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Fact Check: बीरभूम हिंसा को सांप्रदायिक रंग देकर किया जा रहा दुष्प्रचार, हिंदुओं की मौत का दावा फेक

पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में हुई हिंसा को सांप्रदायिक रंग देकर भड़काऊ दावे के साथ वायरल किया जा रहा है। घटना में किसी हिंदू महिला या बच्चे की मृत्यु नहीं हुई है, बल्कि मारे गए सभी मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखते हैं।

  • By Vishvas News
  • Updated: March 25, 2022

नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के रामपुर हाट में हुई हिंसा के बाद सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कई पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि इस घटना में मरने वाले सभी हिंदू समुदाय के थे। दावा किया जा रहा है कि बंगाल के बीरभूम में 10 हिंदू औरतों और दो बच्चों को जलाकर मार दिया गया।

हमने अपनी जांच में पाया कि वायरल हो रहा दावा सांप्रदायिक वैमनस्यता को भड़काने के मकसद से शेयर किया जा रहा है। बंगाल के बीरभूम में हुई हिंसा में मरने वाले सभी मुस्लिम समुदाय के थे और इस घटना के आरोपी भी समान समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। बीरभूम पुलिस के मुताबिक, इस घटना में कहीं से भी कोई सांप्रदायिक एंगल शामिल नहीं है। रामपुरहाट में टीएमसी नेता की हत्या के बाद भड़की हिंसा में कई घरों को आग के हवाले कर दिया गया था, जिसमें आग से जलकर 2 बच्चों समेत कुल आठ लोगों की मौत हो गई थी। इसमें तीन महिलाएं भी शामिल थीं, जबकि वायरल पोस्ट में 10 हिंदू औरतों और 2 बच्चों के साथ मृतकों की संख्या 12 बताई जा रही है।

क्या है वायरल?

फेसबुक यूजर ‘RajLaxmi Tent House’ ने वायरल पोस्ट (आर्काइव लिंक) को शेयर करते हुए लिखा है, ”बंगाल में 10 हिंदू औरतें 2 हिंदू बच्चों को बर्बरता के साथ जलाया गया आज का बंगाल 1990 का कश्मीर बन चुका है, जो चमचे आज चुप है वहीं कुछ सालों बाद एजेंडा चलाएंगे, सेंटर में उस वक्त सरकार भाजपा की थी।”

कई अन्य यूजर्स ने इसे समान और मिलते-जुलते दावे क साथ शेयर किया है।

पड़ताल

ट्विटर पर भी कई यूजर्स ने बीरभूम हिंसा को सांप्रदायिक रंग देकर भड़काऊ दावे के साथ शेयर किया है, जिसका कोलकाता पुलिस के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से खंडन करते हुए ऐसे लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई किए जाने की सूचना दी गई है।

कोलकाता पुलिस की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक, ‘बीरभूम के रामपुरहाट के बोगतुई गांव में हुई घटना में किसी हिंदू महिला या बच्चे की हत्या नहीं हुई है। इस ह्रदयविदारक घटना को सांप्रदायिक रंग देकर पश्चिम बंगाल में सामाजिक अशांति फैलाने की कोशिश करने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है।’

हालांकि, इस ट्वीट में घटना के बारे में अन्य जानकारियों का उल्लेख नहीं है। न्यूज सर्च में हमें बंगाल के प्रमुख अखबार द टेलीग्राफ की वेबसाइट पर 23 मार्च को प्रकाशित रिपोर्ट मिली, जिसमें इस घटना में कुल आठ लोगों के मारे जाने की सूचना है। मृतकों की पहचान, जहांआरा बीबी (डोली) 38, लीली खातुन (18), शेली बीबी (32), नूरनेहर बीबी (52), रुपाली बीबी (39), काजी साजिदुर रहमान (22), तुली खातुन (7) और मीना बीबी (40) के तौर पर की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, पहले सातों मृतक सगे संबंधी हैं और उनका शव सोना शेख के एक मंजिले मकान में मिला, जबकि काजी साजिदुर और लिली खातुन की हाल ही में शादी हुई थी।

