Fact Check: AI से बनाई गई है कुलदीप सेंगर को माला पहनाने वाली तस्वीर
विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में पाया कि कुलदीप सिंह सेंगर की तिहाड़ जेल के बाहर फूलों के माला वाली तस्वीर असली नहीं है। इस फोटो को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से बनाया गया है। इसके अलावा सेंगर फिलहाल जेल में है।
- By: Umam Noor
- Published: Dec 26, 2025 at 07:59 PM
- Updated: Dec 30, 2025 at 06:02 PM
नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। उन्नाव में एक नाबालिग के साथ बलात्कार की सजा में जेल में बंद पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। हालांकि, अभी वह जेल में ही है। इसी बीच सेंगर की एक तस्वीर वायरल हो रही है। इसमें उसे जेल से बाहर फूल-मालाओं में देखा जा सकता है। इस तस्वीर को सच समझकर कई सोशल मीडिया यूजर्स शेयर कर रहे हैं।
विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में पाया कि उन्नाव केस के आरोपी कुलदीप सिंह सेंगर की तिहाड़ जेल के बाहर फूलों के माला वाली तस्वीर असली नहीं है। इस फोटो को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से बनाया गया है।
क्या है वायरल पोस्ट में?
फेसबुक यूजर ‘मोहम्मद फिरोज’ ने वायरल पोस्ट को शेयर करते हुए लिखा, “मुबारक हो, देशवासियों!यही है वह तथाकथित “हिंदू राष्ट्र” का सपना—जहाँ जेल से छूटते ही गैंगरेप के दोषियों को फूलमालाओं से स्वागत किया जाता है, मिठाइयाँ खिलाई जाती हैं और उन्हें “संसकारी” कहकर सम्मानित किया जाता है।याद रखिए, आज किसी और की बहन-बेटी की अस्मत लूटी गई, उसकी ज़िंदगी तबाह की गई। कल यही खतरनाक सोच, यही भीड़ और यही अन्याय आपके घर की देहरीज़ तक पहुँच सकता है।क्या यही है हमारा भारत? जहाँ अपराधियों को हीरो बनाया जाए और पीड़िताओं को न्याय से वंचित रखा जाए? सोचिए, जागिए—मौन रहना भी अपराध में हिस्सेदारी है।”
पोस्ट के आर्काइव वर्जन को यहां देखें।

पड़ताल
विश्वास न्यूज ने वायरल दावे की सच्चाई जानने के लिए हमने वायरल फोटो को गूगल रिवर्स इमेज की मदद से सर्च किया। हमें इस तस्वीर से जुड़ी कोई जानकारी नहीं मिली। फोटो पर गौर करने पर हमने पाया कि तस्वीर में जितने भी लोग नजर आ रहे हैं सभी की उंगलियां काफी अटपटी है। इसके अलावा पीछे नीले बोर्ड पर भी हिंदी के गलत शब्द लिखे हुए नजर आए । ऐसे में हमें फोटो के एआई से बने होने का संदेह हुआ।

विश्वास न्यूज ने पड़ताल के दौरान एआई निर्मित तस्वीरों की जांच करने वाले डी कॉपी टूल का इस्तेमाल किया। यहां वायरल तस्वीर को सर्च करने पर नतीजों से पता चला कि यह तस्वीर 100 फीसद एआई की मदद से बनाई गई है। नतीजे को नीचे देखा जा सकता है।

पड़ताल को आगे बढ़ाते हुए हमने फोटो को एआई डिटेक्शन टूल ‘हाइव मॉडरेशन’ की मदद से भी सर्च किया। इस टूल ने 97.8 फीसदी तक फोटो के एआई से बने होने की संभावना जताई।

क्या था मामला?
2017 में उन्नाव की एक लड़की ने उस वक्त के भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर अपहरण और बलात्कार का आरोप लगाया था। मामले ने तब तूल पकड़ा, जब पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत हुई और बाद में एक सड़क हादसे में पीड़िता गंभीर रूप से घायल हो गई, जबकि उसकी दो चाचियों की मौत हो गई थी। 2019 में यह मामला सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर दिल्ली ट्रांसफर कर दिया गया। वहीं, साल 2020 में दिल्ली की अदालत ने कुलदीप सिंह सेंगर को बलात्कार के मामले में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
कौन है कुलदीप सिंह सेंगर?
कुलदीप सिंह सेंगर उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले से चार बार विधायक रह चुका है। रेप केस का मामला सामने आने के बाद भाजपा ने उससे दूरी बना ली। सेंगर का नाम इस मामले के अलावा कई आपराधिक मामलों में भी सामने आ चुका है।
बाहर कब और क्यों आया?
उन्नाव रेप मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने सेंगर को जमानत दी है। हालांकि, अभी वह दूसरे मामले में जेल में ही बंद है। सेंगर को जमानत मिलने के बाद पीड़िता ने अपनी सुरक्षा की मांग की है। देश के कई हिस्सों में सेंगर की जमानत को लेकर विरोध प्रदर्शन भी हो रहा है।
वायरल पोस्ट से जुड़ी पुष्टि के लिए हमने हमारे सहयोगी दैनिक जागरण में दिल्ली में क्राइम को कवर करने वाले सीनियर संवाददता जेपी यादव से संपर्क किया। उन्होंने हमें बताया कि कुलदीप सिंह सेंगर अभी जेल में है। यह तस्वीर फर्जी है।
अब बारी थी फर्जी पोस्ट को शेयर करने वाले फेसबुक यूजर मोहम्मद फिरोज की सोशल स्कैनिंग करने की। हमने पाया कि यूजर दिल्ली के रहने वाले हैं और उन्हें 53 हजार लोग फॉलो करते हैं।
निष्कर्ष: विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में पाया कि कुलदीप सिंह सेंगर की तिहाड़ जेल के बाहर फूलों के माला वाली तस्वीर असली नहीं है। इस फोटो को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से बनाया गया है। इसके अलावा सेंगर फिलहाल जेल में है।
- Claim Review : जेल से निकलने पर उन्नाव रेप केस के आरोपी कुलदीप सेंगर को पहनाई गई फूलों की माला
- Claimed By : फेसबुक यूजर मोहम्मद फिरोज
- Fact Check : झूठ
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