Fact Check: जामिया मिल्लिया यूनिवर्सिटी के नाम पर वायरल ‘निकाह’ नोटिस फर्जी
विश्वास न्यूज की पड़ताल में पाया गया कि वायरल दावा गलत है। जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने छात्र-छात्राओं के साथ दिखने पर निकाह कराने जैसा कोई अजीबोगरीब आदेश जारी नहीं किया है।
- By: Pallavi Mishra
- Published: Feb 24, 2026 at 01:46 PM
- Updated: Feb 24, 2026 at 03:33 PM
विश्वास न्यूज (नई दिल्ली): सोशल मीडिया पर जामिया मिल्लिया इस्लामिया (JMI) के रजिस्ट्रार के नाम से एक कथित अधिसूचना (Notification) तेजी से वायरल हो रही है। इसमें दावा किया गया है कि रमजान के महीने के दौरान परिसर में छात्र-छात्राओं का एक साथ खड़ा होना सख्त मना है। यदि कोई जोड़ा साथ पाया जाता है, तो विश्वविद्यालय प्रशासन तुरंत उनका ‘निकाह’ करा देगा।
विश्वास न्यूज की जांच में यह दावा पूरी तरह गलत और फर्जी पाया गया है। जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने ऐसा कोई भी नोटिस जारी नहीं किया है। यह एक एडिटेड पोस्ट है, जिसे वास्तविक मानकर साझा किया जा रहा है।
क्या है वायरल पोस्ट में?
एक टिपलाइन यूजर ने हमारे साथ वायरल नोटिफिकेशन शेयर करके इसकी सच्चाई जाननी चाही। इसमें जामिया मिल्लिया इस्लामिया के लेटरहेड जैसा दिखने वाला एक दस्तावेज है। इसमें अंग्रेजी में लिखा है कि रमजान के पवित्र महीने की गरिमा बनाए रखने के लिए लड़के और लड़कियों का कैंपस में साथ खड़ा होना प्रतिबंधित है और पकड़े जाने पर उनका निकाह तुरंत करा दिया जाएगा।

पड़ताल
दावे की सच्चाई जानने के लिए हमने सबसे पहले वायरल दस्तावेज का विश्लेषण किया। गौर से देखने पर इस दस्तावेज में कई विसंगतियां दिखती हैं। जैसे नोटिस के ऊपरी हिस्से (Header) और मुख्य सामग्री (Body Text) के फॉन्ट में स्पष्ट अंतर है। ऊपरी हिस्से की लिखावट की तुलना में मुख्य संदेश का फॉन्ट अलग और धुंधला है, जो एडिटिंग की ओर इशारा करता है। साथ ही, किसी भी प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय की आधिकारिक अधिसूचना में ‘निकाह करा देने’ या ‘वलीमा का खर्च खुद उठाने’ जैसी भाषा का प्रयोग नहीं किया जाता है।

हमने जामिया मिलिया इस्लामिया की आधिकारिक वेबसाइट को भी खंगाला। यहां ऐसा कोई सर्कुलर नहीं था। यहां 20 फरवरी 2026 को जारी अंतिम अधिसूचना “B.Ed. और MBA (डिस्टेंस मोड) प्रोग्राम बैच 2025-26 जनवरी के लिए आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाने” के संबंध में थी।
इसके बाद, हमने विश्वविद्यालय की मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (CPRO) डॉ. साइमा सईद से संपर्क किया। उन्होंने इस वायरल नोटिस को फर्जी करार देते हुए स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय ने ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया है। उन्होंने आगे कहा कि यह फर्जी सूचना इतनी तुच्छ (Petty) और आधारहीन है कि संस्थान इस पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण देना भी आवश्यक नहीं समझता।
हालांकि, मामले की गंभीरता और संस्थान की छवि को देखते हुए जामिया मिल्लिया इस्लामिया के रजिस्ट्रार कार्यालय ने 24 फरवरी 2026 को एक आधिकारिक सर्कुलर (Circular No. Gen-04/JMI/RO/E-T/2026) जारी किया । इस सर्कुलर में विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि:
1.सोशल मीडिया पर निकाह से संबंधित वायरल हो रहा नोटिस फर्जी है।
2.विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस भ्रामक सूचना के खिलाफ दिल्ली पुलिस के साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई है।
3.छात्रों और जनता से अनुरोध किया गया है कि वे ऐसी फर्जी खबरों पर ध्यान न दें।

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि इसी तरह की भ्रामक सामग्री पाकिस्तान के बहरिया यूनिवर्सिटी, इस्लामाबाद के नाम पर भी वायरल की गई है। ‘इस्लामाबाद टुडे‘ (Archive) के आधिकारिक फेसबुक पेज पर 23 फरवरी 2026 को एक पोस्ट साझा की गई थी, जिसमें इसे विश्वविद्यालय का आधिकारिक नोटिफिकेशन बताया गया था। हालांकि, 24 फरवरी 2026 को उसी पेज पर एक स्पष्टीकरण (Clarification) जारी किया गया, जिसमें इस दावे का खंडन करते हुए इसे फर्जी बताया गया। विश्वास न्यूज बहरिया यूनिवर्सिटी के संदर्भ में इस नोटिफिकेशन की कोई पुष्टि नहीं करता।

दोनों सूचनाओं के विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि बहरिया यूनिवर्सिटी वाले वायरल पोस्ट से हाइलाइट किए गए टेक्स्ट को काट कर जामिया मिल्लिया इस्लामिया के लेटरहेड पर चिपकाया गया है। दोनों सूचनाओं में शब्दों की बनावट और विषय-वस्तु बिल्कुल एक समान हैं। इस समानता को आप नीचे दिए गए कोलाज में स्पष्ट रूप से देख सकते हैं।

निष्कर्ष: विश्वास न्यूज की पड़ताल में पाया गया कि वायरल दावा गलत है। जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने छात्र-छात्राओं के साथ दिखने पर निकाह कराने जैसा कोई अजीबोगरीब आदेश जारी नहीं किया है।
- Claim Review : जामिया यूनिवर्सिटी में रमजान के दौरान साथ दिखने वाले जोड़ों का तुरंत निकाह कराया जाएगा।
- Claimed By : FB User Sadaf Khan
- Fact Check : झूठ
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