Fact Check: AI से फोटो बनवाने के ट्रेंड की वजह से उज्जैन में 45 साल बाद महिला चोर के पकड़े जाने का दावा मनगढ़ंत
एआई से 80 के दशक की फोटो बनवाने के ट्रेंड की वजह से महिला चोर के पकड़े जाने का दावा फर्जी है। वायरल हो रही अखबार के खबर की क्लिप को एआई की मदद से बनाया गया है।
- By: Pragya Shukla
- Published: Sep 18, 2026 at 05:43 PM
नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। सोशल मीडिया पर इन दिनों आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से 1980 के दशक की निजी तस्वीरें बनाकर शेयर करने का ट्रेंड चल रहा है। इसी से जोड़कर सोशल मीडिया पर न्यूजपेपर की एक कटिंग तेजी से वायरल हो रही है। इस कटिंग को शेयर कर दावा किया जा रहा है कि एआई के इस ट्रेंड की वजह से 45 साल पुरानी एक महिला चोर को पुलिस ने पकड़ लिया है। वायरल पेपर कटिंग पर लिखा है कि एक महिला 1980 में उज्जैन में एक सुनार की दुकान से सोने का हार चुराकर भाग गई थी। जब महिला ने एआई से अपनी फोटो बनवाकर शेयर की, तो पुलिस ने उसे पकड़ लिया।
विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में पाया कि वायरल दावा गलत है। असल में इस पेपर क्लिप को एआई की मदद से बनाया गया है और अब मनगढ़ंत दावे के साथ वायरल किया जा रहा है।
क्या हो रहा है वायरल?
फेसबुक यूजर ‘Rajni Rajni’ ने 15 सितंबर 2026 को वायरल तस्वीर शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा, “AI ने खोला 45 साल पुरानी चोरी का राज! सोशल मीडिया पर चल रहे “1980s में आप कैसे दिखते?” वाले AI फोटो ट्रेंड ने ऐसी कहानी सामने ला दी, जिस पर यकीन करना मुश्किल है! बताया जा रहा है कि मध्य प्रदेश के उज्जैन में करीब 45 साल पुराने चोरी के मामले में पुलिस को एक बुजुर्ग महिला तक पहुंचने में मदद मिली। कहानी के मुताबिक, वर्ष 1980 में एक महिला पर सुनार की दुकान से सोने का हार चोरी करने का आरोप था। इसके बाद वह अपनी पहचान बदलकर लंबे समय तक पुलिस की पकड़ से दूर रही। फिर आया सोशल मीडिया का दौर…महिला ने भी ट्रेंड के चलते अपनी AI से 80s लुक वाली तस्वीर बनाकर फेसबुक पर पोस्ट कर दी। लेकिन शायद उन्हें अंदाज़ा नहीं था कि उनकी यह पुरानी दिखने वाली तस्वीर किसी ऐसे व्यक्ति की नजर में भी आ जाएगी, जो उन्हें दशकों बाद भी पहचान सकता था! बताया जा रहा है कि पीड़ित सुनार ने तस्वीर देखकर महिला को पहचान लिया और पुलिस तक मामला पहुंचा। पूछताछ के बाद महिला ने कथित तौर पर 1980 की चोरी की बात स्वीकार कर ली। यानि AI ने चेहरा भले 80s का बनाया हो… लेकिन 45 साल पुरानी याददाश्त सुनार की निकली! अब तो AI फोटो बनाते समय एक बात जरूर याद रखिए—“फोटो पुरानी हो सकती है, लेकिन पहचानने वाली नजरें पुरानी नहीं होतीं!”
पोस्ट के आर्काइव लिंक को यहां पर देखें।

पड़ताल
वायरल दावे की सच्चाई जानने के लिए हमने गूगल पर संबंधित कीवर्ड्स की मदद से सर्च किया। हमें दावे से जुड़ी कोई विश्वसनीय न्यूज रिपोर्ट नहीं मिली। इसके बाद हमने कटिंग में मौजूद जानकारी पर गौर किया। इस खबर में कोई भी बारीक जानकारी नहीं दी गई है। खबर में न तो यह बताया गया है कि चोरी का यह मामला किस थाने का है और न ही घटना कहां हुई थी? मामले में दर्ज एफआईआर नंबर और पुलिस का कोई बयान भी वायरल फोटो की खबर में मौजूद नहीं है। ऐसे में हमें फोटो के एआई से बने होने का संदेह हुआ।
पड़ताल को आगे बढ़ाते हुए हमने एआई डिटेक्शन टूल ‘AI Or Not’ की मदद ली । इस टूल ने वायरल तस्वीर में करीब 74 फीसदी तक एआई के इस्तेमाल होने की संभावना जताई।

हमने दूसरे टूल ‘I detect’ की मदद से भी फोटो को सर्च किया। इस टूल ने करीब 100 फीसदी तक फोटो को बनाने में एआई के इस्तेमाल के संकेत दिए।

उज्जैन के पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने भी वायरल हो रही पोस्ट को फेक बताया। उन्होंने विश्वास न्यूज से बातचीत में कहा, “उज्जैन में ऐसी कोई घटना नहीं हुई है, जैसा कि वायरल पोस्ट में दावा किया गया है।”
क्या है संदर्भ?
सोशल मीडिया पर यूजर्स अपनी वर्तमान तस्वीरों को एआई की मदद से 80 के दशक का लुक दे रहे हैं। यूजर्स एआई का इस्तेमाल करते हुए अपने बाल, बैकग्राउंड और लाइटिंग समेत पूरे लुक को बदल रहे हैं। कई मशहूर हस्तियों ने भी इस ट्रेंड को फॉलो करते हुए 80 के दशक की अपनी तस्वीरें एआई से बनवाकर शेयर की हैं।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से वीडियो और फोटो बनाना काफी आसान हो गया है। ऐसे में यूजर्स एआई से बने काल्पनिक वीडियो मनगढ़ंत दावों के साथ वायरल करते रहते हैं। हाल ही में रेलवे ट्रैक पर हाथी के एक बच्चे को बचाए जाने का फर्जी AI वीडियो काफी वायरल हुआ था। इसी तरह बिना हाथों के जिम्नास्टिक करती दिव्यांग लड़की के भावुक वीडियो को सोशल मीडिया पर खूब शेयर किया गया था। पूरी रिपोर्ट यहां और यहां जा सकती है।
अंत में हमने पोस्ट को गलत दावे के साथ शेयर करने वाली फेसबुक यूजर के अकाउंट को स्कैन किया। इस फेसबुक यूजर को दस हजार से अधिक लोग फॉलो करते हैं। यूजर ने प्रोफाइल में खुद को हरियाणा का रहने वाला बताया है।
निष्कर्ष: विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में पाया कि एआई से 80 के दशक की फोटो बनवाने के ट्रेंड की वजह से महिला चोर के पकड़े जाने का दावा फर्जी है। वायरल हो रही अखबार के खबर की क्लिप को एआई की मदद से बनाया गया है।
- Claim Review : AI से फोटो बनवाने के ट्रेंड की वजह से 45 साल बाद पकड़ी गई महिला चोर।
- Claimed By : FB User Rajni Rajni
- Fact Check : झूठ
पूरा सच जानें... किसी सूचना या अफवाह पर संदेह हो तो हमें बताएं
सब को बताएं, सच जानना आपका अधिकार है। अगर आपको ऐसी किसी भी मैसेज या अफवाह पर संदेह है जिसका असर समाज, देश और आप पर हो सकता है तो हमें बताएं। आप हमें नीचे दिए गए किसी भी माध्यम के जरिए जानकारी भेज सकते हैं...












