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Fact Check: ये तस्वीरें असम की नहीं, विदेशों के डिटेंशन सेंटर्स की हैं

  • By Vishvas News
  • Updated: December 16, 2019

नई दिल्ली विश्वास टीम । सोशल मीडिया पर सिटिजनशिप अमेंडमेंड एक्ट (नागरिकता संशोधन
एक्ट ) के मुद्दे को लेकर कई अफवाहें वायरल हो रही है। बीते हफ्ते से चल रहे असम प्रोटेस्ट्स के बाद भी असम को लेकर कई अफवाहें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। इसी कड़ी में आजकल लोग कुछ तस्वीरें शेयर कर रहे हैं और साथ में दावा कर रहे हैं कि यह असम के डिटेंशन सेंटर की तस्वीरें हैं। इन तस्वीरों में छोटी-सी जेलों में कई लोगों को ठूंसे हुए देखा जा सकता है। एक तस्वीर में तो एक के ऊपर एक कई लोग लेटे हुए हैं। हमने अपनी पड़ताल में पाया कि इन सभी तस्वीरों का असम से कोई लेना-देना नहीं है। पहली तस्वीर डोमिनिकन रिपब्लिक की एक जेल की है और बाकी की दोनों तस्वीरें अमेरिका के टेक्सास के इमीग्रेशन डिटेंशन सेंटर्स की हैं।

CLAIM

वायरल पोस्ट में तीन तस्वीरें हैं। पहली तस्वीर में बहुत से आदमियों को एक के ऊपर एक लेटे हुए देखा जा सकता है। दूसरी और तीसरी तस्वीर में भी छोटी-सी जगह में कई लोग बैठे हुए नजर आ रहे हैं। इनमें औरतें और बच्चे भी हैं। पोस्ट के साथ डिस्क्रिप्शन में लिखा है, “इस तरह के हालात मे रहना आप को मंजूर हे तो फिर आप का चुप रहना लाज़्मी हे।🤐🤐 असम के डीटेंशन सेंटर की एक तस्वीर,,,”

FACT CHECK

इस पोस्ट की पड़ताल करने के लिए हमने इन सभी तस्वीरों को एक-एक करके जांचने का फैसला किया। जब हमने पहली तस्वीर का स्क्रीनशॉट लेकर उसे गूगल रिवर्स इमेज पर सर्च किया तो हमारे सामने कोलंबिया के अखबार El Tiempo का एक वेबपेज लगा, जिसमें इस तस्वीर का इस्तेमाल किया गया था। खबर के अनुसार, यह तस्वीर डोमिनिकन रिपब्लिक की ला रोमाना जेल के कैदियों की है। हमें यह तस्वीर और भी कई वेबसाइटों पर मिली और सभी के अनुसार यह तस्वीर ला रोमाना जेल की है।

हमने दूसरी तस्वीर को गूगल रिवर्स इमेज पर सर्च किया तो हमारे सामने द ग्लोबल पोस्ट की एक खबर लगी, जिसमें इस तस्वीर का इस्तेमाल किया गया था। खबर के अनुसार, यह तस्वीर अमेरिका के शहर टेक्सास में स्थित एक माइग्रेंट डिटेंशन सेंटर की है। यह तस्वीर हमें वॉशिंगटन पोस्ट पर भी मिली।

तीसरी तस्वीर को जब हमने गूगल रिवर्स इमेज पर सर्च किया तो हमें Vox.com पर यह तस्वीर मिली, जिसमें लिखा था “11 जून 2019 को टेक्सास में एक बॉर्डर पैट्रोल फैसिलिटी में एक भीड़भाड़ वाली सेल में हिरासत में लिए गए परिवार।”

इसके बाद ज़्यादा पुष्टि के लिए हमने असम के डीजीपी (पुलिस महानिदेशक) कुलधर सैकिया से बात की। उन्होंने कहा कि इनमें से कोई भी तस्वीर असम की नहीं है।

इस पोस्ट को सोशल मीडिया पर कई लोग शेयर कर रहे हैं। इन्हीं में से एक है Jamshed Wahab नाम का एक फेसबुक यूजर। इस यूजर के फेसबुक प्रोफाइल के अनुसार, यह कानपुर का रहने वाला है और इसके 1,624 फेसबुक फ़ॉलोअर्स हैं।

निष्कर्ष: हमने अपनी पड़ताल में पाया कि असम डिटेंशन सेंटर बताकर वायरल की जा रही तस्वीरें असल में असम की नहीं हैं। इनमें से पहली तस्वीर डोमिनिकन रिपब्लिक की जेल की है दूसरी और तीसरी तस्वीर अमेरिका के माइग्रेशन डिटेंशन सेंटर्स की हैं।

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