Fact Sheet: क्या है विश्व आर्थिक मंच (WEF), कैसे हुई शुरुआत और क्या होता है एजेंडा?
विश्व आर्थिक मंच की वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक, इस मंच की स्थापना जर्मन अर्थशास्त्री क्लॉस श्वाब ने "स्टेकहोल्डर थ्योरी" के तहत की थी। उनका यह सिद्धांत पुस्तक के रूप में सामने आया, जिसका मतलब था कि एक कंपनी को अपने सभी हितधारकों के हितों को पूरा करना चाहिए, न कि केवल शेयरधारकों के हितों का ख्याल रखना चाहिए। सामाजिक रूप से जवाबदेह "स्टेकहोल्डर कैपिटलिज्म" ("हितधारक समाजवाद") ही विश्व आर्थिक मंच का मार्गदर्शक सिद्धांत है।
- By: Abhishek Parashar
- Published: Jan 22, 2025 at 06:32 PM
- Updated: Jan 22, 2025 at 08:06 PM
नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। स्विट्जरलैंड के दावोस में सालाना आयोजित होने वाले विश्व आर्थिक मंच (WEF) की शुरुआत हो चुकी है। सम्मेलन की अवधि 20-24 जनवरी है, जिसका थीम “Collaboration for the Intelligent Age” है। विश्व आर्थिक मंच की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक, सम्मेलन में करीब 130 से अधिक देशों के 3,000 से अधिक लीडर्स इसमें भाग लेंगे, जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जर्मन चांसलर ओलाफ स्कोल्ज समेत दुनिया के 60 से अधिक शीर्ष लीडर संबोधित करेंगे। इसके अलावा विश्व व्यापार संगठन (WTO), अंतराराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF), नाटो और यूएनडीपी समेत अन्य वैश्विक संस्थाओं के प्रमुख भी इसमें शामिल होंगे।
भारत की भागीदारी
जहां तक भारत की भागीदारी का सवाल है, तो जल शक्ति मंत्री सी आर पाटिल, नागरिक उड्डयन मंत्री के राममोहन नायडू, खाद्य प्रसंस्करण मंत्री चिराग पासवान, कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयंत चौधरी के साथ केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण एवं रेल मंत्री अश्निनी वैष्णव सम्मेलन में भारतीय प्रतिनिधिमंडल की अगुआई कर रहे हैं।
इसके अलावा इस प्रतिनिधिनमंडल में आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और केरल समेत छह भारतीय राज्यों का उच्च स्तरीय प्रतिनिधि मंडल शामिल है, जो इस सम्मेलन में अपने राज्य की औद्योगिक प्रगति, निवेश अवसर और सफलता की कहानियों को सामने रखेंगे।
10 जनवरी को वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय की तरफ से जारी बयान के मुताबिक, “भारत की प्रभावशाली आर्थिक वृद्धि वैश्विक तौर पर ध्यान आकर्षित कर रही है और प्रमुख क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रगति के साथ, विश्व मंच पर एक अग्रणी देश के रूप में इसकी स्थिति मजबूत हो रही है। एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए देश एक अप्रैल 2000 से अब तक 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) हासिल करने में सफल रहा है। साथ ही एफडीआई में करीब 26 फीसदी की वृद्धि हुई, जो मौजूदा वित्त वर्ष की पहली छमाही में 42.1 बिलियन डॉलर तक पहुंच गई। यह वृद्धि वैश्विक निवेश के लिए एक प्रमुख गंतव्य के रूप में भारत की अहमियत को रेखांकित करता है, जो रणनीतिक नीतिगत पहलों, मजबूत बिजनेस ईकोसिस्टम और बढ़ी हुई अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धात्मकता से प्रेरित है।”
क्या है विश्व आर्थिक मंच (WEF)?
स्विट्जरलैड के ज्यूरिक में दावोस में एक स्की रिजॉर्ट है, लेकिन यह इस वजह से मशहूर नहीं है। यह जगह हर साल जनवरी महीने में होने वाली विश्व आर्थिक मंच (WEF) की सालाना बैठक की वजह से मशहूर है।
विश्व आर्थिक मंच सार्वजनिक-निजी सहयोग की दिशा में काम करने वाला अंतरराष्ट्रीय संगठन है। वैश्विक प्रगति को गति देने और दुनिया को बेहतर बनाने के लिए यह संगठन व्यापार, राजनीति, पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन समेत अन्य अहम मुद्दों पर विचार-विमर्श करता है।
विश्व आर्थिक मंच की वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक, “जटिल चुनौतियों वाली दुनिया में विश्व आर्थिक मंच वैश्विक, क्षेत्रीय और उद्योग के एजेंडे को आकार देने के लिए राजनीतिक, व्यावसायिक, शैक्षणिक, सिविल सोसाइटी और समाज के अन्य लीडर्स के साथ मिलकर काम करता है।”
विश्व आर्थिक मंच का मुख्यालय स्विट्जरलैंड के जेनेवा में है। इसके अन्य कार्यालय अमेरिका,चीन, जापान और भारत में हैं।
स्थापना
विश्व आर्थिक मंच की स्थापना वर्ष 1971 में गैर लाभकारी संगठन यानी नॉन प्रॉफिट फाउंडेशन के तौर पर हुई थी और आज के समय में यह संगठन कुल 10 सेंटर्स के साथ मिलकर काम करता है।
इन सेंटर्स में सेंटर्स फॉर एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग एंड सप्लाई चेंज, सेंटर फॉर साइबर सिक्योरिटी, सेंटर फॉर एनर्जी एंड मटेरियल्स, सेंटर फॉर फाइनेंशियल एंड मॉनेटरी सिस्टम्स, सेंटर फॉर हेल्थ एंड हेल्थकेयर, सेंटर फॉर नेचर एंड क्लाइमेट, सेंटर फॉर रीजन्स, ट्रेड एंड जियोपॉलिटिक्स, सेंटर फॉर द फोर्थ इंडस्ट्रियल रिवॉल्यूशन, सेंटर फॉर द न्यू इकोनॉमी एंड सोसाइटी और सेंटर फॉर अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन शामिल है।

