Fact Check: 786 नंबर वाले नोट को खरीदने के नाम पर हो रही धोखाधड़ी, आरबीआई कर चुका है आगाह
786 सीरियल नंबर वाले नोट बेचने के नाम से धोखाधड़ी की जा रही है। ठग आरबीआई के परमीशन लेटर के नाम पर शुल्क की मांग करते हैं, जबकि आरबीआई ने इस बारे में पहले सचेत करते हुए कहा था कि उसने इस तरह के लेन-देन के लिए किसी को अधिकृत नहीं किया है और न ही वह कोई शुल्क मांगता है।
- By: Sharad Prakash Asthana
- Published: Jan 21, 2025 at 03:44 PM
- Updated: Jan 21, 2025 at 04:05 PM
नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। कुछ खास सीरियल नंबर वाले नोट खरीदने व बेचने को लेकर सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट वायरल हो रही हैं। इनमें दावा किया जा रहा है कि 786 सीरियल नंबर वाले नोट के बदले में 12 लाख 80 हजार रुपये मिलेंगे। एक इंस्टा हैंडल से इस तरह की कई पोस्ट की गई हैं। इनके साथ में संपर्क करने के लिए नंबर भी दिया गया है।
विश्वास न्यूज की जांच में यह धोखाधड़ी का एक तरीका निकला, जिसमें मोटी रकम का लालच देकर यूजर से आरबीआई के परमीशन लेटर के रूप में 750 रुपये की फीस ली जाती है। वहीं, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) लोगों को इस बारे में आगाह करते हुए कह चुका है कि उसके नाम का इस्तेमाल कर कुछ लोग पुराने बैंक नोटों और सिक्कों की खरीद-बिक्री से जुड़े लेन-देन में लोगों से शुल्क की मांग कर रहे हैं। आरबीआई इस तरह का कोई शुल्क या कमीशन नहीं मांगता है।
वायरल पोस्ट
इंस्टाग्राम यूजर 786_note_shop_786 ने 20 जनवरी 2025 को एक पोस्ट (आर्काइव लिंक) की है। इस पर लिखा है, “786 सीरियल नंबर की प्राइस मिलेगी 12 लाख 80 हजार“। इसके साथ में एक मोबाइल नंबर भी दिया गया है।

इसी अकाउंट से 20 जनवरी को एक अन्य पोस्ट (आर्काइव लिंक) कर समान दावा किया गया है। इसमें बस मोबाइल नंबर अलग है।

पड़ताल
वायरल दावे की जांच के लिए हमने सबसे पहले पोस्ट को चेक किया। इसमें कुछ यूजर्स ने इसको फेक बताया है।
इसके बाद पोस्ट में दिए गए नंबर पर कॉल पर किया। इस पर पहले तो हमसे 786 नंबर वाले नोट की फोटो वॉट्सऐप करने को कहा गया। फोटो भेजने के बाद दूसरी तरफ से हमसे नाम, पूरा पता, पासपोर्ट साइज फोटो के साथ ही सरकारी परमीशन के नाम पर 750 रुपये मांगे गए। इसके बाद 24 से 48 घंटे के अंदर घर पर टीम भेजकर नोट लेने और उसकी कीमत देने को कहा गया।
अधिक जानकारी के लिए हमने दिए गए नंबर पर दोबारा कॉल की और उससे सरकारी परमीशन के बारे में जानकारी मांगी। दूसरी तरफ से युवक ने अपना जितेश बताया। उसने बताया, “इस तरह के नोट लेने के लिए आरबीआई की अनुमति लेनी होती है। वह एक लेटर जारी करता है, जिसके लिए शुल्क लगता है, जो 750 रुपये है। उसके बिना उनकी टीम नोट नहीं ले सकती है। इसके पैसे भी सरकार की तरफ से दिए जाएंगे। वह केवल एजेंट है। कंपनी अप्रूवल लेटर देती है। इसकी परमीशन आरबीआई के रिकॉर्ड में जाती है। नोट के डील का परमीशन लेटर कंपनी की तरफ से फिर आपको दिया जाएगा।“
उसने कहा, “786 सीरियल नंबर वाला नोट लेने के बाद वह इसका भुगतान नगद या ऑनलाइन या चेक में दे देंगे, जिसमें यूजर चाहेगा। कंपनी का नाम ओल्ड क्वाइन मुंबई है, जो कांदिवली में स्थित है।”
ओल्ड क्वाइन कंपनी मुंबई के नाम से हमने गूगल पर सर्च किया। इसके रिव्यू में कई लोगों ने इसे फ्रॉड बताया है।

4 अगस्त 2021 को आरबीआई द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, “कुछ लोग धोखाधड़ी के लिए आरबीआई के नाम का इस्तेमाल कर रहे हैं। विभिन्न ऑनलाइन/ऑफलाइन प्लेटफॉर्म पर ठग पुराने बैंक नोट या सिक्कों की खरीद-फरोक्त के मामलों में आरबीआई के नाम से शुल्क मांग रहे हैं। आरबीआई ऐसे किसी भी मामले में लेन-देन नहीं करता है और न ही इस तरह के किसी शुल्क की मांग करता है। संस्था की तरफ से किसी को भी इस तरह के लेन-देन में शुल्क वसूलने के लिए अधिकृत नहीं किया गया है।”

इससे पहले दावा वायरल हुआ था कि केंद्र सरकार ने पुराने सिक्कों और नोटों को खरीदने का एलान किया है। विश्वास न्यूज की जांच में वायरल पोस्ट फेक निकली थी। उस समय विश्वास न्यूज ने आरबीआई के प्रवक्ता से बात की थी। उन्होंने कहा था कि आरबीआई किसी भी व्यक्ति या संस्था को पुराने नोटों या सिक्कों की खरीद-फरोख्त के लिए अधिकृत नहीं करता है। इस मामले में पहले भी लोगों को सचेत किया जा चुका है।
786 नंबर वाले नोट खरीदने से संबंधित पोस्ट करने वाले यूजर ने इस तरह की कई पोस्ट शेयर की हैं।
निष्कर्ष: 786 सीरियल नंबर वाले नोट बेचने के नाम से धोखाधड़ी की जा रही है। ठग आरबीआई के परमीशन लेटर के नाम पर शुल्क की मांग करते हैं, जबकि आरबीआई ने इस बारे में पहले सचेत करते हुए कहा था कि उसने इस तरह के लेन-देन के लिए किसी को अधिकृत नहीं किया है और न ही वह कोई शुल्क मांगता है।
- Claim Review : 786 सीरियल नंबर वाले नोट के बदले में 12 लाख 80 हजार रुपये मिलेंगे।
- Claimed By : Insta User- 786_note_shop_786
- Fact Check : झूठ
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