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अयोध्या या उज्जैन समेत अन्य धार्मिक स्थलों पर रूम बुक करने से पहले बरतें सावधानी, बड़ी धर्मशालाओं के नाम से हो रही है ठगी

साइबर अपराधी धार्मिक स्थलों में धर्मशाला या होटल बुकिंग के नाम पर लोगों को ठग रहे हैं। फिर चाहे वह अयोध्या हो या उज्जैन। इस रिपोर्ट में हम इसी तरह के फ्रॉड पर नजर डालेंगे।

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नई दिल्‍ली। साइबर अपराधी धार्मिक स्थलों में धर्मशाला या होटल बुकिंग के नाम पर लोगों को ठग रहे हैं। फिर चाहे वह अयोध्या हो या उज्जैन। धर्मशालाओं नाम पर ठगों ने कई लोगों से पैसे ऐंठे हैं। इस रिपोर्ट में हम इसी तरह के फ्रॉड पर नजर डालेंगे।

केस स्टडी

पीड़ित: मयूर कृष्ण झा, इंदिरापुरम

“मैंने परिवार के साथ अयोध्या जाने का प्लान बनाया। वहां पर रुकने के लिए बिड़ला धर्मशाला में रूम बुक करने की कोशिश की थी। ऑनलाइन सर्च में हमें बिड़ला धर्मशाला के नाम से बनी वेबसाइट मिली। इस पर बुकिंग के लिए हमें एक नंबर पर कॉल या मैसेज करने का कहा गया। वॉट्सऐप पर उन्होंने हमसे रिक्वायरमेंट मांगी। हमने एक दिन के लिए दो एसी रूम्स की बात की। दो रूम्स के उन्होंने 3200 प्लस 40 रुपये मांगे और अपना अकाउंट नंबर शेयर किया। साथ में हमारा आधार कार्ड मांग। बैंक डिटेल में ट्रांजेक्शन कैंसल होने पर उन्होंने क्यूआर कोड भेजा, जिस पर हमने 3240 का पेमेंट किया। वह अकाउंट कुणाल छाबरिया के नाम पर था। पेमेंट के बाद उनका जवाब आना बंद हो गया। करीब 20 दिन बाद हमें जब कोई बुकिंग डिटेल नहीं मिली तो हमने नेशनल क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल में शिकायत की थी। फिर हमने इंदिरापुरम पुलिस थाने में इसकी शिकायत दी थी।”

मयूर ने हमारे साथ फ्रॉड वाली वेबसाइट का लिंक (आर्काइव लिंक) भी शेयर किया। यह वेबसाइट अब भी चल रही है। हालांकि, इस पर दिया गया मोबाइल नंबर स्विच ऑफ आ रहा था।

वेबसाइट पर एआई जेनरेटेड तस्वीरें दी गई हैं। इनमें सभी पर मेटा एआई का लोगो लगा हुआ है।

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इस वेबसाइट को whois पर चेक करने पर पता चला कि यह 30 जनवरी 2025 को रजिस्टर हुई थी और 30 मई को अपडेट हुई है। वेबसाइट को रजिस्टर कराने वाले व्यक्ति का एड्रेस ओडिशा का दिया गया है।

इसके अलावा गूगल पर सर्च करने पर बिड़ला धर्मशाला के नाम से दो और वेबसाइट दिखीं। इन्हें यहां (आर्काइव) और यहां (आर्काइव) देखें।

पहले हमने https://birla-dharamshala.co/ वेबसाइट को चेक किया। इस पर दिए गए मोबाइल नंबर पर हमने सामान्य कॉल की तो यह टेंपरेरी आउट ऑफ नंबर मिला। हालांकि, वाट्स ऐप कॉल करने पर हमारी बात हुई। कॉलर ने कंफर्म किया कि वह अयोध्या में राम मंदिर के पास स्थित प्रसिद्ध बिड़ला धर्मशाला से बोल रहा है। उसने खुद को धर्मशाला का मैनेजर रमेश शर्मा बताया। दो एसी रूम्स के लिए उसने 3120 रुपये का चार्ज बताया और आधार कार्ड समेत अन्य बुकिंग डिटेल भेजने को कहा। साथ रूम बुकिंग के लिए 50 फीसदी पैसे एडवांस मांगे।

whois से पता चला कि यह वेबसाइट 24 सितंबर 2024 को बनी है और 29 सितंबर को अपडेट हुई है।

तीसरी वेबसाइट पर दिया गया मोबाइल नंबर अमान्य बताया गया। यह 18 नवबर 2013 को रजिस्टर हुई थी और 26 अक्टूबर 2023 को ​रजिस्टर हुई थी।

