नई दिल्‍ली (विश्‍वास टीम)। सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली के नाम पर एक फर्जी तस्‍वीर वायरल हो रही है। वायरल पोस्‍ट में फर्जी तस्‍वीर का यूज करते हुए कहा गया है कि पीएम मोदी की सभा में 10 लाख से ज्‍यादा लोग जुट थे। विश्‍वास टीम की जांच में पता चला कि एक तस्‍वीर फोटोशॉप्ड है तो दूसरी पुरानी है। दोनों तस्‍वीरें सिलीगुड़ी की नहीं हैं।

क्‍या है वायरल पोस्‍ट में

सोशल मीडिया में नरेंद्र मोदी की सिलीगुड़ी सभा की कथित फोटो वायरल हो रही है। इसमें नरेंद्र मोदी और अमित शाह बैठे हुए दिख रहे हैं। सामने भीड़ ही भीड़ दिख रही है। फेसबुक यूजर रवींद्र आर्य ने भी इस तस्‍वीर को फेसबुक पर अपलोड करते हुए लिखा : कोलकाता पुलिस के अनुसार #सिलीगुड़ी में #मोदी_जी की सभा में 10,000,00👉 दस लाख से भी अधिक लोगों का जनसैलाव था।

पड़ताल

विश्‍वास टीम ने तस्‍वीर की सत्‍यता जांचने के लिए सबसे पहले गूगल रिवर्स इमेज में इसे सर्च किया। इससे हम reddit.com पर पहुंच गए। वहां हमें ओरिजनल तस्‍वीर मिल गई। लेकिन हमें यह नहीं पता चल पा रहा था कि ओरिजनल तस्‍वीर कहां की है?

ओरिजनल तस्‍वीर को ध्‍यान से देखने पर पता चला कि फोटो में जो इमारतें दिख रही हैं, वह हिमाचल प्रदेश की लग रही थी। इसलिए हमने गूगल रिवर्स इमेज में Modi and Shahi in Himachal टाइप करके सर्च किया। तो हमें इससे मिलती-जुलती कई तस्‍वीरें मिल गईं।

हमें Financialexpress.com का एक लिंक मिला। इसमें मोदी के शिमला दौरे की कई तस्‍वीरों का यूज किया गया था। 27 दिसंबर 2017 को अपलोड की गई इस खबर के अनुसार, हिमाचल प्रदेश के 14वें मुख्‍यमंत्री के रूप में जयराम ठाकुर के शपथ ग्रहण की तस्‍वीरें हैं।

अपनी जांच को आगे बढ़ाते हुए हम InVID पर गए। वहां हमने कीवर्ड में Shimla और भाजपा के ट्विटर हैंडल @bjp4india टाइप करने के बाद 27 दिसंबर 2017 का पुराना ट्वीट सर्च। हमें भाजपा के ट्विटर हैंडल पर 27 दिसंबर 2017 को किया गया ट्वीट मिला। यह ट्वीट हिमाचल प्रदेश के मुख्‍यमंत्री के शपथ ग्रहण से जुड़ा हुआ था। तस्‍वीर में आप पीएम मोदी को भी देख सकते हैं।

पहली तस्‍वीर की सच्‍चाई का पता लगाने के बाद अब बारी थी वायरल पोस्‍ट में यूज की गई दूसरी तस्‍वीर की पड़ताल करने की। गूगल रिवर्स इमेज में सर्च करने के बाद हमें कई तस्‍वीरें मिलीं। किसी में दावा किया गया था कि तस्‍वीर मराठा आंदोलन की है तो किसी ने पाटीदार आंदोलन की फोटो बताई। लेकिन हमें सच जानना था। इसके बाद हमने गूगल में टाइम लाइन में 30 अगस्‍त 2015 के पहले की डेट सेट की। क्‍योंकि सबसे पुरानी तस्‍वीर सितंबर 2015 की मिल रही थी। गूगल सर्च ने हमें Quartz वेबसाइट पर पहुंचा दिया। वहां से हमें पता चला कि जिस तस्‍वीर को मोदी की रैली की बताकर अब वायरल किया जा रहा है, दरअसल वह 25 अगस्‍त 2015 को गुजरात के अहमदाबाद में हुए पाटीदार आंदोलन की है।

अंत में हमने फर्जी पोस्‍ट करने वाले फेसबुक यूजर रवींद्र आर्य की प्रोफाइल की सोशल स्‍कैनिंग की। Stalkscan टूल की मदद से हमें पता चला कि यह अकाउंट सितंबर 2012 में बनाया गया था। इसे 28 हजार से ज्‍यादा लोग फॉलो करते हैं।

निष्‍कर्ष : विश्‍वास टीम की जांच में पता चला कि जिन तस्‍वीरों को मोदी की सिलीगुड़ी सभा की बताकर वायरल किया जा रहा है, वह फेक है। पहली जिस तस्‍वीर में मोदी और अमित शाह दिख रहे हैं, वह ओरिजनल तस्‍वीर शिमला की है। इसपर फोटोशॉप की मदद से छेड़छाड़ किया गया है। जबकि दूसरी तस्‍वीर 2015 में अहमदाबाद में हुए पाटीदार आंदोलन की है।

पूरा सच जानें…

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Claim Review : पीएम मोदी की सभा में 10 लाख से ज्‍यादा लोग जुट थे
Claimed By : Ravindra Arya
Fact Check : False

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