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Fact Check: ताबूतों की यह तस्वीर बलूचिस्तान ट्रेन हाईजैक की नहीं, 2011 की फोटो वायरल  

विश्वास न्यूज की पड़ताल में यह साबित हुआ है कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रही ताबूतों की तस्वीर बलूचिस्तान ट्रेन हाईजैक से जुड़ी नहीं है। यह तस्वीर साल 2011 की है, जो पाकिस्तान के मर्दान में हुए एक आत्मघाती हमले में मारे गए सैनिकों के अंतिम संस्कार से जुड़ी हुई है।  

  • By: Umam Noor
  • Published: Mar 20, 2025 at 04:11 PM
  • Updated: Mar 20, 2025 at 04:20 PM

नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। सोशल मीडिया पर अक्सर पुरानी तस्वीरों को नए संदर्भ में पेश करके भ्रम फैलाया जाता है। ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां पाकिस्तानी झंडे में लिपटे ताबूतों की एक तस्वीर को बलूचिस्तान ट्रेन हाईजैक से जोड़कर वायरल किया जा रहा है। यह तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रही है और दावा किया जा रहा है कि यह हाल ही में हुए बलूचिस्तान ट्रेन हाईजैक की घटना से जुड़ी है।

विश्वास न्यूज की पड़ताल में यह साबित हुआ है कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रही ताबूतों की तस्वीर बलूचिस्तान ट्रेन हाईजैक से जुड़ी नहीं है। यह तस्वीर साल 2011 की है, जो पाकिस्तान के मर्दान में हुए एक आत्मघाती हमले में मारे गए सैनिकों के अंतिम संस्कार से जुड़ी हुई है।  

क्या है वायरल पोस्ट में ?

फेसबुक यूजर ने 14 मार्च को वायरल पोस्ट को शेयर करते हुए लिखा, ”कायर थे, जो बिना लड़े ही कुत्ते की मौत मारे गए।”

पोस्ट के आर्काइव वर्जन को यहां देखें।

पड़ताल

अपनी पड़ताल को शुरू करते हुए सबसे पहले हमने गूगल लेंस के जरिये वायरल फोटो को सर्च किया। सर्च किये जाने पर हमें यह तस्वीर कई न्यूज़ वेबसाइट पर अपलोड की हुई मिली।

पाकिस्तान की न्यूज़ वेबसाइट ट्रिब्यून पर सितम्बर 2013 को पब्लिश हुए एक आर्टिकल में इस तस्वीर का इस्तेमाल किया गया है। वहीं इस फोटो को आत्मघाती विस्फोट के पीड़ितों की अंतिम संस्कार प्रार्थना की बताया गया है।

वहीं, इंडिपेंडेंट डॉट को डॉट यूके की वेबसाइट पर दी गई इस तस्वीर को 11 फरवरी 2011 को छपी खबर में अपलोड किया गया है। खबर में दी गई जानकारी के मुताबिक, ‘पाकिस्तानी सेना को एक गंभीर झटका लगा है। स्कूल यूनिफॉर्म पहने एक किशोर उम्र के आत्मघाती हमलावर ने एक सैन्य अड्डे में घुसकर धमाका कर दिया। इस घटना में कम से कम 31 सैनिक और कैडेट मारे गए। यह हमला एक सैन्य भर्ती शिविर में हुआ, जब कैडेट परेड ग्राउंड पर एक्सरसाइज कर रहे थे। इसके अलावा 40 से अधिक लोग घायल हुए हैं।’

संडे टाइम्स डॉट आइके की वेबसाइट पर भी वायरल फोटो मिली। 13 फरवरी 2011 की खबर के मुताबिक, यह पाकिस्तान के मर्दान में हुए हमले में मारे गए फौजियों फ्यूनरल की तस्वीर है।

पाकिस्तानी न्यूज वेबसाइट डॉन की 13 मार्च की खबर के मुताबिक, “क्वेटा से पेशावर जा रही 440 यात्रियों वाली ट्रेन पर बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के विद्रोहियों ने हमला कर दिया था। उन्होंने ट्रेन पर गोलीबारी की और यात्रियों को बंधक बना लिया, जिसके बाद सुरक्षा बलों को दो दिन तक अभियान चलाना पड़ा। इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने पुष्टि की कि ऑपरेशन पूरा हो गया है, जिसमें घटनास्थल पर 33 उग्रवादियों को मार गिराया गया है। आईएसपीआर प्रमुख ने यह भी पुष्टि की कि अपहरण में 21 यात्री और चार फ्रंटियर कोर के जवान मारे गए, लेकिन अंतिम बचाव चरण के दौरान किसी बंधक को कोई नुकसान नहीं पहुंचा।” पूरी खबर यहां पढ़ी जा सकती है।

वायरल पोस्ट से जुड़ी पुष्टि के लिए हमने पाकिस्तान के पत्रकार आदिल अली से संपर्क साधा और वायरल पोस्ट उनके साथ शेयर की। उन्होंने हमें पुष्टि की कि  यह तस्वीर हालिया नहीं है, बल्कि कई साल पुरानी एक दुसरे मामले से जुड़ी हुई है।

अब बारी थी फर्जी पोस्ट को शेयर करने वाले फेसबुक यूजर की सोशल स्कैनिंग करने की। हमने पाया कि यूजर को करीब चार हजार लोग फॉलो करते हैं। वहीं, यूजर के बायो के मुताबिक, वह गुजरात के रहने वाले हैं।

निष्कर्ष: विश्वास न्यूज की पड़ताल में यह साबित हुआ कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रही ताबूतों की तस्वीर बलूचिस्तान ट्रेन हाईजैक से जुड़ी नहीं है। यह तस्वीर साल 2011 की है, जो पाकिस्तान के मर्दान में हुए एक आत्मघाती हमले में मारे गए सैनिकों के अंतिम संस्कार से जुड़ी हुई है।  

  • Claim Review : यह तस्वीर हाल ही में हुए बलूचिस्तान ट्रेन हाईजैक की घटना से जुड़ी है।
  • Claimed By : FB User- Munushyam Aditrawal
  • Fact Check : भ्रामक

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