्य वैश्विक नेताओं के साथ एक ग्रुप सेल्फी ली। विश्वास न्यूज ने अपनी जांच में इस तस्वीर को एआई-क्रिएटेड पाया।

इस फेक तस्वीर में ईरान के दिवंगत राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी और ब्राजील के वर्तमान राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा भी मौजूद दिखे । हालांकि, सम्मेलन में ईरान के मौजूदा राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने भाग लिया था और ब्राजील से उनके विदेश मंत्री भारत आए थे।

2. राजनीतिक नेताओं को निशाना बनाने के लिए फोटोशॉप्ड/फेक तस्वीरें: ब्रिक्स 2026 के दौरान भारत में विपक्षी दलों और नेताओं के बीच मतभेद दिखाने के लिए तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ की गई। इसी संदर्भ में एक तस्वीर वायरल हुई, जिसमें ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने आए मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ राहुल गांधी और प्रियंका गांधी नाश्ता करते दिखे । तस्वीर के साथ दावा किया गया कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को नाश्ते की टेबल पर जगह (कुर्सी) नहीं दी गई। फैक्ट-चेक में यह तस्वीर एडिटेड और इसके साथ किया गया दावा भ्रामक साबित हुआ।

3. पुरानी तस्वीरों और घटनाओं को ब्रिक्स 2026 का बताकर शेयर करना: सालों पुरानी कूटनीतिक तस्वीरों को वर्तमान ब्रिक्स सम्मेलन का बताकर वायरल किया गया। सोशल मीडिया पर पीएम मोदी की तस्वीर वाली एक प्लेट भेंट करने की फोटो वायरल हुई जिसे ब्रिक्स 2026 से जोड़ा गया, जबकि असल में वह प्लेट चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने 2019 में भारतीय प्रधानमंत्री को भेंट की थी।

4. असंबंधित वीडियो को दिल्ली का बताकर अशांति का दावा करना: ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की कार्रवाई को लेकर गलत दावे भी किए गए, ताकि यह दिखाया जा सके कि दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन हुए । पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग का एक वीडियो इस दावे के साथ वायरल किया गया कि ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान दिल्ली पुलिस ने लोगों पर लाठीचार्ज किया । जांच में पता चला कि यह वीडियो दिल्ली का नहीं, बल्कि तिरुपति का था।

ब्रिक्स 2026 के दौरान मिस-इन्फॉर्मेशन का मुख्य ट्रेंड विज़ुअल मैनिपुलेशन और जेनरेटिव AI के दुरुपयोग का रहा। इस दौरान पुरानी घटनाओं को नए संदर्भ में पेश करने, विरोध-प्रदर्शनों के असंबंधित वीडियो को दिल्ली का बताने और अत्याधुनिक AI टूल्स का उपयोग करके पुतिन की कथित सेल्फी जैसी मनगढ़ंत तस्वीरों और कुछ भ्रामक वीडियो के जरिए मिस-इन्फॉर्मेशन फैलाने का काम किया गया। यह ट्रेंड दिखाता है कि वैश्विक आयोजनों के दौरान भ्रामक सूचनाएं फैलाने का काम अब केवल प्लेन टेक्स्ट तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इनमें वास्तविक नजर आने वाली तस्वीरें और AI से बने वीडियो भी शामिल हो गए हैं।

वर्ष 2009 में केवल चार बड़े उभरते देशों (ब्राजील, रूस, भारत और चीन) के साथ शुरू हुआ यह संगठन लगातार बढ़ता जा रहा है। दिसंबर 2010 के अंत में दक्षिण अफ्रीका को इसमें शामिल किया गया, जिसके बाद ‘BRIC’ नाम बदलकर ‘BRICS’ हो गया। इसके बाद, 1 जनवरी 2024 को मिस्र, इथियोपिया, ईरान और यूएई आधिकारिक तौर पर ब्रिक्स में शामिल हुए। 

इस संगठन में सबसे हालिया विस्तार जनवरी 2025 में हुआ, जब 10वें सदस्य के रूप में इंडोनेशिया इस समूह का हिस्सा बना। आज, 10 देशों का यह समूह सामूहिक रूप से वैश्विक आबादी का 50% और वैश्विक जीडीपी के 40% ह‍िस्से का प्रतिनिधित्व करता है। वहीं, कुल वैश्विक ट्रेड में इस समूह की 26 फीसदी हिस्सेदारी है। 