Planning My Trip यूट्यूब चैनल पर बिड़ला धर्मशाला के नाम पर हो रहे ऑनलाइन फ्रॉड के बारे में जानकारी दी है। इसके कमेंट सेक्शन देखने पर पता चला कि इस फ्रॉड में कई लोग रुपये गंवा चुके हैं। किसी के 22 हजार रुपये तो किसी के 4200 रुपये ठगों के पास चले गए।

कार्रवाई

मयूर ने बताया कि पुलिस जांच में पता चला था कि जिस अकाउंट में उनके रुपये ट्रांसफर हुए थे, वह किसी जयपुर निवासी कुणाल छावरिया के नाम से था। पुलिस ने उसका अकाउंट ब्लॉक करा दिया था। जब मयूर ने कुणाल से बात की थी, तो उसने इस ठगी में शामिल होने से इनकार किया लेकिन पैसे वापस दिलाने की कोशिश की बात की थी। करीब चार दिन बाद मयूर के 2000 रुपये वापस आए थे।

कई वेबसाइट कराई हैं बंद

इस बारे में अयोध्या साइबर क्राइम थाने के प्रभारी सूर्य विजय सिंह का कहना है कि “उनके पास इस तरह की कुछ शिकायतें आई थीं, जिसके आधार पर उन्होंने बिड़ला धर्मशाला के नाम पर चल रही वेबसाइट्स को बंद करा दिया था।

बिड़ला धर्मशाला की कोई वेबसाइट नहीं

बिड़ला धर्मशाला के मैनेजर पवन सिंह ने बताया कि उनकी कोई भी वेबसाइट नहीं है। धर्मशाला में आकर ही बुकिंग की जा सकती है। उनकी कोई ऑनलाइन बुकिंग नहीं होती है। एक-डेढ़ साल पहले उन्होंने साइबर सेल और कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई थी, लेकिन वेबसाइट फिर से चलने लगती हैं।

कई अन्य धर्मशालाओं के नाम पर भी हो चुकी है ठगी

कई और बड़ी धर्मशालाओं के नाम पर लोगों को ठगा जा चुका है, जबकि उनकी कोई वेबसाइट नहीं है। पिछले साल शुरू के आठ माह में जानकी महल ट्रस्ट में कमरों की बुकिंग के नाम पर 400 लोग ठगे गए थे।

इसी तरह से खाटू श्याम में सांवरिया धर्मशाला में ऑनलाइन बुकिंग के नाम पर भी ठगी का मामला सामने आ चुका है।नैनीताल की लाला परमा शिव लाला दुर्गा साह धर्मशाला (तल्लीताल धर्मशाला), उज्जैन में महाकाल मंदिर की धर्मशाला और हरिद्वार में धर्मशाला के नाम पर भी ठगी की जा चुकी है।

एक ही पैटर्न

इस तरह के कई मामले सामने आते रहते हैं। इनमें पैटर्न एक ही होता है। साइबर अपराधी बड़ी धर्मशालाओं के नाम से वेबसाइट बनाते हैं। उस पर एक कॉन्टेक्ट नंबर दिया जाता है, जिस पर कॉल कर कमरा बुक करने के बारे में लिखा होता है। उस नंबर पर कॉल करने पर ठग यूजर से आधार कार्ड के साथ बुकिंग डिटेल मांगता है और फिर पेमेंट एडवांस करने को कहता है। इसके लिए अक्सर क्यूआर कोड भेजा जाता है, ​जो किसी अन्य शख्स के नाम पर होता है। कुछ लोगों को उस जगह पर जाकर ठगी का पता चलता है, जबकि कुछ को बुकिंग डिटेल नहीं मिलने पर जब फोन करते हैं तब पता चलता है। अगर पुलिस एक वेबसाइट बंद भी करा देती है तो उस नाम से कई और वेबसाइट खुल जाती हैं।

एक्सपर्ट की राय

पूर्व आईपीएस एवं साइबर एक्सपर्ट प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि प्रसिद्ध धर्मशाला या संस्थानों के नाम से अपराधी वेबसाइट बना लेते हैं। इनके यूआरएल में हल्का-सा फर्क होता है। इनके मोबाइल नंबर पर कॉल करके पता लेना चाहिए। पेमेंट किसी भी क्यूआर कोड के माध्यम से मत कीजिए। हो सके तो उस संस्थान या धर्मशाला की वेबसाइट के नाम को ब्राउजर पर टाइप कीजिए और वहां दिए गए पेमेंट के विकल्प से पेमेंट कीजिए। किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक मत कीजिए। और अगर किसी साइबर क्राइम के शिकार हो जाएं तो साइबर क्राइम डॉट जीओवी डॉट इन या 1930 पर शिकायत करें। इसके साथ ही पुलिस थाने या साइबर क्राइम सेल में शिकायत जरूर दें।

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