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Fact Check: ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन के बीच वायरल फ्लैशलाइट मार्च का वीडियो AI की मदद से बनाया गया है

  • By: Abhishek Parashar
  • Published: Jan 13, 2026 at 05:10 PM
  • Updated: Jan 30, 2026 at 06:28 PM

नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। ईरान में सरकार के खिलाफ जारी विरोध के बीच सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि यह ईरान में हुई सरकार विरोधी रैली है, जिसमें बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरे लोगों ने मोबाइल की फ्लैशलाइट जलाते हुए प्रदर्शन किया।

विश्वास न्यूज ने अपनी जांच में इस दावे को फेक पाया। वायरल हो रहा वीडियो एआई क्रिएटेड है, जिसे ‘All Eyes on Iran’ कैंपेन टैग के साथ भी शेयर किया जा रहा है।

क्या है वायरल?

सोशल मीडिया यूजर ‘vvishwanatham_98’ ने वायरल वीडियो (आर्काइव लिंक) को शेयर करते हुए लिखा है, ईरान से मिली रिपोर्टों के अनुसार, इंटरनेट बंद करने के अलावा, इस्लामी शासन ने सोमवार रात तेहरान के कई हिस्सों में बिजली भी काट दी। यह बिजली कटौती सरकार विरोधी प्रदर्शनों के कई दिनों बाद हुई है, जो भारी सुरक्षा तैनाती के बावजूद राजधानी भर में फैल गए हैं। बिजली और मोबाइल डेटा जानबूझकर बाधित किए जाने के बाद, प्रदर्शनकारियों ने सड़कों को रोशन करने के लिए अपने फोन की फ्लैशलाइट का सहारा लिया – एक दृश्य रणनीति जिसने एक साथ उनकी उपस्थिति और एकता का संकेत दिया। ऑनलाइन प्रसारित वीडियो में अंधेरे इलाकों में रोशनी के समूह चलते हुए दिखाई दिए, जो भागीदारी के व्यापक पैमाने और दृश्यता को दबाने के लिए सरकार के प्रयासों को रेखांकित करते हैं। मानवाधिकार निगरानीकर्ताओं और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों ने चेतावनी दी है कि दोहरी बिजली कटौती – डिजिटल और बिजली – का उद्देश्य गति को तोड़ना, समन्वय को रोकना और उन छवियों के प्रवाह को रोकना है जो देश के अंदर और बाहर समर्थन जुटा सकती हैं। ईरान में अशांति के समय इंटरनेट बंद करना एक आम तरीका बन गया है, जिसकी वैश्विक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और नागरिक समाज समूहों द्वारा आलोचना की जाती है।

वायरल वीडियो का स्क्रीनशॉट।

सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर इस वीडियो को समान और मिलते-जुलते दावे के साथ शेयर किया गया है।

पड़ताल

वायरल वीडियो में बड़ी संख्या में लोगों को मोबाइल फ्लैशलाइट जलाकर प्रदर्शन करते हुए देखा जा सकता है। ईरान में हो रहे सरकार विरोधी प्रदर्शनों के उपलब्ध वीडियो में ऐसा कोई वीडियो मौजूद नहीं है। साथ ही ‘All Eyes on Iran’ कैंपेन टैग इसके एआई क्रिएटेड होने का संदेह पैदा करता है। वीडियो के ऑरिजिनल सोर्स को ढूंढने के लिए हमने इसके की-फ्रेम्स को रिवर्स इमेज सर्च किया और सर्च में यह वीडियो elnaz555 नाम के वेरिफाइड इंस्टाग्राम यूजर की प्रोफाइल (आर्काइव लिंक) पर लगा मिला।

elnaz555 नाम के वेरिफाइड इंस्टाग्राम यूजर की प्रोफाइल से शेयर किया गया एआई क्रिएटेड वीडियो।