नेपाल आपदा और मिस-इन्फॉर्मेशन

मिस-इन्फॉर्मेशन का यह सिलसिला केवल ब्रिक्स 2026 जैसे वैश्विक आयोजनों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि प्राकृतिक आपदाएं भी इसका एक बड़ा श‍िकार बनीं। नेपाल में 26 अगस्त 2026 को आई भीषण बाढ़ की त्रासदी इसका एक बड़ा उदाहरण है। विश्वास न्यूज की फैक्ट-चेक रिपोर्ट्स का विश्लेषण करने पर यह साफ होता है कि 26 अगस्त 2026 को नेपाल (खासकर नेपाल-चीन सीमा) में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन को लेकर सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर मिस-इन्फॉर्मेशन फैलाई गई।

यह एनालिसिस विश्वास न्यूज के फैक्ट चेक रिपोर्ट्स के आधार पर की गई है।

इस आपदा के दौरान भी दुष्प्रचार का मुख्य हथियार विजुअल मैनिपुलेशन रहा। 

1. AI-जेनरेटेड तस्वीरें और वीडियो: नेपाल में आई आपदा की भयावहता को बढ़ा-चढ़ाकर या नाटकीय रूप से दिखाने के लिए फेक न्यूज फैलाने वालों ने AI टूल्स का जमकर इस्तेमाल किया। विश्वास न्यूज ने एक ऐसे वायरल वीडियो का फैक्ट-चेक किया, जिसमें बाढ़ के पानी में डूबे एक स्कूल का विजुअल था और एक कुत्ते द्वारा बच्चे को बचाते हुए भी दिखाया गया था। जांच में यह वीडियो AI-निर्मित निकला।

‘बाढ़ से पहले और बाद’ की तस्वीरें: एक वायरल कोलाज में नेपाल में बाढ़ से पहले और बाद के मंजर को दिखाया गया था। विश्वास न्यूज और AI एक्सपर्ट्स की पड़ताल में सामने आया कि तबाही दिखाने वाली यह तस्वीर असली नहीं थी, बल्कि इसे AI टूल्स से बनाया गया था। बाढ़ के कारण नेपाल में एक घर के टूटकर गिरने का वीडियो भी वायरल हुआ, जो असल में रियल फुटेज न होकर AI-जेनरेटेड था।

2. पुराने और असंबंधित वीडियो का इस्तेमाल: अन्य देशों की प्राकृतिक आपदाओं या पुराने वीडियो को नेपाल का बताकर शेयर करने का ट्रेंड भी इस दौरान बहुत हावी रहा। हमारी एनालिसिस बताती है कि पेरू, अमेरिका, फिलीपींस, मेक्सिको समेत अलग-अलग देशों की असंबंधित घटनाओं के कुछ पुराने वीडियो नेपाल में आई मौजूदा बाढ़ का बताकर शेयर किए गए।

नेपाल बाढ़ 2026 के मामले में मिस-इन्फॉर्मेशन का ट्रेंड स्पष्ट रूप से क्लिकबेट और सहानुभूति बटोरने पर केंद्रित रहा। टेक्स्ट या लिखित अफवाहों के बजाय, लोगों को गुमराह करने के लिए AI-निर्मित हाइपर-रियलिस्टिक, यानी वास्तविक दिखने वाली काल्पनिक वीडियो और तस्वीरों का सहारा लिया गया, ताकि सोशल मीडिया पर ज्यादा से ज्यादा शेयर और व्यूज बटोरे जा सकें।

नेपाल-तिब्बत सीमा के पास 26 अगस्त 2026 को आए विनाशकारी फ्लैश फ्लड और मलबे के सैलाब ने उत्तरी और मध्य नेपाल में भारी तबाही मचाई। नेपाल सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस आपदा की वजह से मरने वालों का की संख्या 1,451 है, जबकि 4,896 लोग अभी भी लापता हैं।

Source:NRRRMA

ब्रिक्स सम्मेलन और नेपाल आपदा को लेकर वायरल हुए प्रमुख दावों की जांच करती सभी फैक्ट चेक रिपोर्ट्स को क्रमश: यहां और यहां पढ़ा जा सकता है।

Our Sources
  1. BRICS 2026
  2. BRICS New Delhi Declaration/MEA
  3. Tracker by The Ekantipur
  4. Vishvas News Fact-Check Articles on BRICS & Nepal Floods

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