Fact Check: वायरल वीडियो बलूचिस्तान में ट्रेन हाईजैक के बाद पाकिस्तानी सेना के ऑपरेशन का नहीं, अन्य घटना का है
विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में पाया कि वायरल हो रहे वीडियो का बलूचिस्तान में ट्रेन हाईजैक से कोई संबंध नहीं है। यह वीडियो 2012 से इंटरनेट पर मौजूद है। वहीं, रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह वीडियो 2009 में अफ़ग़ानिस्तान में अमेरिकी ऑपरेशन से जुड़ा हुआ है।
- By: Umam Noor
- Published: Mar 12, 2025 at 05:51 PM
- Updated: Mar 12, 2025 at 05:55 PM
नई दिल्ली (विश्वास न्यूज़)। पाकिस्तान के बलूचिस्तान में हाल ही में ट्रेन हाईजैक की घटना सामने आई है, जिसमें बलूच विद्रोहियों ने कई यात्रियों को बंधक बना लिया। इस घटना के बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें सैन्य अभियान और विस्फोट के दृश्य दिखाई दे रहे हैं। वीडियो को शेयर करने वाले यूजर्स दावा कर रहे हैं कि इसमें पाकिस्तानी सेना बलूच विद्रोहियों को टारगेट कर रही है और यह दृश्य बलूचिस्तान ट्रेन हाईजैक से जुड़ा हुआ है।
विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में पाया कि वायरल हो रहे वीडियो का बलूचिस्तान में ट्रेन हाईजैक से कोई संबंध नहीं है। यह वीडियो 2012 से इंटरनेट पर मौजूद है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह वीडियो 2009 में अफ़ग़ानिस्तान में अमेरिकी ऑपरेशन से जुड़ा हुआ है।
क्या है वायरल पोस्ट में?
फेसबुक पेज ने वायरल वीडियो (आर्काइव) को शेयर करते हुए लिखा, “पाकिस्तानी सेना द्वारा बलूचिस्तान ट्रेन हमलों में शामिल बलूच नेताओं को एक-एक करके फांसी दिए जाने के दिल को छू लेने वाले दृश्यों ने मेरे दिल को ठंडक पहुंचाई है, भगवान का शुक्र है।” “मेरे शरीर का खून का हर कतरा पाकिस्तानी सेना के उन सैनिकों के प्रति कृतज्ञ है जो अपने प्राणों की आहुति देकर मातृभूमि की रक्षा करते हैं।”
एक्स यूजर्स भी इस वीडियो को इसी फर्जी दावे के साथ शेयर कर रहे हैं।
पड़ताल
न्यूज़ रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान की जाफर एक्सप्रेस को 11 मार्च को हाईजैक कर लिया गया। यह हाईजैक बलूच विद्रोहियों द्वारा किया गया है। अब तक लगभग कई लोग मारे जा चुके हैं तथा कुछ लोग अभी भी बंदी हैं, जिनमें पाकिस्तानी सेना के सैनिक भी शामिल हैं। इस बीच, बंधकों को रिहा कराने के लिए पाकिस्तानी सुरक्षा बलों का बचाव अभियान जारी है।
वायरल वीडियो की पड़ताल को शुरू करते हुए, हमने वीडियो के कीफ्रेम्स निकाले और उन्हें गूगल लेंस से सर्च किया। सर्च किये जाने पर हमें यह वीडियो ‘मेक ए जिफ’ नामक वेबसाइट पर अपलोड किया हुआ मिला। यहां वीडियो को दस साल पहले अपलोड किया गया है। वीडियो के साथ हमें ‘तालिबान’ से संबंधित एक कैप्शन मिला।

इस आधार पर हमने अपनी जांच आगे बढ़ाई और वायरल वीडियो को सर्च किया। सर्च करने पर हमें DailyMail.co.uk की वेबसाइट पर प्रकाशित एक रिपोर्ट मिली। 23 जून, 2017 की एक रिपोर्ट के अनुसार, ओलिवर स्टोन के शो “द पुतिन इंटरव्यूज़” में व्लादिमीर पुतिन को मोबाइल फोन से युद्ध के वीडियो दिखाते हुए दिखाया गया था। पुतिन ने कहा कि ये वीडियो सीरिया में रूसी सेना के अभियानों के हैं। लेकिन जांच करने पर पता चला कि ये वीडियो असल में अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) के हैं। रिसर्चर्स का मानना है कि, यह वीडियो 2009 या 2013 का अफगानिस्तान में तालिबान के खिलाफ अमेरिकी अभियान का है। पेंटागन ने भी फॉक्स न्यूज़ को बताया की है कि ये वीडियो रूसी सैनिकों के नहीं हैं।
डेली मेल की इस खबर में हमें ‘CIT’ के एक्स एक्स हैंडल से शेयर की गई एक पोस्ट मिली। इसमें दी गई जानकारी के अनुसार, “पुतिन ने ओलिवर स्टोन को जो ‘रूसी हेलीकॉप्टर द्वारा ISIS पर बमबारी’ की फुटेज दिखाई है, वह 2013 के अमेरिकी अफगान वीडियो से ली गई है।”
सर्च में इस वीडियो का लम्बा वर्जन एक यूट्यूब चैनल पर 24 अक्टूबर 2013 को अपलोड किया हुआ मिला। जानकारी के अनुसार, यह वीडियो तालिबान के खिलाफ अमेरिकी ऑपरेशन से जुड़ा हुआ है। हमें इस वीडियो के बारे में जानकारी विकीपीडिया पर भी मिली, जिसे यहां देखा जा सकता है।
हमें वायरल वीडियो Military.com नामक वेबसाइट पर भी अपलोड मिला। यहां वीडियो को 18 जुलाई 2012 को छपी खबर के साथ अपलोड किया गया है। खबर में बताया गया, यह फुटेज 2009 में अफगानिस्तान में अमेरिकी ऑपरेशन के दौरान की है।

हमने वायरल पोस्ट की पुष्टि के लिए पाकिस्तान के पत्रकार आदिल अली से संपर्क किया और उनके साथ वायरल पोस्ट शेयर की। उन्होंने हमें बताया कि वायरल वीडियो पाकिस्तान का नहीं है।
अब बारी फर्जी पोस्ट को शेयर करने वाले फेसबुक यूजर की सोशल स्कैनिंग करने की थी। हमने पाया कि यूजर को दो हजार लोग फॉलो करते हैं। वहीं, इस पेज को पाकिस्तान से चलाया जाता है।
निष्कर्ष: विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में पाया कि वायरल हो रहे वीडियो का बलूचिस्तान में ट्रेन हाईजैक से कोई संबंध नहीं है। यह वीडियो 2012 से इंटरनेट पर मौजूद है। वहीं, रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह वीडियो 2009 में अफ़ग़ानिस्तान में अमेरिकी ऑपरेशन से जुड़ा हुआ है।
- Claim Review : दावा कर रहे हैं कि इसमें पाकिस्तानी सेना बलूच विद्रोहियों को टारगेट कर रही है और यह दृश्य बलूचिस्तान ट्रेन हाईजैक से जुड़ा हुआ है।
- Claimed By : FB Page- Chawinda TV
- Fact Check : झूठ
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