Fact Check: अभिजीत दीपके के भावुक होने का वीडियो पुराना, नीट पेपर लीक प्रदर्शन से है संबंधित
अभिजीत दीपके के भावुक वीडियो को लेकर किया जा रहा दावा गलत है। यह वीडियो हाल-फिलहाल का नहीं, बल्कि जुलाई 2026 में नीट पेपर लीक के खिलाफ हुए प्रदर्शनों से संबंधित है। उस दौरान पुलिस सोनम वांगचुक को जबरन उठाकर अस्पताल ले गई थी, जिसके बाद दीपके ने यह बयान दिया था।
- By: Pragya Shukla
- Published: Oct 22, 2026 at 03:17 PM
- Updated: Oct 22, 2026 at 05:47 PM
नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) के प्रवक्ता आशुतोष रांका और सौरभ दास को 21 अक्टूबर 2026 को जमानत पर रिहा कर दिया गया है। लेकिन दोनों के हिरासत में लिए जाने के बाद जब सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके दिल्ली में तिरंगा यात्रा निकालने की कोशिश कर रहे थे, तब पुलिस ने उन्हें भी हिरासत में ले लिया था। इसी घटना से जोड़कर दीपके का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में उन्हें भावुक होकर यह कहते हुए सुना जा सकता है कि ‘हम क्रिमिनल नहीं हैं’। इसको हालिया घटना का बताकर शेयर किया जा रहा है।
विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में पाया कि अभिजीत दीपके का वायरल हो रहा यह वीडियो पुराना है। असल में उन्होंने भावुक होकर यह बयान जुलाई 2026 में तब दिया था, जब वह नीट पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। इस दौरान पुलिस सोनम वांगचुक को जबरन उठाकर अस्पताल ले गई थी। इसी मामले के एक पुराने वीडियो को अब गलत दावे के साथ वायरल किया जा रहा है।
क्या हो रहा है वायरल?
फेसबुक पेज ‘JantaPulse Plus’ ने 18 अक्टूबर 2026 को एक वीडियो शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा, “जेल से बाहर आते ही रो पड़े अभिजीत दीपके क्रिमिनल नहीं हूं मैं।”
पोस्ट के आर्काइव लिंक को यहां पर देखें।

पड़ताल
वायरल दावे की सच्चाई जानने के लिए हमने संबंधित कीवर्ड्स की मदद से गूगल सर्च किया। हमें वीडियो का लंबा वर्जन न्यूज एजेंसी ‘IANS’ के आधिकारिक एक्स अकाउंट पर मिला। इस वीडियो को 18 जुलाई 2026 को शेयर किया गया था। यहां मौजूद जानकारी के मुताबिक, वीडियो नीट पेपर लीक के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान का है। दरअसल, छात्रों का साथ देने के लिए सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशन पर बैठे थे। उनकी तबीयत खराब होने के बाद पुलिस उन्हें जबरन उठाकर अस्पताल ले गई थी और उन्हें भर्ती करवाया था। इसके बाद अभिजीत दीपके भावुक हो गए थे और उन्होंने कहा था, “वह (सोनम वांगचुक) अस्पताल नहीं जाना चाहते थे। वह संसद मार्च करना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने जो किया है, वह कोई अपराधी तो नहीं थे कि उन्हें चादरों में छिपाकर ले जाया गया। अगर आपको उनकी सेहत की इतनी ही चिंता थी, तो आपको उन्हें सम्मान के साथ ले जाना चाहिए था।”
पड़ताल के दौरान हमें दावे से जुड़ी एक न्यूज रिपोर्ट ‘नवभारत टाइम्स’ की वेबसाइट पर मिली। इस रिपोर्ट को 18 जुलाई 2026 को प्रकाशित किया गया था। इसके अनुसार, “सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस जंतर-मंतर से जबरन अपने साथ ले गई थी और अस्पताल में भर्ती करा दिया था, जिसके बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रमुख अभिजीत दीपके मंच पर पहुंच गए और माइक अपने हाथों में ले लिया था। दीपके फफक-फफककर रो पड़े थे। उन्होंने कहा था कि वो अस्पताल नहीं जाना चाहते थे। उन्हें संसद तक मार्च करना था। लेकिन आज जो पुलिस वालों ने ये किया है। सोनम वांगचुक कोई अपराधी नहीं हैं, जो उन्हें चादरों से ढककर यहां से ले जाया गया। अगर आपको उनके स्वास्थ्य की इतनी ही चिंता थी तो आप सोनम वांगचुक को यहां से इज्जत के साथ लेकर जाते। उनको इस तरह छुपाकर नहीं ले जाना चाहिए था।”