बीरमभू हिंसा को लेकर द टेलीग्राफ की वेबसाइट पर 23 मार्च को प्रकाशित रिपोर्ट

अन्य रिपोर्ट से भी इसकी पुष्टि होती है। 24 मार्च की हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, घटना में तीन महिला और दो बच्चों समेत कुल आठ लोगों को जलाकर मार दिया गया। न्यूज एजेंसी पीटीआई के हवाले से लिखी गई रिपोर्ट के मुताबिक, इन सभी जिंदा जलाए जाने से पहले बुरी तरह से मारा गया था। रिपोर्ट में कहा गया है कि शुरुआती जांच में सामने आए तथ्यों के मुताबिक, तृणमूल पंचायत सदस्य बागदू शेख की हत्या के बाद हिंसा भड़की थी।

न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक 23 मार्च को पश्चिम बंगाल के बीरभूम हिंसा में कुल आठ लोगों को जलाकर मार दिया गया था।

एएनआई के मुताबिक, कोलकाता हाई कोर्ट ने इस घटना की जांच के लिए गठित की गई एसआईटी को केस से जुड़े दस्तावेज और गिरफ्तार व्यक्तियों को सीबीआई को सौंपने का आदेश देते हुए एजेंसी को सात अप्रैल को प्रगति रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है।

हमारी अब तक की पड़ताल से यह स्पष्ट है कि पश्चिम बंगाल के बीरभूम में हुई हिंसा में किसी हिंदू महिला या बच्चे की हत्या नहीं की गई और न ही यह घटना सांप्रदायिक थी।

विश्वास न्यूज ने इस घटना को लेकर बीरभूम जिले के पुलिस अधीक्षक नागेंद्रनाथ त्रिपाठी से संपर्क किया। त्रिपाठी ने कहा, ‘यह सांप्रदायिक हिंसा से संबंधित घटना नहीं है, क्योंकि मृतक और आरोपी एक ही समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। मरने वाले सभी मुस्लिम समुदाय के लोग हैं और पुलिस घटना की वजह पता लगाने के लिए जांच कर रही है।’ उन्होंने कहा कि जो लोग इस घटना को सांप्रदायिक रंग देकर दुष्प्रचार कर रहे हैं, उनके खिलाफ पुलिसिया कार्रवाई की जाएगी।

न्यूज एजेंसी पीटीआई के हवाले से द प्रिंट की रिपोर्ट के मुताबिक बीरभूम पुलिस ने रामपुरहाट के एसडीपीओ शयान अहमद को निलंबित कर दिया है। विश्वास न्यूज ने इस मामले को लेकर अहमद से भी संपर्क किया। उन्होंने भी इस घटना के सांप्रदायिक होने के दावे का खंडन करते हुए कहा कि पुलिस घटना के कारणों का पता लगाने के लिए जांच कर रही है और इस मौके पर जांच की दिशा को लेकर कोई जानकारी साझा नहीं की जा सकती है।

बीरभूम हिंसा पर वायरल पोस्ट को सांप्रदायिक रंग देकर भड़काऊ दावे के साथ शेयर करने वाले यूजर को फेसबुक पर करीब 300 लोग फॉलो करते हैं और यह प्रोफाइल विचारधारा विशेष से प्रेरित है।

निष्कर्ष: पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में हुई हिंसा को सांप्रदायिक रंग देकर भड़काऊ दावे के साथ वायरल किया जा रहा है। घटना में किसी हिंदू महिला या बच्चे की मृत्यु नहीं हुई है, बल्कि मारे गए सभी मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखते हैं।

  • Claim Review : बंगाल के बीरभूम में 10 हिंदू औरतें 2 हिंदू बच्चों को बर्बरता के साथ जलाया गया
  • Claimed By : FB User-RajLaxmi Tent House
  • Fact Check : झूठ
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