विश्व आर्थिक मंच की वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक, इस मंच की स्थापना जर्मन अर्थशास्त्री क्लॉस श्वाब ने “स्टेकहोल्डर थ्योरी” के तहत की थी। उनका यह सिद्धांत पुस्तक के रूप में सामने आया, जिसका मतलब था कि एक कंपनी को अपने सभी हितधारकों के हितों को पूरा करना चाहिए, न कि केवल शेयरधारकों के हितों का ख्याल रखना चाहिए। सामाजिक रूप से जवाबदेह “स्टेकहोल्डर कैपिटलिज्म” (“हितधारक समाजवाद”) ही विश्व आर्थिक मंच का मार्गदर्शक सिद्धांत है।
फरवरी 1971 में दावोस में इसकी पहली बैठक “यूरोपीयन मैनेजमेंट फोरम” के तौर पर हुई, जिसमें 31 देशों के 450 से अधिक भागीदारों ने हिस्सा लिया।
इसके बाद 1973 में दावोस मैनिफेस्टो जारी हुआ और वर्ष 1987 में यूरोपीयन मैनेजमेंट फोरम का नाम बदल कर वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (विश्व आर्थिक मंच) कर दिया गया।
1998 का वर्ष और G-20 का अस्तित्व में आना
दावोस की बैठक में उभरते बाजारों, विशेषकर एशिया को प्रभावित करने वाले वित्तीय संकट के मद्देनजर वैश्विक वित्तीय प्रणाली में सुधार करने का मुद्दा अहम था। बैठक में शामिल प्रतिभागियों का यह विचार था कि इस प्रक्रिया में बड़े विकासशील देशों को शामिल किया जाए और फिर 20 देशों के संगठन को स्थापित करने का विचार सामने आया, जिसमें आधी संख्या में विकसित अर्थव्यवस्थाएं और आधी संख्या में विकासशील अर्थव्यवस्थाएं हों।
इसी तर्ज पर जी20 की बैठक वर्ष 1998 में जर्मनी के बॉन शहर में हुई, जिसमें केवल वित्त मंत्री शामिल हुए थे और इसका दायरा केवल ग्लोबल फाइनेंस तक सीमित था।
इसके बाद श्वाब और अन्य ने जी20 की बैठक को शिखर सम्मेलन का स्तर ऊपर उठाने का प्रस्ताव रखा। आखिरकार 2008 में ऐसा हुआ, जब अमेरिका ने वैश्विक आर्थिक संकट के प्रभाव पर विचार करने के लिए वाशिंगटन डीसी में जी-20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी की। और फिर सितम्बर 2009 में, पेन्सिलवेनिया के पिट्सबर्ग की बैठक में घोषणा की गई कि वैश्विक आर्थिक नीति के समन्वय के लिए मुख्य मंच के रूप में G20, G8 की जगह लेगा।
कौन होते हैं शामिल?
विश्व आर्थिक मंच (WEF) की वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक, इसके स्टेकहोल्डर्स यानी हितधारकों में बिजनेस, सरकारें, अकादमिक, सिविल सोसाइटी , मीडिया, आर्टिस्ट्स समेत अन्य समूह शामिल हैं।

2025 की बैठक का एजेंडा
2025 की बैठक का एजेंडा प्रमुख वैश्विक और क्षेत्रीय चुनौतियों पर विचार करना है, जिसमें भू-राजनीतिक चुनौतियों का समाधान, जीवन स्तर में सुधार के लिए विकास को गति देने के साथ न्यायसंगत एवं समावेशी एनर्जी ट्रांजिशन को प्रोत्साहित करना है।

सालाना होने वाली यह बैठक एक थीम के तहत होती है। 2025 की इस बैठक का थीम “Collaboration for the Intelligent Age” है। 2024 में 15-19 जनवरी के बीच हुई इस बैठक का थीम “Rebuilding Trust” था, जबकि 2023 का थीम “Cooperation in a Fragmented World” था।
जारी की जाने वाली प्रमुख रिपोर्ट्स
वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर विमर्श के अलावा सम्मेलन के दौरान कई महत्वपूर्ण रिपोर्ट को जारी किया जाता है, जिन पर दुनिया की नजर रहती है। विश्व आर्थिक मंच की फ्यूचर ऑफ जॉब्स रिपोर्ट, 2025 के मतुाबिक अगले पांच वर्षों में एआई, बिग डेटा, सिक्योरिटी मैनेजमेंट स्पेशलिस्ट प्रमुख और तेजी से उभरते जॉब ट्रेंड्स होंगे।
एक अन्य प्रमुख जारी की जाने वाली रिपोर्ट, ग्लोबल रिस्क्स रिपोर्ट है। 2025 की ग्लोबल रिस्क्स रिपोर्ट के मुताबिक, शॉर्ट टर्म (दो साल की अवधि में) चुनौतियों में सबसे शीर्ष चुनौती मिस-इन्फॉर्मेशन और डिस-इन्फॉर्मेशन की होगी।

बिजनेस और अर्थव्यवस्था से जुड़े अन्य मामलों की विस्तृत जानकारी प्रदान करती एक्सप्लेनर रिपोर्ट को विश्वास न्यूज के एक्सप्लेनर सेक्शन में पढ़ा जा सकता है।
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