Fact Check: जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान बस रोक रही युवती का वायरल वीडियो एआई-निर्मित
बस रोक रही युवती का वायरल वीडियो फर्जी है। इसे बनाने में एआई तकनीक का इस्तेमाल किया गया है और सीजेपी के प्रदर्शन के नाम पर गलत दावे के साथ वायरल किया जा रहा है।
- By: Pragya Shukla
- Published: Oct 10, 2026 at 05:20 PM
- Updated: Oct 10, 2026 at 05:26 PM
नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी दल लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। साथ ही ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) ने भी 10 अक्टूबर 2026 को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया। इसी से जोड़कर एक महिला का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में महिला को प्रदर्शन के दौरान एक बस को रोकते हुए देखा जा सकता है। इस वीडियो को सीजेपी के प्रदर्शन का बताकर शेयर किया जा रहा है और युवती के कपड़ों पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
विश्वास न्यूज ने वायरल वीडियो की जांच की। यह फर्जी साबित हुआ। जांच में पता चला कि इसे बनाने में एआई तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। विश्वास न्यूज ने कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़े कई सोशल मीडिया पोस्ट्स की पड़ताल की है। इन्हें यहां पढ़ा जा सकता है।
क्या हो रहा है वायरल?
एक्स यूजर ‘Dilip Anjana’ ने 10 अक्टूबर 2026 को एक वीडियो शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा, “देश का युवा Gen Z, स्कूलों और कॉलेजों में शिक्षा के माध्यम से अपने भविष्य के साथ-साथ देश के भविष्य की नींव भी मजबूत कर रहा है। देश का युवा Gen Z आज IIT, IIM, Engineering, Law और Management जैसे क्षेत्रों में अपना भविष्य बना रहा है। वहीं, UPSC, SSC और NEET जैसी Competitive Exams की तैयारी करते हुए अपने सपनों को साकार करने के लिए दिन-रात मेहनत कर रहा है। देश का युवा Gen Z आज IT, Technology, Corporate, Media, Startups और Industries से लेकर Private और Government Sectors में काम करते हुए देश की प्रगति में योगदान दे रहा है। देश का युवा Gen Z अपने खून-पसीने से खेतों को सींचकर अन्न उपजाता हुआ देश का पेट भर रहा है। देश का युवा Gen Z अंतरिक्ष में उड़ान भरकर नई ऊँचाइयों को छू रहा है। आप जिन्हें Jantar Mantar पर देख रहे हैं, ये भारत का युवा Gen Z नहीं हैं, बल्कि विदेशी फ़ैक्ट्री में तैयार किए गए बौद्धिक आतंकवाद का एक अराजक रूप हैं, जिन्हें आप Brainwashed कीड़े कह सकते हैं। भारत का Gen Z देश की ताकत है, किसी के एजेंडे का मोहरा नहीं!”
पोस्ट के आर्काइव लिंक को यहां पर देखें।
पड़ताल
वायरल वीडियो की सच्चाई जानने के लिए हमने उसके कई कीफ्रेम निकाले और उन्हें गूगल रिवर्स इमेज की मदद से सर्च किया। हमें दावे से जुड़ी कोई जानकारी या न्यूज रिपोर्ट नहीं मिली। वीडियो को गौर से देखने पर हमने पाया कि बस रोकने वाली युवती से बात कर रही महिला रिपोर्टर का हाथ युवती के हाथ के आर-पार जा रहा है। ऐसे में हमें वीडियो के एआई से बने होने का संदेह हुआ।
पड़ताल को आगे बढ़ाते हुए हमने वीडियो के कीफ्रेम्स को एआई डिटेक्शन टूल्स की मदद से सर्च किया। सबसे पहले हमने ‘ZeroGPT’ की मदद से कीफ्रेम को सर्च किया। इस टूल की एनालिसिस के मुताबिक, वीडियो के कीफ्रेम के एआई से बने होने की 57 फीसदी संभावना है।

इसके बाद हमने वीडियो के कीफ्रेम को चेक करने के लिए एआई डिटेक्शन टूल ‘AI or Not’ का इस्तेमाल किया। इस टूल ने कीफ्रेम के एआई से बने होने की 80 फीसदी संभावना जताई।

हमने वीडियो के कीफ्रेम को एक अन्य एआई डिटेक्शन टूल ‘Sightengine’ की मदद से भी सर्च किया। इस टूल ने 96 फीसदी तक वीडियो के एआई की मदद से बने होने की संभावना जताई।

विश्वास न्यूज ने जांच को आगे बढ़ाते हुए एआई एक्सपर्ट डॉ. अजहर माचवे से संपर्क किया। उन्होंने हमें बताया कि यदि वीडियो को ध्यान से देखा जाए, तो इसमें कई गलतियां नजर आएंगी। वीडियो में मौजूद लोगों के पैर गायब हो रहे हैं और फिर दिखाई दे रहे हैं। इतना ही नहीं, महिला रिपोर्टर और प्रदर्शन कर रही युवती का शरीर आपस में कई जगहों पर मिल रहा है। इसके अलावा महिला रिपोर्टर अचानक ही अपने माइक को कैमरे की तरह इस्तेमाल करने लगती है और उसका साइज भी छोटा होता जाता है। इन बातों से समझा जा सकता है कि वीडियो को बनाने के लिए एआई तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।
क्या है संदर्भ?
‘आजतक’ की वेबसाइट पर 10 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, “दिल्ली में जंतर-मंतर पर सीजेपी को प्रोटेस्ट की अनुमति नहीं मिलने के बावजूद प्रदर्शनकारी वहां पर पहुंचें। फिर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए करीब 3 हजार लोगों को हिरासत में लिया। पुलिस ने ध्रुव राठी को भी हिरासत में लिया और सीजेपी की लीगल हेड रत्ना को भी पुलिस ने डिटेन किया।”
बीबीसी की वेबसाइट पर 10 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, “कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके, सह-संयोजक आशुतोष रांका और सौरव दास को पुलिस ने दिल्ली एयरपोर्ट पर फ़्लाइट में ही हिरासत में ले लिया गया है।”
आजतक की वेबसाइट पर 6 अक्टूबर को प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली के जंतर-मंतर के पास जब प्रदर्शन हो रहा था और पुलिस प्रदर्शनकारियों को बस में हिरासत में लेकर जा रही थी। तभी एक लड़की बस के आगे आकर खड़ी हो गई और उसने पुलिस की बस को रोकने की कोशिश की। पुलिस की बस को रोकते हुए लड़की का वीडियो सोशल मीडिया पर धड़ल्ले से वायरल हो गया, जिसे देखकर लोगों को रिया अहीर की याद गई, क्योंकि जुलाई में NEET प्रदर्शन के दौरान मुंबई में पुलिस वैन रोककर ही वो वायरल हुई थीं।
अंत में हमने वीडियो को गलत दावे के साथ शेयर करने वाले एक्स यूजर के अकाउंट को स्कैन किया। हमने पाया कि यूजर को 15 हजार से अधिक लोग फॉलो करते हैं। यूजर एक्स पर अगस्त 2024 से सक्रिय है।
निष्कर्ष: विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में पाया कि बस रोक रही युवती का वायरल वीडियो फर्जी है। इसे बनाने में एआई तकनीक का इस्तेमाल किया गया है और सीजेपी के प्रदर्शन के नाम पर गलत दावे के साथ वायरल किया जा रहा है।
- Claim Review : जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान बस रोक रही युवती का वीडियो।
- Claimed By : X User-Dilip Anjana
- Fact Check : झूठ
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