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Fact Check: वक्फ संशोधन बिल के समर्थन में दिए गए अमित शाह के पुराने बयान को यूजीसी मामले से जोड़कर किया जा रहा वायरल

अमित शाह ने पिछले साल अप्रैल में लोकसभा में वक्‍फ के नए कानून को लेकर अपनी बात रखी थी। उसी बयान के कुछ हिस्‍से को अब यूजीसी विवाद से जोड़ते हुए गलत दावे के साथ शेयर किया जा रहा है।

  • By: Ashish Maharishi
  • Published: Jan 28, 2026 at 01:38 PM
  • Updated: Jan 30, 2026 at 06:16 PM

नई दिल्‍ली (विश्‍वास न्‍यूज)। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए समता विनियमन (इक्विटी रेगुलेशन) को लेकर देश के कुछ हिस्‍सों में विरोध प्रदर्शन हो रहा है। इन सबके बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का एक बयान वायरल हो रहा है। इसे यूजीसी विवाद से जोड़ते हुए शेयर किया जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि यूजीसी एक्‍ट पर अमित शाह ने कहा है कि यह संसद का कानून है। सबको स्‍वीकार करना पड़ेगा।

विश्‍वास न्‍यूज ने विस्‍तार से इसकी जांच की। यह फर्जी साबित हुआ। अमित शाह ने पिछले साल अप्रैल में लोकसभा में वक्‍फ के नए कानून को लेकर अपनी बात रखी थी। उसी बयान के कुछ हिस्‍से को अब यूजीसी विवाद से जोड़ते हुए गलत दावे के साथ शेयर किया जा रहा है।

क्‍या हो रहा है वायरल

एक इंस्‍टाग्राम हैंडल ने 28 जनवरी को एक वीडियो को पोस्‍ट करते हुए लिखा, “यूजीसी पर अमित शाह ने कहा कि संसद का कानून है, सबको स्‍वीकार करना होगा।”

वायरल पोस्‍ट के कंटेंट को यहां ज्‍यों का त्‍यों लिखा गया है। इसे सच मानकर कई यूजर्स शेयर कर रहे हैं। पोस्‍ट का आर्काइव वर्जन यहां देखें।

पड़ताल

विश्‍वास न्‍यूज ने सबसे पहले केंद्रीय मंत्री के वीडियो को ध्‍यान से देखा। इसमें उन्‍हें यह बोलते हुए सुना जा सकता है, “संसद का कानून है सबको स्वीकार करना पड़ेगा। स्वीकार नहीं करेंगे, मतलब क्या है? … हम कानून को स्वीकार नहीं करेंगे, ये कानून भारत सरकार का है। हर एक पर बंधन करता होगा और इसको स्वीकार करना पड़ेगा।”

इसी आधार पर हमने कुछ कीवर्ड बनाकर गूगल ओपन सर्च टूल की मदद से अमित शाह का वायरल बयान सर्च किया। यह बयान हमें अमित शाह के इंस्‍टाग्राम हैंडल पर मिला। इसे 3 अप्रैल 2025 को अपलोड करते हुए लिखा गया कि वक्फ पर संसद में जो कानून बन रहा है, वह भारत सरकार का कानून है, इसे सभी को स्वीकार करना ही पड़ेगा।

सर्च के दौरान वायरल वीडियो हमें केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के फेसबुक पेज पर भी मिला। इसे 2 अप्रैल 2025 को पोस्‍ट करते हुए अमित शाह के हवाले से लिखा गया, “संसद का कानून सबको स्वीकार करना पड़ेगा। यह कानून भारत सरकार का है। हर किसी पर लागू होगा और हर किसी को स्वीकार करना पड़ेगा। – माननीय गृहमंत्री श्री Amit Shah जी #WaqfAmendmentBill”

दैनिक जागरण के यूट्यूब चैनल पर गृह मंत्री अमित शाह के बयान को 3 अप्रैल 2025 को अपलोड किया गया था। इसमें बताया गया कि अमित शाह ने कहा कि यह देश की संसद द्वारा बनाया गया भारत का कानून है। इसे सभी को मानना ही पड़ेगा।

इससे यह तो स्‍पष्‍ट हो गया कि अमित शाह के पुराने बयान को अब यूजीसी विवाद से जोड़कर गलत मंशा के साथ जानबूझकर वायरल किया जा रहा है।

सर्च के दौरान हमें नवभारत टाइम्‍स की एक रिपोर्ट मिली। 2 अप्रैल 2025 की इस रिपोर्ट में बताया कि केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल के सपोर्ट में अपनी बात रखी थी। उस दौरान उन्‍होंने इसे लेकर विस्‍तार से बताया था।

विश्‍वास न्‍यूज ने पड़ताल को आगे बढ़ाते हुए दैनिक जागरण के राष्‍ट्रीय ब्‍यूरो के प्रमुख आशुतोष झा से संपर्क किया। उनके साथ वायरल वीडियो शेयर किया। उन्‍होंने बताया कि केंद्रीय मंत्री अमित शाह का वायरल वीडियो पुराना है। इसका यूजीसी के नए नियमों से कोई संबंध नहीं है। हाल-फिलहाल में उन्‍होंने ऐसा कोई बयान नहीं दिया है।

जांच के अंत में हमने पुराने वीडियो को गलत दावे के साथ शेयर करने वाले हैंडल की जांच की । पता चला कि इस हैंडल को 34 हजार से ज्‍यादा लोग फॉलो करते हैं। यह हैंडल मई 2022 को बनाया गया था।

निष्‍कर्ष: विश्‍वास न्‍यूज की पड़ताल में वायरल पोस्‍ट फर्जी साबित हुई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पुराने वीडियो को अब यूजीसी विवाद के बीच उनका बयान बताकर वायरल किया जा रहा है। पिछले साल अप्रैल में अमित शाह ने संसद में वक्‍फ के नए कानून को लेकर अपनी बात रखी थी। उसी बयान के कुछ हिस्‍से को अब गलत दावे के साथ वायरल किया जा रहा है।

  • Claim Review : अमित शाह ने यूजीसी कानून को लेकर कहा कि इसको सबको स्‍वीकार करना होगा।
  • Claimed By : IG User
  • Fact Check : झूठ

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