उन्होंने इसे ईरान के मौजूदा सरकार विरोध प्रदर्शनों के प्रति एकजुटता के तौर पर शेयर करते हुए बताया है कि इसे एआई की मदद से बनाया गया है। उन्होंने लिखा है, “हाल ही में एक वीडियो सामने आया, जिसमें तेहरान की अंधेरी सड़कों पर भारी भीड़ दिख रही थी, जिन्होंने सरकार द्वारा अपनी संख्या छिपाने के लिए स्ट्रीट लाइट बंद करने के बाद अपने सेलफोन की लाइट जला दी थी। उस पल ने मुझे AI का इस्तेमाल करके कला के ज़रिए उस दृश्य को फिर से बनाने के लिए प्रेरित किया।”

हमारी जांच से स्पष्ट है कि यह वीडियो वास्तविक नहीं, बल्कि एआई क्रिएटेड है। अतिरिक्त पुष्टि के लिए हमने इसे एआई डिटेक्शन टूल की मदद से इसे चेक किया। बफलो यूनिवर्सिटी के डीपफेक-ओ-मीटर की मदद से हमने इस मल्टीमीडिया को चेक किया और इसके लगभग कई इंडिकेटर्स ने इस वीडियो में एआई छेड़छाड़ की अधिकतम संभावना की पुष्टि की। 

AVSRDD (2025) डिटेक्टर ने इस वीडियो के करीब 100 फीसदी एआई से बने होने की संभावना की पुष्टि की। TALL (2023) डिटेक्टर ने इस वीडियो के करीब 100 फीसदी एआई से क्रिएटेड होने की संभावना की पुष्टि की। वहीं, DSP-FWA (2019) और XCLIP (2022) का कॉन्फिडेंस स्कोर क्रमश: 61 फीसदी और करीब 47 फीसदी रहा।

वहीं ट्रूथस्कैन की एनालिसिस में इस वीडियो के एआई से क्रिएटेड होने की संभावना करीब 100 फीसदी है।

ट्रूथस्कैन की एनालिसिस

अतिरिक्त पुष्टि के लिए हमने हमारे सहयोगी टीआईए (पूर्व में एमसीए) की पहल डीपफेक्स एनालिसिस यूनिट (डीएयू) से संपर्क किया। उन्होंने हमारे साथ कई अन्य डिटेक्शन टूल्स की एनालिसिस को शेयर किया, जिसमें इस वीडियो के एआई क्रिएटेड होने की पुष्टि होती है।

IsitAI ने इस वीडियो के एआई से बने होने की अधिकतम संभावना की पुष्टि की, वहीं इमेजव्हिसपरर की एनालिसिस भी इस वीडियो के एआई जेनरेटेड होने की अधिकतम संभावना की पुष्टि करता है।

IsitAI की एनालिसिस में इस मल्टीमीडिया के एआई से बने होने की संभावना की पुष्टि होती है।

हमारी जांच से स्पष्ट है कि वायरल हो रहा वीडियो वास्तविक नहीं, बल्कि एआई क्रिएटेड है।

Image व्हिसपरर की एनालिसिस में इस मल्टीमीडिया के एआई से बने होने की संभावना की पुष्टि होती है।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों में अब तक करीब 500 से अधिक लोगों के मारे जाने की सूचना है। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान में सात जनवरी  तक 24 प्रांतों में विरोध प्रदर्शनों की खबरें सामने आई थीं, लेकिन अब 31 में से 24 प्रांतों के 80 से अधिक जिलों में विरोध प्रदर्शन हो रहा है।

निष्कर्ष: ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के नाम पर वायरल हो रहा मोबाइल फ्लैशलाइट वाला वीडियो भ्रामक है। हमारी पड़ताल में पाया गया कि यह वीडियो वास्तविक नहीं है, बल्कि इसे AI तकनीक का उपयोग करके बनाया गया है।

  • Claim Review : ईरान में मोबाइल का फ्लैशलाइट जलाकर विरोध जताते प्रदर्शनकारी।
  • Claimed By : Insta User-vvishwanatham_98
  • Fact Check : झूठ

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