Fact Check: 1967 में इंदिरा गांधी की गोल्ड न खरीदने की अपील के दावे से वायरल ‘द हिंदू’ का आर्काइव पेज FAKE है
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सोना न खरीदने की अपील के दावे से वायरल हो रहा 'द हिंदू' अखबार का आर्काइव क्लिप डिजिटली ऑल्टर्ड है। हालांकि, यह बात सही है कि चीन युद्ध के बाद देश में विदेशी मुद्रा भंडार की स्थिति को सुरक्षित रखने के लिए गोल्ड (कंट्रोल) एक्ट लागू किया गया था। गोल्ड (कंट्रोल) एक्ट 1965 और गोल्ड (कंट्रोल) एक्ट 1968 का उद्देश्य सोने के इस्तेमाल को नियंत्रित करना था। हालांकि, बाद में 1990 में इस कानून को खत्म कर दिया गया।
- By: Abhishek Parashar
- Published: May 12, 2026 at 04:23 PM
- Updated: May 12, 2026 at 04:58 PM
नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से एक साल तक सोना न खरीदने की अपील की है। इसके बाद से सोशल मीडिया पर अंग्रेजी अखबार ‘द हिंदू’ की एक आर्काइव क्लिप वायरल हो रही है। इस क्लिप को शेयर करते हुए दावा किया जा रहा है कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1967 में देशवासियों से सोना न खरीदने की अपील की थी। सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर इस न्यूज क्लिप को समान संदर्भ में शेयर किया जा रहा है।
विश्वास न्यूज ने अपनी जांच में पाया कि ‘द हिंदू’ में छपी खबर के आर्काइव क्लिप के नाम से वायरल हो रही यह तस्वीर डिजिटली ऑल्टर्ड है। उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड्स के मुताबिक, सरकार ने गोल्ड (कंट्रोल) एक्ट, 1965 में पारित किया था, जिसका मकसद चीन युद्ध के बाद भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित करना था। बाद में कुछ अन्य संशोधनों के साथ यह कानून 1968 के गोल्ड (कंट्रोल) एक्ट के रूप में सामने आया था। बताते चलें कि भारतीय रिजर्व बैंक और सरकार के गोल्ड भंडार को इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया था। हालांकि, 1990 में इस कानून को खत्म कर दिया गया था।
क्या है वायरल?
सोशल मीडिया यूजर ‘Macro Liquidity by Sunil Reddy’ ने वायरल पोस्ट (आर्काइव लिंक) को शेयर करते हुए लिखा है, “In 1967, Indira Gandhi appealed to Indians: “Don’t buy Gold.” The reason was that India’s foreign exchange position was under stress, imports were becoming difficult, and the currency system needed people to show “national discipline.” But what followed? One of the biggest Gold bull markets in history. From the late 1960s to 1980, Gold exploded higher globally, and in rupee terms the move was even more brutal. This is the real lesson:When governments tell citizens not to buy Gold, they are usually not worried about your jewellery. They are worried about pressure on the currency, pressure on reserves, and pressure on the financial system. Gold doesn’t become important when everything is normal.Gold becomes important when the system starts asking you not to buy it.”
