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Fact Check: सीरिया में बशर अल-असद सरकार के पतन के बाद आजाद हुए कैदी का नहीं है ये वीडियो, दावा भ्रामक है

विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में पाया कि वायरल वीडियो साल 2014 का और सीरिया के फिलिस्तीनी शरणार्थी शिविर का है। इस वीडियो को भ्रामक दावे के साथ सीरिया में सरकार गिरने के बाद सैयदनाया जेल से आजाद हुए कैदियों के हवाले से फैलाया जा रहा है।

  • By: Umam Noor
  • Published: Dec 12, 2024 at 05:07 PM
  • Updated: Dec 12, 2024 at 05:37 PM

नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। सीरिया में बशर अल असद की सरकार गिरने के बाद से सोशल मीडिया पर इस मामले से जुड़े कई वीडियो वायरल हो रहे हैं। इसी कड़ी में एक वीडियो शेयर किया जा रहा है, जिसमे एक शख्स को बेहद बुरी हालत में देखा जा सकता है। वीडियो को शेयर करते हुए यूजर्स दावा कर रहे हैं कि यह उन लोगों में से एक है, जिन्हें सीरिया में शासन के पतन के बाद जेल से आजाद किया गया है।

विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में पाया कि वायरल वीडियो साल 2014 का और सीरिया के फिलिस्तीनी शरणार्थी शिविर का है। इस वीडियो को भ्रामक दावे के साथ सीरिया में सरकार गिरने के बाद सैयदनाया जेल से आजाद हुए कैदियों के हवाले से फैलाया जा रहा है।

क्या है वायरल पोस्ट में?

वायरल पोस्ट को शेयर करते हुए फेसबुक यूजर ने लिखा, ”अरब देश सीरिया से ज़ालिम हुकमरां बशार अल असद के देश से भागने के बाद अबू मोहम्मद जोलानी की सेना ने जब जेलों के ताले तोड़ कर कैदीयों को जेलों से आज़ाद कराया!वर्षो से कैद एक कैदी आप देख सकते हैँ।”

पोस्ट के आर्काइव वर्जन को यहां देखें।

पड़ताल

अपनी पड़ताल शुरू करने के लिए हमने सबसे पहले वीडियो के कीफ्रेम निकाले और उन्हें गूगल लेंस पर सर्च किया। सर्च किये जाने पर हमें इसी शख्स का वीडियो 23 जनवरी 2014 को एक यूट्यूब चैनल पर अपलोड हुआ मिला। यहां वीडियो के साथ दी गई जानकारी के मुताबिक, वीडियो सीरिया के यरमक कैंप का है जहां फिलिस्तीनी रहते हैं।

इसी आधार पर हमने अपनी सर्च को आगे बढ़ाया और हमें अल जजीरा की वेबसाइट पर भी वायरल वीडियो में दिख रहे शख्स से जुड़ा एक आर्टिकल मिला। यहां दी गई विस्तृत जानकारी में बताया गया किकार्यकर्ताओं ने पॉपुलर फ्रंट फॉर द लिबरेशन ऑफ फिलिस्तीन – जनरल कमांड के समर्थन से दमिश्क में स्थित यरमौक फिलिस्तीनी शरणार्थी शिविर से तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट की हैं। कार्यकर्ताओं द्वारा पोस्ट की गई अन्य तस्वीरों में लोगों के शरीर पर भुखमरी के दृश्य दिखाई दे रहे हैं। यरमौक शिविर के निवासियों ने पचास से अधिक लोगों की भूख से मौत भी हुई है।

वायरल फोटो की पुष्टि के लिए हमने सीरियाई पत्रकार इज्जेदीन अल-कासिम से संपर्क किया और उन्होंने हमें बताया, सरकार के पतन के बाद दमिश्क की सैयदनाया जेल के गार्ड भाग गए और अब कैदियों को बाहर निकाला जा रहा है, जिनमें से कई की मौत भी हो चुकी है।

खबरों के मुताबिक, सीरिया में बशर अल-असद शासन के खिलाफ विपक्षी विद्रोहियों ने राजधानी दमिश्क पर नियंत्रण हासिल कर लिया है। दमिश्क में विद्रोहियों के घुसने के बाद पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद मॉस्को में हैं और रूस ने उन्हें परिवार समेत राजनीतिक शरण दी है।

वहीं, अन्य खबरों के मुताबिक, बशर अल-असद का शासन खत्म होने के बाद सैयदनाया जेल में बंद लोगों को निकाला जा रहा है, जबकि बड़ी संख्या में लोग वहां पहुंचकर  अपने करीबियों की तलाश कर रहे हैं।

अल-अरबिया की खबर के मुताबिक, सैयदनाया जेल दमिश्क के उत्तर में एक पहाड़ी इलाके में एक पहाड़ की चोटी पर स्थित है। वर्षों पहले एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इसे “मानवीय हत्या स्थल” बताया था और कहा था कि सीरियाई राज्य इस जेल में चुपचाप अपने ही लोगों को मार देता है।

इस मामले से जुड़ी खबरें बीबीसी, द गार्जियन, अल जज़ीरा, न्यूयॉर्क टाइम्स और सीएनएन वेबसाइट पर पढ़ी जा सकती हैं।

भ्रामक पोस्ट शेयर करने वाले फेसबुक पेज ‘देश प्रेमी’ की सोशल स्कैनिंग में हमने पाया कि इस पेज को सात हजार लोग फॉलो करते हैं।

निष्कर्ष: विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में पाया कि वायरल वीडियो साल 2014 का और सीरिया के फिलिस्तीनी शरणार्थी शिविर का है। इस वीडियो को भ्रामक दावे के साथ सीरिया में सरकार गिरने के बाद सैयदनाया जेल से आजाद हुए कैदियों के हवाले से फैलाया जा रहा है।

  • Claim Review : यह उन लोगों में से एक है, जिन्हें सीरिया में शासन के पतन के बाद जेल से निकाला गया है।
  • Claimed By : FB User- देश प्रेमी
  • Fact Check : भ्रामक

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