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Fact Check : बांग्‍लादेश में ईशनिंदा के आरोपी मुस्लिम डॉक्‍टर को पहनाई गई चप्‍पलों की माला, वीडियो सांप्रदायिक दावे के साथ वायरल

विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में पाया कि वीडियो में नजर आ रहे शख्स मुस्लिम डॉक्टर हैं और उन्हें ईशनिंदा के आरोप के कारण चप्पलों की माला पहनाई गई थी। वीडियो में कोई हिन्दू- मुस्लिम एंगल नहीं है, वीडियो के साथ किया जा रहा दावा भ्रामक है।

  • By: Umam Noor
  • Published: Jun 30, 2025 at 04:41 PM
  • Updated: Jun 30, 2025 at 06:24 PM

नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक शख्स को कुछ लोग चप्पलों की माला पहनाते हुए दिखाई दे रहे हैं। वीडियो को बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की स्थिति के हवाले से शेयर करते हुए दावा किया जा रहा है कि यह हिंदू शिक्षक हैं, जिन्हें धर्म की बुनियाद पर निशाना बनाया गया और चप्पलों की माला पहनाई गई।

विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में पाया कि वीडियो में नजर आ रहे शख्स मुस्लिम डॉक्टर हैं और उन्हें ईशनिंदा के आरोप के कारण चप्पलों की माला पहनाई गई थी। वीडियो में कोई हिन्दू- मुस्लिम एंगल नहीं है, वीडियो के साथ किया जा रहा दावा भ्रामक है।

क्या है वायरल पोस्ट में ?

फेसबुक यूजर ने 29 जून को वायरल पोस्ट को शेयर करते हुए लिखा, ” 40 साल से काम कर रहे एक हिंदू शिक्षक को बांग्लादेश में कट्टरपंथी मादरजात मुल्लों ने चप्पलों की माला पहनाई बांग्लादेश में हिंदुओं की हालत बहुत ही खराब है। अपना भारत हो या पाकिस्तान या फिर बांग्लादेश, हिंदुओं की हालत दयनीय है। बद से बदतर होती जा रही है।भारत में अभी वो 30-35% हैं, इसलिए हिंदुओं को स्थिती की भयावहता का पता नही लग पा रहा है। सभी मोदी मोदी करने में लगे हुए हैं। और इस मोदी ने कभी भी हिंदुओं की दुर्दशा पर सख्त तेवर नही दिखाया। इस समस्या से देश का ध्यान भटकाता रहता है । परिणाम पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिंदू लगभग मरणासन्न हैं। भारत में भी हिंदुओं का वोट लेकर मुल्लों को ही मजबूत करने लगा हुआ है। मुझे मोदी के नाम ओर शक्ल दोनों से ही चिढ़ हो चुकी है।”

पोस्ट के आर्काइव वर्जन को यहां देखें।

पड़ताल

अपनी पड़ताल को शुरू करते हुए सबसे पहले हमने गूगल लेंस के जरिए वायरल वीडियो के की- फ्रेम्स को सर्च किया। सर्च किए जाने पर हमें यह वीडियो बीएम जाहिद हुसैन नाम के एक हैंडल पर 20 जून 2025 को अपलोड किया हुआ मिला। यहां वीडियो के साथ दी गई जानकारी के अनुसार, यह डॉक्टर अहमद अली हैं। वहीं, यह मामला बांग्लादेश के राजबारी में सामने आया।  

इसी बुनियाद पर हमने अपनी पड़ताल को आगे बढ़ाया और हमें 19 जून 2025 को बांग्लादेश की लेखिका तस्लीमा नसरीन की तरफ से भी शेयर किया हुआ यह वीडियो मिला। यहां वीडियो को उन्होंने इस घटना की जानकारी देते हुए  पोस्ट किया है। वहीं, साथ में गई जानकारी के  अनुसार, यह शख्स डॉक्टर अहमद अली हैं, यह घटना ब्लासफेमी (ईशनिंदा) मामले से जुड़ी हुई है।

मामले के संबंध में  न्यूज सर्च किए जाने पर हमें ढाका टाइम्स 24 की वेबसाइट पर भी जानकारी मिली। 15  जून 2025 की खबर के अनुसार, “राजबाड़ी के बलियाकांडी में एक सेवानिवृत्त सामुदायिक चिकित्सा अधिकारी को पैगंबर मुहम्मद (PBUH) का अपमान करने के आरोप में गुस्साई भीड़ ने पीटा। पीड़ित अहमद अली उसी उपजिला के नवाबपुर संघ के टेकाटी गांव के निवासी हैं। घटना रविवार दोपहर करीब 12:30 बजे हुई। वहीं, बाद में बलियाकांडी पुलिस स्टेशन और सेना ने मौके पर जाकर स्थिति को शांत किया और पीड़ित व्यक्ति को बचाया। इस मामले पर बलियाकांडी पुलिस स्टेशन के प्रभारी (ओसी) मोहम्मद जमाल उद्दीन ने कहा, “स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि अहमद अली ने सुबह बेरूली बाजार में एक चाय की दुकान पर पैगंबर मुहम्मद के बारे में अपमानजनक टिप्पणी की। जब यह खबर इलाके में फैली, तो दोपहर में एक उग्र भीड़ ने उनके साथ मारपीट की।”

वायरल पोस्ट से जुड़ी पुष्टि के लिए हमने बांग्लादेश के पत्रकार सादिक- उर रहमान  से संपर्क किया। उन्होंने हमें बताया कि वीडियो में एक मुस्लिम डॉक्टर हैं,  जिनपर ईशनिंदा का आरोप लगा था।  

अब बारी थी फर्जी पोस्ट को शेयर करने वाले फेसबुक यूजर की सोशल स्कैनिंग करने की। हमने पाया कि यूजर के चार हजार से ज्यादा फेसबुक  फ्रेंड्स हैं। वहीं, इस प्रोफाइल से विचारधारा विशेष से प्रेरित पोस्ट शेयर की जाती हैं।

निष्कर्ष: विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में पाया कि वीडियो में नजर आ रहे शख्स मुस्लिम डॉक्टर हैं और उन्हें ईशनिंदा के आरोप के कारण चप्पलों की माला पहनाई गई थी। वीडियो में कोई हिन्दू- मुस्लिम एंगल नहीं है, वीडियो के साथ किया जा रहा दावा भ्रामक है।

  • Claim Review : यह हिंदू शिक्षक हैं, जिन्हें धर्म की बुनियाद पर निशाना बनाया गया और चप्पलों की माला पहनाई गई।
  • Claimed By : FB User- Prashant Shankar
  • Fact Check : भ्रामक

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