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Fact Check: बांग्‍लादेश हिंसा की बताकर की जा रही है पश्चिम बंगाल के इस्‍कॉन मंदिर की पुरानी तस्वीर वायरल

विश्वास न्यूज़ ने वायरल पोस्ट की पड़ताल में पाया कि यह दावा भ्रामक है। इस्कॉन के पुजारी की बताते हुए जिस तस्वीर को वायरल किया जा रहा है वह बांग्लादेश की नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल की 2016 फोटो है।

  • By Vishvas News
  • Updated: October 26, 2021

नई दिल्ली (विश्वास न्यूज़)। बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हुई सांप्रदायिक हिंसा के मामले से जुडी बहुत-सी ख़बरें वायरल होनी शुरू हो गयी हैं। इसी कड़ी में एक तस्वीर वायरल हो रही है, जिसमें एक पुजारी को कुछ मुसलमानों को इफ्तारी कराते हुए देखा जा सकता है। अब इसी पोस्ट को शेयर करते हुए यूजर दावा कर रहे हैं कि बांग्लादेश के इस्कॉन मंदिर में हुई हिंसा में स्वामी निताई दास जी हत्या कर दी गयी है। विश्वास न्यूज़ ने वायरल पोस्ट की पड़ताल में पाया कि यह दावा भ्रामक है। इस्कॉन के पुजारी की बताते हुए जिस तस्वीर को वायरल किया जा रहा है वह बांग्लादेश की नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल की 2016 फोटो है।

क्या है वायरल पोस्ट में ?

फेसबुक पेज ने वायरल फोटो को अपलोड करते हुए लिखा, ‘ये हैं इस्कॉन मंदिर बांग्लादेश के स्वामी निताई दास जी, रमजान में रोजा इफ्तारी करवाते हुए…
हर वर्ष ये हजारों मुसलमानों को भगवान का प्रसाद खिलाते थे और हरेक रमजान में रोजा-इफ्तारी करवाते थे। पाँच दिन पहले ही जिहादियों द्वारा इनकी भी हत्या कर दी गयी और मंदिर की सभी मूर्तियों को तोड़ कर मंदिर को जला दिया गया। 👎👎👎क्या इसे ही “सांप को दूध पिलाना” कहते है?”

पोस्ट के आर्काइव वर्जन को यहाँ देखें।

पड़ताल

अपनी पड़ताल को शुरू करते हुए सबसे पहले हमने गूगल रिवर्स इमेज के ज़रिये वायरल तस्वीर को सर्च किया। इसी सर्च में हमें ucanews न्यूज़ नाम की एक वेबसाइट का लिंक मिला। यहाँ वायरल तस्वीर को खबर में देखा जा सकता है। 4 जुलाई 2016 को पब्लिश हुई इस खबर में दी गयी जानकारी के मुताबिक, ‘इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस के एक साधु ने 22 जून को मायापुर में हिंदू समूह के मंदिर में इफ्तार के दौरान मुसलमानों को मिठाई खिलाई। (रघु नाथ द्वारा फोटो)।” खबर में आगे बताया गया, ‘मुसलमानों ने कोलकाता से लगभग 130 किलोमीटर उत्तर में मायापुर के चंद्रोदय मंदिर के परिसर के अंदर शाम की प्रार्थना ही की।” पूरी खबर यहाँ देखें।

अब तक की पड़ताल से यह तो साबित हो गया था की यह तस्वीर पश्चिम बंगाल की है और इसका बांग्लादेश में ISKCON मंदिर में हिंसा से कोई लेना-देना नहीं है।

ट्विटर एडवांस सर्च किये जाने पर इस्कॉन की ऑफिशियल ट्विटर हैंडल पर 15 अक्टूबर 2021 को किये गए ट्वीट में बांग्लादेश के नोआखली में इस्कॉन मंदिर पर हमले से जुडी जानकारी दी गयी है।

न्यूज़ सर्च हमें इस्कॉन की वेबसाइट पर भी इसी मामले से जुडी एक खबर मिली। इसमें दी गयी जानकारी के मुताबिक, ‘चौमोनी में इस्कॉन श्री श्री राधा कृष्ण, गौर नित्यानंद जीउ मंदिर में हमला हुआ और दो भक्त, प्रांत चंद्र दास (जिनका शव अगले दिन एक तालाब में मिला) और जतन चंद्र साहा, इन हमलों के दौरान मारे गए। एक अन्य भक्त निमाई चंद्र दास गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती हैं। सभी आवासीय भक्तों पर शारीरिक हमला किया गया और उन्हें चोटें आई हैं।’ इस पूरी खबर में हमें कहीं भी ‘स्वामी निताई दास’का नाम नहीं मिला।

विश्वास न्यूज़ ने पुष्टि के लिए बांग्लादेश के न्यूज़ पेपर न्यूज़ ऐज बीडी के पत्रकार मिथुन सादिक़ रहमान से संपर्क किया और वायरल पोस्ट उनके साथ शेयर की। उन्होंने हमें बताया कि, ‘इस्कॉन के दो भक्तों की इस हिंसा में मौत हुई है। इसमें से एक प्रांतो चंद्र साहा की नोआखली में उनके एक रिश्तेदार के घर जाने के दौरान मौत हो गई थी। उनका होमटाउन पड़ोस का जिला कमिला था। लेकिन जिसकी डेथ हुई वह साधु नहीं था।’

वायरल पोस्ट से जुडी पुष्टि के लिए हमने बूम के बांग्लादेश के फैक्ट चेकर शोएब अब्दुल्लाह से भी संपर्क किया और वायरल पोस्ट उनके साथ ट्विटर के ज़रिए शेयर किया। उन्होंने हमें बताया, ‘उस नोआखली घटना में दो भक्त (भिक्षु नहीं) प्रांत चंद्र दास (26) और जतन चंद्र साहा (42) मारे गए थे। विभिन्न स्रोतों और स्थानीय पत्रकारों ने पुष्टि की है।’

हमनें पुष्टि के लिए इस्कॉन से भी ईमेल के ज़रिये संपर्क किया है। जवाब आते ही खबर को अपडेट कर दिया जायेगा।

भ्रामक पोस्ट को शेयर करने वाले फेसबुक पेज की सोशल स्कैनिंग में हमने पाया कि इस पेज को 4,945 लोग फॉलो करते हैं। इसके अलावा इस पेज को 23 June 2017 को बनाया गया है।

निष्कर्ष: विश्वास न्यूज़ ने वायरल पोस्ट की पड़ताल में पाया कि यह दावा भ्रामक है। इस्कॉन के पुजारी की बताते हुए जिस तस्वीर को वायरल किया जा रहा है वह बांग्लादेश की नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल की 2016 फोटो है।

  • Claim Review : ये हैं इस्कॉन मंदिर बांग्लादेश के स्वामी निताई दास जी, रमजान में रोजा इफ्तारी करवाते हुए... हर वर्ष ये हजारों मुसलमानों को भगवान का प्रसाद खिलाते थे, और हरेक रमजान में रोजा-इफ्तारी करवाते थे। पाँच दिन पहले ही जिहादियों द्वारा इनकी भी हत्या कर दी गयी, और मंदिर की सभी मूर्तियों को तोड़ कर मंदिर को जला दिया गया।
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