अधिक जानकारी के लिए हमने जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के खिलाफ हुए प्रदर्शनों को कवर करने वाले ‘दैनिक जागरण’ के रिपोर्टर नेमिश हेमंत से संपर्क किया। उन्होंने हमें बताया कि यह वीडियो पुराना है और नीट पेपर लीक के खिलाफहुए प्रदर्शन के दौरान का है। जब पुलिस ने सोनम वांगचुक को जबरन अस्पताल में भर्ती कराया था, उसके बाद अभिजीत दीपके ने यह बयान दिया था।
क्या है संदर्भ?
‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) विवाद पर दिल्ली और देशभर में प्रदर्शन हुए हैं। कांग्रेस और कॉकरोच जनता पार्टी सहित विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग पर ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। इन प्रदर्शनों के बीच जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट करने पर पाबंदी लगा दी गई है। लेकिन जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट करने पर पाबंदी लगने के बाद सीजेपी प्रवक्ता आशुतोष रांका और सौरभ दास ने नियमों का उल्लंघन किया था। उन्होंने तिरंगा हाथ में लेकर जंतर-मंतर पर विरोध जताया था। इसके बाद पुलिस ने दोनों नेताओं को न्यायिक हिरासत में भेजा था। 14 अक्टूबर 2026 को आशुतोष रांका और सौरव दास को शांति भंग होने और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका के आधार पर निवारक कार्रवाई के तहत अदालत में पेश किया गया था। शुरुआत में अदालत ने दोनों को पांच दिनों के लिए न्यायिक हिरासत में भेजा था। बाद में हिरासत की अवधि दो दिन और बढ़ा दी गई।
अभिजीत दीपके ने अपनो दोनों प्रवक्ता के लिए दिल्ली में तिरंगा यात्रा निकालने की कोशिश की थी और मंडी हाउस से पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया था। हालांकि, कुछ समय बाद उनको रिहा कर दिया गया था। दैनिक जागरण की एक रिपोर्ट के अनुसार, कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) की अदालत ने 21 अक्टूबर 2026 को दोनों के जमानत बांड को स्वीकार कर लिया था। इसके बाद इन दोनों नेताओं को जमानत पर रिहा कर दिया गया था। पूरी रिपोर्ट को यहां पर पढ़ें।
अंत में हमने वायरल वीडियो शेयर करने वाले फेसबुक पेज को स्कैन किया। हमने पाया कि इस पेज को दो हजार से अधिक लोग फॉलो करते हैं और इसे संचालित करने वाला यूजर 18 अगस्त 2023 से फेसबुक पर सक्रिय है। पेज पर मौजूद जानकारी के अनुसार इसे लखनऊ से संचालित किया जाता है।
निष्कर्ष: विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में पाया कि अभिजीत दीपके के भावुक वीडियो को लेकर किया जा रहा दावा गलत है। यह वीडियो हाल-फिलहाल का नहीं, बल्कि जुलाई 2026 में नीट पेपर लीक के खिलाफ हुए प्रदर्शनों से संबंधित है। उस दौरान पुलिस सोनम वांगचुक को जबरन उठाकर अस्पताल ले गई थी, जिसके बाद दीपके ने यह बयान दिया था।
- Claim Review : जेल से रिहा होने के बाद सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके के भावुक होने का वीडियो।
- Claimed By : FB User JantaPulse Plus
- Fact Check : झूठ
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