(1967 में, इंदिरा गांधी ने भारतीयों से अपील की: “सोना मत खरीदो।” इसका कारण यह था कि भारत की विदेशी मुद्रा की स्थिति दबाव में थी, आयात मुश्किल होता जा रहा था, और मुद्रा प्रणाली के लिए लोगों को “राष्ट्रीय अनुशासन” दिखाने की जरूरत थी। लेकिन इसके बाद क्या हुआ?इतिहास के सबसे बड़े सोने के तेजी वाले बाजारों में से एक। 1960 के दशक के आखिर से 1980 तक, दुनिया भर में सोने की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया, और रुपये के हिसाब से तो यह उछाल और भी ज्यादा तेज था। यही असली सबक है: जब सरकारें नागरिकों से सोना न खरीदने के लिए कहती हैं, तो वे आम तौर पर आपके गहनों के बारे में चिंतित नहीं होतीं। वे मुद्रा पर दबाव, रिजर्व पर दबाव और वित्तीय प्रणाली पर दबाव के बारे में चिंतित होती हैं। सोना तब महत्वपूर्ण नहीं होता जब सब कुछ सामान्य हो। सोना तब महत्वपूर्ण हो जाता है जब सिस्टम आपसे इसे न खरीदने के लिए कहने लगती है।)
सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर कई अन्य यूजर्स ने इसे समान संदर्भ में शेयर किया है। एनबीटी और एनडीटीवी की रिपोर्ट में इस आर्काइव का इस्तेमाल किया गया है।
पड़ताल
वायरल पोस्ट में ‘द हिंदू’ की आर्काइव क्लिप लगी हुई है, जिस पर प्रकाशन की तारीख छह जून 1967 है। इस पेज की प्रामाणिकता की जांच करने के लिए हमने ‘द हिंदू’ के सोशल मीडिया पर आर्काइव से संबंधित पोस्ट को खंगाला और हमें एक अक्टूबर 2025 की एक पोस्ट मिली, जिसमें दो अक्टूबर 1969 के अंक की आर्काइव कॉपी मौजूद थी।
इस ओरिजिनल आर्काइव पेज को देखकर स्पष्ट हो जाता है कि वायरल हो रही तस्वीर डिजिटली ऑल्टर्ड है। गौरतलब है कि ऐसे कई टूल्स उपलब्ध हैं, जो पिछली तारीख में किसी भी अखबार के ईपेपर की क्लिप को क्रिएट कर सकते हैं।
‘द हिंदू’ के आधिकारिक सोशल मीडिया पेज से भी इस क्लिप की प्रामाणिकता का खंडन किया गया है। इसके मुताबिक, “सोशल मीडिया पर इस समय एक ऐसी डिजिटली ऑल्टर्ड तस्वीर शेयर हो रही है, जिसे छह जून, 1967 के ‘द हिंदू’ अखबार का पहला पन्ना बताया जा रहा है। हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि यह हमारे आर्काइव (संग्रह) का असली पन्ना नहीं है।”
‘द हिंदू’ की एसोसिएट और पॉलिटिकल एडिटर निसतुला हेब्बर ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल से छह जून 1967 को प्रकाशित अखबार के आर्काइव पेज (आर्काइव लिंक) की तस्वीर को शेयर किया है, जिसकी मुख्य खबर अरब-इजरायल युद्ध से संबंधित है। कोलाज में ‘द हिंदू’ की ओरिजिनल आर्काइव और वायरल क्लिप के बीच के अंतर को साफ-साफ देखा जा सकता है।

इसके बाद हमने 1967 के तत्कालीन संदर्भ को चेक किया। चीन युद्ध के बाद देश में विदेशी मुद्रा भंडार की स्थिति को संभालने के लिए तत्कालीन वित्त मंत्री मोरारजी देसाई ने गोल्ड कंट्रोल एक्ट लागू किया था। 26 नवंबर 2012 के ‘मिंट’ के एक आर्टिकल (नीलेश शाह लिखित) के मुताबिक, “तत्कालीन वित्त मंत्री मोरारजी देसाई ने ‘गोल्ड कंट्रोल एक्ट, 1962’ पेश किया, जिसके तहत बैंकों द्वारा दिए गए सभी गोल्ड लोन वापस ले लिए गए और सोने की फॉरवर्ड ट्रेडिंग पर रोक लगा दी गई। 1963 में, 14 कैरेट से अधिक शुद्धता वाले सोने के आभूषणों के उत्पादन पर प्रतिबंध लगा दिया गया। 1965 में, अघोषित संपत्ति के लिए कर-छूट के साथ एक ‘गोल्ड बॉन्ड योजना’ शुरू की गई। इन सभी उपायों से अपेक्षित परिणाम नहीं मिले, जिसके बाद देसाई ने ‘गोल्ड कंट्रोल एक्ट, 1968’ लागू किया, जिसने नागरिकों को सोने की सिल्लियों और सिक्कों के रूप में सोना रखने से प्रतिबंधित कर दिया।”
