Fact Check: मुर्शिदाबाद में ट्रैक पर बम लगाते पकड़े गए हिंदू युवक और बंगाल में छह साल के हिंदू नाबालिग की पिटाई का दावा गलत
पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में बम लगाने के मामले में पकड़े गए युवकों का मामला 2024 के दिसंबर महीने की घटना से संबंधित है। जबकि मुर्शिदाबाद में हिंसा वक्फ संशोधन (विधेयक) के अधिनियम बनने के बाद भड़की थी। संसद के दोनों सदनों से पारित होने के बाद पांच अप्रैल को राष्ट्रपति की मंजूरी मिली और फिर आधिकारिक रूप से अधिसूचित किए जाने के बाद वक्फ संशोधन अधिनियम आठ अप्रैल 2025 को पूरे देश में लागू हो गया। वहीं, बंगाल में हिंदू नाबालिग को पीटे जाने की घटना बंगाल की नहीं, बल्कि बांग्लादेश की है।
- By: Abhishek Parashar
- Published: Apr 22, 2025 at 04:04 PM
नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। वक्फ (संशोधन) अधिनियम के खिलाफ पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुई हिंसा में पिता-पुत्र की हत्या समेत तीन लोगों की मृत्यु हुई और सैकड़ों की संख्या में लोगों को पलायन करना पड़ा। इसी संदर्भ में सोशल मीडिया यूजर्स दो अलग-अलग पोस्ट को शेयर कर दावा कर रहे हैं कि मुर्शिदाबाद में दो युवक रेलवे ट्रैक पर बम रखते हुए पकड़े गए हैं,जो हिंदू हैं। वहीं एक अन्य पोस्ट में यह दावा किया जा रहा है कि पश्चिम बंगाल के मुस्लिम भीड़ ने एक छह साल के नाबालिग की बुरी तरह से पिटाई कर दी।
विश्वास न्यूज ने अपनी जांच में इन दोनों दावों को फेक पाया। बम लगाने के मामले में पकड़े गए युवकों का मामला पुरानी घटना से संबंधित है और नाबालिग को पीटे जाने की घटना बंगाल की नहीं, बल्कि बांग्लादेश की है।
क्या है वायरल?
विश्वास न्यूज के टिपलाइन नंबर +91 9599299372 पर यूजर्स ने पोस्ट को शेयर किया है, जिसमें दावा किया गया है, “THE TV पश्चिम बंगाल के मुशिदाबाद में रेलवे लाइन के पास ब/म लगाते हुए मदन कुंडू और सागर दास गिरफ्तार.”

वहीं, एक अन्य यूजर ने एक वीडियो को शेयर किया है, जिसके साथ दावा किया गया है, “बंगाल में एक 6 साल के हिन्दू बच्चे को मारते समय इनका मन क्यों नही पिघला, जवाब एक ही है, हिंदुओ का मौन,, जिहादियों की ताकत बन गई है, हर हिन्दू अपनी बारी का इंतजार कर रहा है, अब भी चुप रहोगे तो, याद रखना हिन्दुओं.”

