Fact Check: यूपी में हत्या के मामले में हुए प्रदर्शन का पुराना वीडियो एमपी में दलित के अंतिम संस्कार को रोकने के दावे से वायरल
यूपी के अमेठी में दिसंबर 2025 में हुए एक हत्याकांड के मामले में परिजनों ने आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था। उस घटना के वीडियो को एमपी में एक दलित के शव को अंतिम संस्कार से रोके जाने के झूठे दावे से शेयर किया जा रहा है।
- By: Sharad Prakash Asthana
- Published: Jun 2, 2026 at 05:56 PM
नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। मध्य प्रदेश का बताकर एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें पुलिस को, अर्थी ले जाते हुए लोगों को रोकते हुए देखा जा सकता है। कुछ यूजर्स इस वीडियो को शेयर कर दावा कर रहे हैं कि एमपी में एक दलित की चिता जलाए जाने से इसलिए रोका गया, ताकि धुआं सामान्य जाति के लोगों के लिए बने श्मशान की तरफ न जाए।
विश्वास न्यूज ने इसकी जांच की तो पता चला कि वायरल वीडियो उत्तर प्रदेश के अमेठी का है, जहां दिसंबर 2025 में श्मशान घाट के केयर टेकर की हत्या के बाद पीड़ित परिजनों ने हत्यारोपियों की गिरफ्तारी की मांग करते हुए प्रदर्शन किया था। उस घटना के वीडियो को एमपी में एक दलित के अंतिम संस्कार को रोके जाने के झूठे दावे से वायरल किया जा रहा है।
क्या है वायरल पोस्ट?
फेसबुक यूजर ‘All India Parisangh’ ने 28 मई 2026 को एक वीडियो पोस्ट (आर्काइव लिंक) करते हुए लिखा, “क्या आपको पता है धुएँ कि भी जाति होती है। मध्य प्रदेश में एक दलित की चिता जलने से केवल इसलिए रोक दी गई क्योंकि उसका धुआं “ब्राह्मणों के श्मशान” तक चला जाता…उस पर भी शर्मनाक ये कि पुलिस भी दलित परिवार पर ही दवाब डाल रही है क्यूं की पुलिस प्रशासन खुद जातिवाद से अंदर तक सड़ा हुआ हैं। शर्म आनी चाहिए ऐसे समाज पर, जहां मौत के बाद भी दलित को सम्मान नहीं मिलता। ज़िंदा था तब दलित होने नाम पर भेदभाव, नफ़रत, ज़लालत, छुआछूत, और जब मर गया तो उसकी चिता का धुंआ भी “अछूत” हो गया जो ब्राह्मणों के शमशान तक नहीं पहुंचना चाहिए वरना बेचारे मरे हुए ब्राह्मण भी अशुद्ध हो जाएंगे। ये सिर्फ भेदभाव नहीं, ये इंसानियत की लाश पर खड़ा ब्राह्मणवाद है। जिस समाज में मृतक की चिता का धुआं भी जाति देखकर स्वीकार किया जाए, उस समाज को सभ्य कहलाने का कोई अधिकार नहीं।”

पड़ताल
वायरल दावे की जांच के लिए हमने वीडियो के कीफ्रेम्स निकालकर उन्हें गूगल लेंस से सर्च किया। इंस्टाग्राम यूजर ‘karni_sena_bharat_official‘ ने इस वीडियो को 16 दिसंबर 2025 को पोस्ट करते हुए लिखा, “अमेठी पुलिस मक्खन सिंह के हत्यारों को पकड़ने की जगह उल्टा परिजनों को धमकी देती हुई बहुत अनर्थ हो जायेगा।”

इंस्टाग्राम यूजर ‘ashupal92’ ने वायरल वीडियो का लंबा वर्जन 17 दिसंबर 2025 को पोस्ट करते हुए इसे इस अमेठी का बताया है।

इस आधार पर हमने कीवर्ड से सर्च किया तो ‘भारत समाचार’ के एक्स हैंडल से 15 दिसंबर 2025 को पोस्ट किए गए तीन वीडियो मिले। जानकारी के अनुसार, अमेठी के जगदीशपुर कोतवाली के गूंगेमऊ गांव में श्मशान के केयरटेकर की हत्या के मामले में परिजनों ने आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर अंतिम संस्कार से मना किया। इस दौरान पुलिस और ग्रामीणों में नोकझोंक हुई। इसमें प्रदर्शन के अन्य वीडियो भी पोस्ट किए गए हैं।
इंस्टाग्राम यूजर ‘ashupal92’ और एक्स यूजर ‘भारत समाचार’ के अकाउंट्स से पोस्ट किए गए वीडियो में दिख रहा पुलिसकर्मी एक ही है।

इससे साबित होता है कि वायरल वीडियो अमेठी का है और किसी अन्य मामले का है।
‘दैनिक जागरण’ की वेबसाइट पर 16 दिसंबर 2025 को छपी खबर के अनुसार, मक्खन सिंह हत्याकांड में पुलिस ने दो आरोपियों, शिवलाल और दद्दू को गिरफ्तार किया है।
अमेठी पुलिस ने 16 दिसंबर 2025 को इस मामले के बारे में जानकारी पोस्ट की थी। इसके अनुसार, मक्खन सिंह का शव 14 मई 2026 को मिला था। पुलिस ने इस मामले में धर्मराज और शिवपाल को गिरफ्तार किया था।
क्या है संदर्भ?
मध्य प्रदेश में अप्रैल 2025 में एक दलित के शव को अंतिम संस्कार से रोके जाने का मामला सामने आया था। श्यौपुर में हुई घटना में दलितों व दबंगों के बीच पथराव हुआ था। इस घटना से नाराज दलितों ने जाम लगा दिया था। बाद में पुलिस-प्रशासन ने अंतिम संस्कार कराया था। ‘आजतक’ की वेबसाइट पर 28 अप्रैल 2025 को इससे संबंधित एक रिपोर्ट छपी थी। हालांकि, हमें सर्च में हाल-फिलहाल में ऐसी किसी घटना की रिपोर्ट नहीं मिली।
इस बारे में हमने अमेठी में ‘दैनिक जागरण’ के ब्यूरो चीफ दिलीप सिंह से संपर्क किया। उन्होंने बताया कि वायरल वीडियो अमेठी का है और पुराना है।
इसके बाद वीडियो को गलत दावे से शेयर करने वाले यूजर की प्रोफाइल को हमने स्कैन किया। एक खास विचारधारा से प्रभावित यूजर के 3.93 लाख फॉलोअर्स हैं।
निष्कर्ष: यूपी के अमेठी में दिसंबर 2025 में हुए एक हत्याकांड के मामले में परिजनों ने आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था। उस घटना के वीडियो को एमपी में एक दलित के शव को अंतिम संस्कार से रोके जाने के झूठे दावे से शेयर किया जा रहा है।
- Claim Review : एमपी में एक दलित की चिता जलाए जाने से इसलिए रोका गया, ताकि धुआं सामान्य जाति के लोगों के लिए बने श्मशान की तरफ न जाए।
- Claimed By : FB User- All India Parisangh
- Fact Check : झूठ
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