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Explainer : केमिकल वाले रंग होते हैं खतरनाक, जानें कैसे सुरिक्षत रहें इस होली में

रंगों के त्‍योहार होली में यदि रंग न ही न तो मजा कैसे आएगा। हालांकि,साथ में इस बात का भी ध्‍यान रखना आवश्‍यक है कि रंगों के कारण जिंदगी बेरंग न हो जाए, क्‍योंकि बाजार में बिकने वाले केमिकल युक्त रंगों से शरीर को काफी ज्‍यादा नुकसान होता है।

  • By: Ashish Maharishi
  • Published: Mar 11, 2025 at 10:32 AM
  • Updated: Mar 11, 2025 at 11:14 AM

नई दिल्‍ली। रंगों के त्‍योहार होली में यदि रंग न ही न तो मजा कैसे आएगा। हालांकि,साथ में इस बात का भी ध्‍यान रखना आवश्‍यक है कि रंगों के कारण जिंदगी बेरंग न हो जाए, क्‍योंकि बाजार में बिकने वाले केमिकल युक्त रंगों से शरीर को काफी ज्‍यादा नुकसान होता है। ऐसे में इन रंगों से बचते हुए होली खेलना आवश्‍यक है। केमिकल युक्त रंगों का इस्तेमाल करने से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। कई सिंथेटिक रंगों में शीशा, पारा, क्रोमियम और कृत्रिम रंग जैसे हानिकारक रसायन होते हैं, जो त्वचा, आंखों और श्वसन तंत्र को प्रभावित कर सकते हैं। ये केमिकल त्वचा की एलर्जी, चकत्ते, जलन और यहां तक कि लंबे समय तक त्वचा संबंधी बीमारियों का कारण बनते हैं। कुछ रंगों में भारी धातुएं होती हैं, जो त्वचा के जरिए रक्तप्रवाह में प्रवेश कर सकती हैं, जिससे विषाक्त प्रभाव हो सकते हैं।

त्‍वचा विशेषज्ञ डॉ. रुबेन भसीन पासी कहती हैं कि जब केमिकल वाले रंग आंखों के संपर्क में आते हैं, तो वे लालिमा, खुजली और संक्रमण का कारण बन सकते हैं, जिससे कभी-कभी गंभीर दृष्टि संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा इससे सांस से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं, खासकर अस्थमा या ब्रोंकाइटिस से पीड़ित लोगों को। कुछ सिंथेटिक रंगों में कार्सिनोजेनिक पदार्थ होते हैं, जो बार-बार संपर्क में आने से कैंसर के खतरे को बढ़ाते हैं। इसके अलावा, जब ये रंग धुल जाते हैं, तो जल निकायों को दूषित करते हैं, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है।

केमिकल वाले लाल रंग से हो सकता है स्‍कीन कैंसर

चंडीगढ़ प्रशासन की पर्यावरण विभाग की एक रिपोर्ट के अनुसार, काले रंग में लीड ऑक्‍साइड होता है। हरे रंग में कॉपर सल्‍फेट मिलाया जाता है। इसकी तरह सिल्‍वर कलर में एल्युमिनियम ब्रोमाइड का इस्‍तेमाल किया जाता है। यदि नीले रंग की बात करें तो इसमें प्रशिया ब्लू होता है। इससे कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस नाम की त्वचा की बीमारी होने का खतरा रहता है। इसी तरह लाल रंग में पारा सल्फाइट का इस्‍तेमाल होता है, इससे त्‍वचा के कैंसर का खतरा हो सकता है। इस प्रकार के रंगों से सांसों का रंग, आंखों और त्‍वचा को भारी नुकसान हो सकता है। यदि किसी को सांस की बीमारी या एलर्जी है तो उन्‍हें केमिकल वाले रंग से पूरी तरह दूर रहना चाहिए।

होली में बालों की सुरक्षा करना ज़रूरी है, क्योंकि केमिकल वाले रंग उन्हें रूखा और कमज़ोर बना सकते हैं। इसलिए बालों की जड़ों तक तेल लगाएं। होली खेलने से पहले बालों में तेल लगाने से रंग सोखने से बचते हैं और धोना आसान हो जाता है। इसी तरह आंखों की देखभाल भी आवश्‍यक है। आँखों की सुरक्षा के लिए कॉन्टैक्ट लेंस पहनने से बचें और रंग के कणों को आँखों में जाने से रोकने के लिए धूप का चश्मा पहनें। अगर रंग आपकी आँखों में चले जाएँ, तो तुरंत साफ़ पानी से धोएँ और रगड़ने से बचें।

सुरक्षित और स्‍वस्‍थ्‍य होली मनाने के टिप्‍स

– केमिकल युक्‍त रंगों से पूरी तरह दूरी बनाकर रखें।
– चेहरे और शरीर पर मॉइश्चराइजर और सन स्‍कीन क्रीम का इस्‍तेमाल करें।
– कॉन्टैक्ट लेंस का इस्‍तेमाल भूलकर भी न करें।
– बालों की जड़ तक तेल लगाएं।
– पक्‍के रंगों का इस्‍तेमाल करने से बचें।
– नॉर्मल तेल और बॉडी लोशन से मसाज करके रंग उतारें।
– साबुन से रंग उतारें। स्‍क्रब के जरिए जबरदस्‍ती रंग न निकालें।
– स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी दिक्‍कत आ रही है तो डॉक्‍टर से सलाह लें।

डिस्क्लेमर : यह ऑटिकल एक्सपर्ट्स की मदद से लिखा गया है। यहां दी गई जानकारी केवल सूचना के लिए है। किसी भी सलाह के लिए अपने डॉक्‍टर से परामर्श लें।

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