पड़ताल
मुर्शिदाबाद में रेलवे ट्रैक पर बम लगाने की घटना में हिंदू युवकों के पकड़े जाने के साथ वायरल तस्वीर की सच्चाई के लिए हमने इसे रिवर्स इमेज सर्च किया और सर्च में हमें यह तस्वीर ‘@JournoMirror’ नाम के आधिकारिक एक्स हैंडल से साझा की हुई मिली।
इस पोस्ट को 29 दिसंबर 2024 को शेयर किया है, जिसमें आरोपी युवकों का नाम मदन कुंडू और सागर दास है। जबकि वक्फ संशोधन अधिनियम के बाद बंगाल में हिंसा इस कानून के संसद से पारित होने के बाद हुई थी।
कई अन्य सोशल मीडिया पोस्ट (आर्काइव लिंक) में भी इस घटना की तारीख दिसंबर 2024 की बताई गई है।
बताते चलें कि संसद के दोनों सदनों में लंबी बहस के बाद वक्फ (संशोधन) अधिनियम को पारित कर दिया गया। इसके बाद पांच अप्रैल को इसे राष्ट्रपति की मंजूरी मिली और फिर इसे आधिकारिक रूप से अधिसूचित कर दिया, जिसके बाद यह कानून आठ अप्रैल 2025 को पूरे देश में लागू हो गया।
यानी संबंधित घटना मुर्शदाबाद में हुई हिंसा से न तो ठीक पहले की है, या न उसके दौरान या उसके बाद की। वायरल पोस्ट को लेकर हमने मुर्शिदाबाद पुलिस स्टेशन से संपर्क किया। उन्होंने पुष्टि करते हुए बताया गया कि मुर्शिदाबाद में ऐसी कोई घटना सामने नहीं आई है।
दूसरा पोस्ट एक वीडियो है, जिसमें भीड़ को एक व्यक्ति को पीटते हुए देखा जा सकता है। दावा किया जा रहा है कि यह बंगाल में मुस्लिमों के नाबालिग हिंदू की पिटाई की घटना से संबंधित है।
ऑरिजिनल सोर्स को ढूंढने के लिए हमने इस वीडियो के की-फ्रेम्स निकाले और उसे रिवर्स इमेज सर्च किया। सर्च में हमें बांग्लादेशी ईटीवी के आधिकारिक यू-ट्यूब पर अपलोड किया हुआ वीडियो बुलेटिन मिला, जिसमें वायरल वीडियो क्लिप को देखा जा सकता है।
19 मार्च 2025 को शेयर किए इस वीडियो बुलेटिन के साथ दी गई जानकारी के मुताबिक, “राजधानी के खिलखेत मध्यपाड़ा इलाके में दुष्कर्म के आरोप में एक युवक को गुस्साई भीड़ ने पीट-पीटकर गंभीर रूप से घायल कर दिया। उसे थाने ले जाते समय भीड़ ने पुलिस वाहन पर हमला कर दिया। इस घटना में थाने के ओसी-जांच अधिकारी अशिकुर रहमान गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। थाने की सुरक्षा बढ़ाने के लिए सेना को तैनात किया गया है।”
अन्य रिपोर्ट में भी इस घटना का समान संदर्भ में जिक्र है। न्यूज रिपोर्ट के मुताबिक, मुर्शिदाबाद हिंसा में पिता और पुत्र (हरगोविंद दास और चंदन दास) की हत्या के मुख्य आरोपी जियाउल शेखर को गिरफ्तार कर लिया गया है।
इस हत्या मामले में पुलिस पहले ही आरोपी कालू नादर और दिलदार व इंजमाम उल हक को गिरफ्तार कर चुकी है। रिपोर्ट के मुताबिक, मुर्शिदाबाद हिंसा में 100 से अधिक एफआईआर हुई है।
गौरतलब है कि मुर्शिदाबाद में हिंसा वक्फ संशोधन (विधेयक) के अधिनियम बनने के बाद भड़की थी। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, मुर्शिदाबाद में हुई हिंसा के बाद 400 से अधिक लोगों को पलायन करना पड़ा है।
निष्कर्ष: पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में बम लगाने के मामले में पकड़े गए युवकों का मामला 2024 के दिसंबर महीने की घटना से संबंधित है। जबकि मुर्शिदाबाद में हिंसा वक्फ संशोधन (विधेयक) के अधिनियम बनने के बाद भड़की थी। संसद के दोनों सदनों से पारित होने के बाद पांच अप्रैल को राष्ट्रपति की मंजूरी मिली और फिर आधिकारिक रूप से अधिसूचित किए जाने के बाद वक्फ संशोधन अधिनियम आठ अप्रैल 2025 को पूरे देश में लागू हो गया। वहीं, बंगाल में हिंदू नाबालिग को पीटे जाने की घटना बंगाल की नहीं, बल्कि बांग्लादेश की है।
- Claim Review : मुर्शिदाबाद में ट्रैक पर बम लगाते पकड़े गए हिंदू युवक और बंगाल में छह साल के हिंदू नाबालिग की पिटाई
- Claimed By : Tipline User
- Fact Check : झूठ
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