FACT CHECK: आरबीआई की तरफ से बैंकों में लेन-देने का वक्त बढ़ाने का दावा भ्रामक है

0

नई दिल्ली (विश्वास टीम)। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर की जा रही है। इस पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि एक जून से बैंकों में शाम के 6 बजे तक लेन-देन होगा। विश्वास न्यूज की टीम ने इस दावे की पड़ताल की है। हमने पाया है कि यह दावा भ्रामक है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने रियल टाइम ग्रॉस सेटेलमेंट (आरटीजीएस) के लिए लेने-देन की अवधि को बढ़ाया है। अब एक जून 2019 से आरटीजीएस के तहत लेन-देन का समय शाम 4:30 से बढ़ाकर शाम 6:00 बजे तक कर दिया गया है।

क्या है वायरल पोस्ट में?

30 मई 2019 को देवकी नंदन नाम के एक फेसबुक यूजर ने इसे पोस्ट किया है। इस पोस्ट में लिखा है कि, ‘सरकारी बैंक के कर्मचारियों की चर्बी छंटी, एक जून से देश के सभी बैंकों में शाम 6 बजे तक होगा लेन-देन। न्याय शुरू।’

पड़ताल

हमने अपनी पड़ताल की शुरुआत इस वायरल पोस्ट में इस्तेमाल किए गए कीवर्ड्स (एक जून से, बैंकों में शाम 6 बजे तक होगा लेन-देन) को गूगल सर्च करने से की।

हमें ऐसी कई न्यूज स्टोरी मिलीं जिनमें बताया गया है कि आरबीआई ने आम लोगों के लिए आरटीजीएस लेन-देन की समयावधि को डेढ़ घंटे बढ़ाकर शाम 6 बजे तक कर दिया है।

यहां ऐसी ही कुछ न्यूज स्टोरी के उदाहरण दिए गए हैं:

कई वेबसाइटों पर मौजूद इन न्यूज रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया गया है कि आरटीजीएस लेन-देन का समय शाम 6 बजे तक बढ़ाया गया है। बैंकों से जुड़े सारे लेन-देन का वक्त नहीं बढ़ाया गया है, जैसा कि इस फेसबुक पोस्ट में दावा किया जा रहा है।

खबरों की पुष्टि के लिए हम आरबीआई की आधिकारिक वेबसाइट पर भी गए। हमें वेबसाइट पर एक ऑफिशियल नोटिफिकेशन मिला। इसमें बताया गया है कि आरटीजीएस के तहत ग्राहकों के लेन-देन के समय को शाम 4:30 से बढ़ाकर शाम 6 बजे तक कर दिया गया है। नोटिफिकेशन के मुताबिक यह परिवर्तन एक जून से प्रभावी हो गया है। इस नोटिफिकेशन में कहीं भी इस बात का जिक्र नहीं है कि बैंकों से जुड़े सारे लेन-देन का वक्त शाम 6 बजे तक बढ़ा दिया गया है, जैसा कि वायरल फेसबुक पोस्ट में दावा किया जा रहा है।

हमने आरबीआई की वेबसाइट पर ऐसे किसी नोटिफिकेशन को भी खोजने की कोशिश की जो लेन-देन के वक्त में बदलाव से जुड़ा हो। हमें ‘मास्टर सर्कुलर ऑन कस्टमर सर्विस इन बैंक्स’ नाम से एक नोटिफिकेशन मिला। इसके मुताबिक लोगों और कारोबारी समुदाय के हितों को देखते हुए बैंकों को सप्ताह के पांच दिनों (वीकडेज) में कम से कम 4 घंटे का पब्लिक ट्रांजैक्शन करना चाहिए। वहीं, शनिवार को यह समय कम से कम 2 घंटे होना चाहिए। इसमें आगे लिखा गया है कि बैंकिंग के लिए कोई निश्चित समय का निर्धारण नहीं किया गया। इसके मुताबिक बैंक ग्राहकों को उचित तरीके से जानकारी देकर अपनी सहूलियत के मुताबिक बिजनेस आवर्स तय कर सकते हैं। इसके मुताबिक डबल शिफ्ट में काम हो, रविवार की जगह कोई दूसरा वीकली हॉलिडे तय करना हो या नॉर्मल वर्किंग डे की ही तरह रविवार को काम करना हो, ये सारा कुछ पब्लिक ट्रांजैक्शन के नॉर्मल वर्किंग आवर के हिसाब के ही अधीन है।

नॉन कैश बैंकिंग ट्रांजैक्शन के लिए बैंकिंग का समय बढ़ाने के संदर्भ का भी इसमें जिक्र किया गया है। आधिकारिक नोटिफिकेशन के मुताबिक बैंकों को कैश के अतिरिक्त दूसरे लेन-देन के लिए अपने बिजनेस आवर को एक घंटे तक बढ़ाना चाहिए।

हमने आरबीआई के कम्युनिकेशन डिपार्टमेंट के एक अधिकारी से संपर्क किया। उन्होंने बताया कि, ‘जैसा कि आधिकारिक नोटिफिकेशन में बताया गया है, आरबीआई ने ग्राहकों के लिए रियल टाइम ग्रॉस सेटेलमेंट (आरटीजीएस) के ट्रांजैक्शन विंडो को बढ़ाया है।’

हमने इस पोस्ट को शेयर करने वाले फेसबुक यूजर ‘देवकी नंदन’ की प्रोफाइल की भी जांच की। हमने StalkScanटूल की मदद से यूजर की प्रोफाइल को स्कैन किया। हमने पाया कि इस यूजर ने पहले भी झूठी और भ्रामक पोस्ट शेयर की हैं।

निष्कर्ष

हमारी पड़ताल में इस वायरल पोस्ट का दावा भ्रामक पाया गया। पोस्ट का यह दावा कि एक जून से सभी तरह के बैंकिंग लेन-देन की अवधि शाम 6 बजे तक कर दी गई है, भ्रामक है। सच यह है कि आरबीआई ने केवल आरटीजीएस ट्रांजैक्शन विंडो की अवधि को बढ़ाया है। एक जून से ग्राहकों के लिए आरटीजीएस लेन-देन की अवधि को शाम 4:30 बजे से बढ़ाकर शाम 6 बजे तक कर दिया गया है।

पूरा सच जानें…

सब को बताएं, सच जानना आपका अधिकार है। अगर आपको ऐसी किसी भी खबर पर संदेह है जिसका असर आप, समाज और देश पर हो सकता है तो हमें बताएं। हमें यहां जानकारी भेज सकते हैं। हमें contact@vishvasnews।com पर ईमेल कर सकते हैं। इसके साथ ही वॅाट्सऐप (नंबर – 9205270923) के माध्‍यम से भी सूचना दे सकते हैं।

Written BY Urvashi Kapoor
  • Claim Review : आरबीआई की तरफ से बैंकों में लेन-देने का वक्त बढ़ाने का दावा
  • Claimed By : FB User: देवकी नंदन
  • Fact Check : False

टैग्स

संबंधित लेख