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Fact Check: भ्रामक दावे के साथ वायरल हुई मुस्लिम समुदाय के लोगों की योगा करते हुए पुरानी तस्वीरें

वायरल पोस्ट में किया जा रहा दावा भ्रामक है। वायरल हो रही दोनों ही तस्वीरें पुरानी हैं और इनमें से एक तस्वीर अहमदाबाद की है, जबकि दूसरी तस्वीर अबू धाबी की है।

  • By Vishvas News
  • Updated: June 23, 2021

नई दिल्‍ली (Vishvas News)। सोशल मीडिया पर दो तस्वीरें वायरल हो रही है, जिसमें मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग योगा करते नजर आ रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि तस्वीरें सऊदी अरब की है, जहां मुस्लिम समुदाय के लोग भी योगा करते हैं। विश्वास न्यूज ने पड़ताल में पाया कि वायरल पोस्ट के साथ किया जा रहा दावा भ्रामक है।

दरअसल सोशल मीडिया पर वायरल हो रही इन तस्वीरों में से एक तस्वीर गुजरात के अहमदाबाद की है, जबकि दूसरी अबू धाबी की है। इनमें से एक तस्वीर साल 2015 में ली गई थी और दूसरी 2017 में। यह दोनों ही तस्वीरें ताजा नहीं हैं।

क्या है वायरल पोस्ट में?

फेसबुक यूजर A Akhil ने यह पोस्ट शेयर की जिसमें लिखा गया है: योगा = जान है तो जहान है यह सऊदी अरब की कुछ तस्वीरें उनके मुहं पे तमाचा हैं, जो कहते हैं कि योगा केवल एक समुदाय से तालुक रखता है

पोस्ट का आर्काइव्ड वर्जन यहां देखा जा सकता है।

पड़ताल

विश्वास न्यूज ने वायरल पोस्ट की पड़ताल करने के लिए सबसे पहले पहली तस्वीर को गूगल रिवर्स इमेज सर्च की मदद से ढूंढा।

हमें यह तस्वीर कुछ मीडिया रिपोर्ट्स https://gulfnews.com/going-out/society/bohra-community-organises-yoga-session-1.2046766 में मिली। जून 2017 में पब्लिश हुई इन मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह तस्वीर अबू धाबी के बोहरा इस्लामिक कम्युनिटी कल्चरल सोसाइटी की है, जहां बोहरा समाज के लोग योगा कर रहे थे। तीसरे अंतरराष्ट्रीय योगा दिवस के अवसर पर यह कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इन मीडिया रिपोर्ट्स में वायरल तस्वीर के अलावा इस कार्यक्रम की अन्य तस्वीरें भी देखी जा सकती हैं।

इसके बाद हमने वायरल पोस्ट की दूसरी तस्वीर को भी गूगल रिवर्स इमेज सर्च की मदद से ढूंढा।

हमें यह तस्वीर कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में मिली, जिसके साथ कैप्शन में लिखा गया था कि तस्वीर 17 जून 2015 को अहमदाबाद के एक स्कूल में ली गई थी, जहां मुस्लिम स्टूडेंट्स पहले इंटरनेशनल योगा डे के लिए तैयारी कर रहे थे।

पड़ताल में हमने पाया कि यह तस्वीर अहमदाबाद के जुहापुरा स्थित एफडी हाई स्कूल की है। ज्यादा जानकारी के लिए हमने स्कूल के स्पोर्ट्स टीचर एमएस राजपूत से संपर्क किया। हमने उन्हें वायरल तस्वीर भेजी, जिसे देखने के बाद उन्होंने पुष्टि की कि यह तस्वीर साल 2015 में उनके स्कूल में ही ली गई थी। उन्होंने बताया कि कोरोना काल को छोड़ दें तो उनके स्कूल में इससे पहले हर साल अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर स्टूडेंट्स योगा करते हैं।

हमने एसोसिएटिड प्रेस के फोटोजर्नलिस्ट अजीत सोलंकी से भी संपर्क किया। उन्होंने हमें बताया कि यह तस्वीर उन्होंने ही 17 जून 2015 को खींची थी।

अब बारी थी फेसबुक पर पोस्ट को साझा करने वाले यूजर A Akhil की प्रोफाइल को स्कैन करने का। प्रोफाइल को स्कैन करने पर हमने पाया कि यूजर उत्तर प्रदेश के कासगंज का रहने वाला है।

निष्कर्ष: वायरल पोस्ट में किया जा रहा दावा भ्रामक है। वायरल हो रही दोनों ही तस्वीरें पुरानी हैं और इनमें से एक तस्वीर अहमदाबाद की है, जबकि दूसरी तस्वीर अबू धाबी की है।

  • Claim Review : तस्वीरें सऊदी अरब की है, जहां मुस्लिम समुदाय के लोग भी योगा करते हैं।
  • Claimed By : FB User: A Akhil
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