‘इंडियाकोड.एनआईसी.इन’ पर हमें गोल्ड (कंट्रोल) एक्ट 1965 और गोल्ड (कंट्रोल) एक्ट, 1968 की कॉपी मिली। 1965 के एक्ट में जहां सोने के आभूषणों को बनाए जाने, सोना रखने और उसकी बिक्री और गोल्ड लोन पर प्रतिबंध का जिक्र है। वहीं, 1968 के कानून में गोल्ड कंट्रोल अधिकारियों की नियुक्तियों का जिक्र है। 1968 का एक्ट आरबीआई और सरकार के पास रखे गोल्ड को इस कानून के दायरे से बाहर रखता है।
गौरतलब है कि इंदिरा गांधी का प्रधानमंत्री का कार्यकाल जनवरी 1966 से मार्च 1977 और जनवरी 1980 से अक्टूबर 1984 तक था। यानी चीन युद्ध के बाद विदेशी मुद्रा भंडार की कमी से निपटने के लिए देश में गोल्ड (कंट्रोल) एक्ट लाया गया था। हालांकि, बाद में 1990 में गोल्ड (कंट्रोल) रिपील एक्ट लाकर इस कानून को खत्म कर दिया गया।
न्यूज सर्च में हमें ऐसी कई रिपोर्ट्स मिलीं, जिनमें इंदिरा गांधी के आभूषणों को दान में दिए जाने का जिक्र है। 1962 के युद्ध के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने देश के लोगों से रक्षा कोष में सोना और पैसा दान करने की अपील की थी और इसी अपील के तहत इंदिरा गांधी ने अपने सोने के आभूषण दान किए थे।
वायरल क्लिप को लेकर हमने ‘द हिंदू’ के संपादक सुरेश नंबथ से संपर्क किया। उन्होंने इसे फेक बताया।
‘द हिंदू’ लाइब्रेरी ने विश्वास न्यूज को बताया, “सोशल मीडिया पर ‘द हिंदू’ के 6 जून, 1967 के फ्रंट पेज के तौर पर वायरल हो रही डिजिटल ऑल्टर्ड तस्वीर हमारे आर्काइव में किसी प्रमाणिक पेज से मेल नहीं खाती है।”
क्या है संदर्भ?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया संकट (अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध) के मद्देनजर लोगों से एक साल तक सोना नहीं खरीदने की अपील की है, जिसे लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।
राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि वह हर बार जिम्मेदारी जनता पर डाल देते हैं, ताकि खुद जवाबदेही से बच निकलें। इसी संदर्भ में सोशल मीडिया यूजर्स दो धड़ों में बंटा नजर आ रहा है। कुछ यूजर्स यह कह रहे हैं कि यह पहली बार नहीं है जब देश के किसी नेता ने लोगों से सोना न खरीदने की अपील की है।
वायरल पोस्ट को शेयर करने वाले यूजर को एक्स पर करीब 25 हजार से अधिक लोग फॉलो करते हैं।
निष्कर्ष: पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सोना न खरीदने की अपील के दावे से वायरल हो रहा ‘द हिंदू’ अखबार का आर्काइव क्लिप डिजिटली ऑल्टर्ड है। हालांकि, यह बात सही है कि चीन युद्ध के बाद देश में विदेशी मुद्रा भंडार की स्थिति को सुरक्षित रखने के लिए गोल्ड (कंट्रोल) एक्ट लागू किया गया था। गोल्ड (कंट्रोल) एक्ट 1965 और गोल्ड (कंट्रोल) एक्ट 1968 का उद्देश्य सोने के इस्तेमाल को नियंत्रित करना था। हालांकि, बाद में 1990 में इस कानून को खत्म कर दिया गया।
- Claim Review : इंदिरा गांधी की गोल्ड न खरीदने की अपील करता 'द हिंदू' का 1967 का आर्काइव पेज।
- Claimed By : X User-@Macrobysunil
- Fact Check : झूठ
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- Nistula Hebbar's X Profile
- Report of livemint, Dated 26 Nov 2012
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