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Quick Fact Check : वेद, उपनिषद के नाम पर वायरल हुई फर्जी पोस्‍ट, झूठा है दावा

  • By Vishvas News
  • Updated: December 1, 2020

नई दिल्‍ली (Vishvas News)। सोशल मीडिया में एक तस्‍वीर वायरल हो रही है। धर्म विशेष के लोगों पर आपत्तिजनक टिप्‍पणी करते हुए इसे झूठे दावों के साथ वायरल कर रहे हैं। पहले भी एक बार यह तस्‍वीर वायरल हो चुकी है।

विश्‍वास न्‍यूज ने उस वक्‍त भी वायरल तस्‍वीर की जांच की थी। हमें पता चला कि हैदराबाद की पुरानी तस्‍वीर को फर्जी दावों के साथ वायरल किया गया था। पड़ताल को आप विस्‍तार से यहां पढ़ सकते हैं।

क्‍या हो रहा है वायरल

फेसबुक यूजर आर. मोहन कुमार ने 22 नवंबर को एक तस्‍वीर को अपलोड करते हुए दावा किया मुसलमान वेद, उपनिषद और गीता को अपने अनुसार लिख रहे हैं। अंग्रेजी में दावा किया गया : ‘Tricks, words and tactics. Nowadays jihadists are writing Vedas, Upanishads and Gita, their purpose is to misinterpret and defile the traditional religion … This is also an example of tactical jihad. The book of Haraf Prakashani, these books are being published from Kolkata. Aggression has not stopped even today!

वायरल पोस्‍ट का फेसबुक और आकाईव वर्जन देखें।

पड़ताल

विश्‍वास न्‍यूज ने वायरल पोस्‍ट की जांच के लिए गूगल रिवर्स इमेज टूल का सहारा लिया, जिसकी मदद से संबंधित खबर हमें द हिंदू की वेबसाइट पर मिली। 2 अप्रैल 2014 को पब्लिश एक खबर में बताया गया कि हैदराबाद स्थित ‘अल महादुल आली अल इस्लामी’ संस्‍थान के छात्र वेद का अध्‍यन भी करते हैं। तस्‍वीर उसी दौरान की है। पूरी खबर आप यहां पढ़ सकते हैं।

संबंधित पोस्‍ट को लेकर विश्‍वास न्‍यूज ने ‘अल महादुल आली अल इस्लामी’ में संपर्क किया था। संस्‍थान के डिप्टी डायरेक्टर उस्मान आबेदीन ने हमें बताया कि वायरल पोस्‍ट पूरी तरह बेबुनियाद है। यहां सभी धर्मग्रंथों की पढ़ाई होती है। तस्‍वीर कई साल पुरानी है, जब कुछ पत्रकार यहां आए थे।

पूरी पड़ताल को विस्‍तार से आप यहां पढ़ सकते हैं।

निष्कर्ष: विश्‍वास न्‍यूज की पड़ताल में वायरल पोस्‍ट फर्जी निकली। पुरानी तस्‍वीर को झूठे दावों के साथ वायरल किया जा रहा है।

  • Claim Review : मुसलमान हिंदू ग्रंथों में मिलावट कर रहे हैं।
  • Claimed By : फेसबुक यूजर आर मोहन कुमार
  • Fact Check : झूठ
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