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Fact Check : नमाज पढ़ने के बाद आंखों की रोशनी आने का दावा झूठ, 9 साल पुराना वीडियो वायरल

विश्वास न्यूज़ ने अपनी पड़ताल में पाया कि यह मामला साल 2016 में मक्का में सामने आया था, जब वायरल वीडियो वाले शख्स ने उसकी आँखों की रोशनी वापस आ जाने से जुड़ा दावा किया था। हालांकि, बाद में पुलिस ने अपनी जांच में पाया था कि यह शख्स अंधा नहीं था, बल्कि उसने चोरी की नीयत से झूठ बोला था।

  • By: Umam Noor
  • Published: Jun 4, 2025 at 12:14 PM

नई दिल्ली (विश्वास न्यूज़)। सऊदी अरब में आने वाले हज 2025 के लिए देश और दुनिया से तीर्थयात्री पहुंच चुके हैं। इसी बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में एक व्यक्ति को खुशी-खुशी लोगों के गले लगकर  यह कहते हुए सुना जा सकता है कि नमाज पढ़ने के बाद उसकी आंखों की रोशनी वापस आ गई है। वीडियो को शेयर करते हुए यूजर्स दावा कर रहे हैं कि यह शख्स अंधा था और मक्का में हरम शरीफ में नमाज पढ़ने के बाद उनकी आंखों की रोशनी वापस आ गई।

विश्वास न्यूज़ ने अपनी पड़ताल में पाया कि यह मामला साल 2016 में मक्का में सामने आया था, जब वायरल वीडियो वाले शख्स ने उसकी आँखों की रोशनी  वापस आ जाने से जुड़ा दावा किया था। हालांकि, बाद में पुलिस ने अपनी जांच में पाया था कि यह शख्स अंधा नहीं था, बल्कि उसने चोरी की नीयत से झूठ बोला था।

क्या है वायरल पोस्ट में?

फेसबुक पेज ‘दी इस्लामिक मीडिया शॉर्ट्स’ ने 30 मई को वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “मक्का में हुआ अल्लाह का बड़ा करिश्मा अल्लाह की क़ुदरत का करिश्मा।”

पोस्ट का आर्काइव्ड वर्शन यहाँ देखें।

पड़ताल

अपनी पड़ताल को शुरू करते हुए सबसे पहले हमने वायरल वीडियो के की-फ्रेम्स निकाले और उन्हें गूगल लेंस के जरिये सर्च किया। सर्च किये जाने पर हमें इस वीडियो से जुड़ी खबर मदीना न्यूज़ डॉट कॉम पर अपलोड की हुई मिली। 7 जून 2016 को दी गई खबर में सऊदी टूरिस्ट पुलिस के हवाले से बताया गया, ‘मक्का की ग्रैंड मस्जिद में नमाज़ पढ़ने के बाद अपनी दृष्टि वापस पाने का दावा करने वाले एक व्यक्ति का वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इस क्लिप को लाखों बार देखा गया और ज्यादातर लोगों की सहानुभूति हासिल हुई। हालांकि , यह व्यक्ति एक पेशेवर चोर है, जो कई लोगों के स्मार्टफोन और पर्स चुराने में कामयाब रहा। सऊदी पर्यटक पुलिस द्वारा यह पता चला कि वह मिस्र का जेबकतरा है।”

इसी बुनियाद पर अपनी पड़ताल को आगे बढ़ाते हुए हमने इस मामले से जुड़ा न्यूज़ सर्च किया। सर्च  करने पर हमें 8 जून 2016 को अल-बावा न्यूज़ वेबसाइट पर इस मामले की खबर मिली। दी गई खबर के मुताबिक, “मक्का की ग्रैंड मस्जिद का एक वीडियो कल वायरल हुआ था, जिसमें मिस्र का एकआदमी खुशी से नाच रहा था और मिस्र की भाषा में कह रहा था कि उसकी आंखों की रोशनी वापस आ गई है। ” हालांकि,  यह कोई और मामला निकला, वह आदमी अंधा नहीं था, बल्कि एक पेशेवर चोर था, जो मौके का फायदा उठाकर वहां आए लोगों के फोन और पर्स छीन रहा था।”

हमें इस मामले से जुड़ी खबर और भी कई न्यूज़ अलग-अलग वेबसाइट पर मिलीं, जिन्हें यहां, यहां और यहां पढ़ा जा सकता है।

यह वीडियो इससे पहले भी इसी फर्जी दावे के साथ वायरल हो चुका है और उस वक्त हमने अधिक पुष्टि के लिए सऊदी अरब के पत्रकार अल-वाहिब से संपर्क किया था और उनके साथ वायरल पोस्ट शेयर की थी। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया था, “यह कई साल  पुराना मामला है। इस शख्स को पुलिस ने हिरासत में ले लिया था और वह शख्स अंधा नहीं था।”

अब बारी थी फर्जी पोस्ट को शेयर करने वाले फेसबुक पेज ‘द  इस्लामिक मीडिया शॉर्ट्स’ की सोशल स्कैनिंग करने की। हमने पाया कि इस पेज को पांच हजार से ज्यादा लोग फॉलो करते हैं।

निष्कर्ष: विश्वास न्यूज़ ने अपनी पड़ताल में पाया कि यह मामला साल 2016 में मक्का में सामने आया था, जब वायरल वीडियो वाले शख्स ने उसकी आँखों की रोशनी वापस आ जाने से जुड़ा दावा किया था। हालांकि, बाद में पुलिस ने अपनी जांच में पाया था कि यह शख्स अंधा नहीं था, बल्कि उसने चोरी की नीयत से झूठ बोला था।

  • Claim Review : यह शख्स अंधा था और मक्का में हरम शरीफ में नमाज पढ़ने के बाद उनकी आंखों की रोशनी वापस आ गई।
  • Claimed By : FB Page- The Islamic Media Shorts
  • Fact Check : झूठ

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