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In-Depth: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बांग्लादेश सत्याग्रह में शामिल होने का दावा, जानें तथ्यवार विवरण

  • By Vishvas News
  • Updated: April 3, 2021

नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। कोविड-19 काल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहली बार पड़ोसी देश बांग्लादेश की दो दिवसीय (26 और 27 मार्च) यात्रा पर गए। मौका था बांग्लादेश की आजादी की 50वीं वर्षगांठ का।

24 मार्च को यात्रा के पहले दिन ढाका में बांग्लादेश के राष्ट्रीय दिवस कार्यक्रम के मौके पर बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बांग्लादेश की आजादी के संघर्ष में शामिल होने का जिक्र करते हुए कहा, ‘बांग्लादेश की आजादी के लिए संघर्ष में….उस संघर्ष में शामिल होना मेरे जीवन के भी पहले आंदोलनों में से एक था। मेरी उम्र 20-22 साल रही होगी…जब मैंने और मेरे कई साथियों ने बांग्लादेश की आजादी के लिए सत्याग्रह किया था। बांग्लादेश की आजादी के समर्थन में तब मैनें गिरफ्तारी भी दी थी और जेल जाने का अवसर भी आया था। यानी बांग्लादेश की आजादी के लिए जितनी तड़प इधर थी उतनी ही तड़प उधर भी थी।’

भारतीय जनता पार्टी के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से उनके भाषण के इस अंश को ट्वीट किया गया है। प्रधानमंत्री के पूरे भाषण को यहां देखा और सुना जा सकता है।

प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद भारत में सोशल मीडिया पर पोस्ट्स की बाढ़ आ गई। विरोधियों ने प्रधानमंत्री के इस बयान को ‘झूठा’ बताते हुए उनकी आलोचना शुरू कर दी। कांग्रेस नेता शशि थरूर भी इनमें से एक थे। प्रधानमंत्री के इस भाषण के अंश को ट्वीट करते हुए उन्होंने लिखा, ‘अंतरराष्ट्रीय शिक्षा: हमारे प्रधानमंत्री बांग्लादेश को भारतीय ‘फेक न्यूज’ का स्वाद चखा रहे हैं। बेतुका यह है कि हर व्यक्ति जानता है कि किसने बांग्लादेश को मुक्ति दिलाई।’

इसके एक दिन बाद थरूर ने अपनी गलती के लिए माफी मांगते हुए ट्वीट किया। उन्होंने लिखा, ‘जब मैं गलती करता हूं तो मुझे उसे स्वीकार करने में कोई आपत्ति नहीं होती। कल हेडलाइन और कई ट्वीट् के आधार पर जल्दबाजी में मैंने यह ट्वीट कर दिया था, ‘हर कोई जानता है कि किसने बांग्लादेश को मुक्ति दिलाई’ और यह इस बात को साबित कर रहा था कि नरेंद्र मोदी ने इस मामले में इंदिरा गांधी की भूमिका को स्वीकार करने से मना कर दिया था। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। माफी!’

इसके बाद बीजेपी के नेताओं की तरफ से ऐसे कई दस्तावेजों को पेश कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बांग्लादेश के लिए सत्याग्रह में शामिल होने के दावे की पुष्टि की। बीजेपी के आईटी डिपार्टमेंट के राष्ट्रीय प्रभारी अमित मालवीय ने ट्वीट करते हुए बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उस सत्याग्रह में शामिल थे, जिसका आयोजन जन संघ की तरफ से बांग्लादेश को मान्यता देने की मांग के साथ किया गया था।

मालवीय ने अपने ट्वीट में बांग्लादेश सरकार की तरफ से पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को मिले प्रशस्ति पत्र की प्रति को साझा करते हुए कहा कि यह पत्र इसका सबूत है कि वाजपेयी ने उस रैली को संबोधित किया था और वर्ष 1978 में लिखी किताब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बांग्लादेश सत्याग्रह के दौरान जेल जाने का जिक्र किया है।

आठ जून 2015 को भारत के विदेश मंत्रालय की तरफ से किए गए फेसबुक पोस्ट में उस प्रशस्ति पत्र को शेयर किया है, जिसे बांग्लादेश सरकार की तरफ से पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजयेपी को दिया गया था।

भारत के विदेश मंत्रालय की तरफ से साझा किया गया प्रशस्ति पत्र

प्रशस्ति पत्र की आठवीं पंक्ति में साफ-साफ लिखा हुआ है, ‘बेहद सम्मानित राजनेता और भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने बांग्लादेश मुक्ति संग्राम को सहयोग देने में बेहद सक्रिय भूमिका निभाई। भारतीय जन संघ का प्रेसिडेंट और लोकसभा का सदस्य होने के नाते उन्होंने इस दिशा में कई कदम उठाए। ऑर्गनाइजर में लिखे स्तंभ में श्री वाजपेयी ने बंगबंधु शेख मुजीबुर्रहमान के बांग्लादेश की आजादी की ऐतिहासिक घोषणापत्र का स्वागत करते हुए भारत सरकार से बांग्लादेश की सरकार को मान्यता देने और स्वतंत्रता सेनानियों को जरूरी मदद मुहैया कराए जाने की अपील की। बांग्लादेशी मुक्ति संग्राम को दिए जाने वाले सहयोग को तेज किए जाने की मांग के साथ जन संघ ने 1-11 अगस्त के दौरान गण सत्याग्रह का आयोजन किया और उनके स्वयंसेवकों ने 12 अगस्त 1971 को भारतीय संसद के बाहर बड़ी रैली का आयोजन किया।’

‘इकॉनमिक टाइम्स’ की वेबसाइट पर 19 अगस्त 2018 को प्रकाशित एक पुरानी रिपोर्ट में इस रैली की तस्वीर को देखा जा सकता है, जिसमें वाजपेयी एक बड़ी रैली को संबोधित कर रहे हैं।

Source-Economic Times

तस्वीर के साथ दी गई जानकारी में लिखा है, ‘भारत सरकार के बांग्लादेश को तत्काल मान्यता दिए जाने की मांग के साथ अगस्त 1971 को दिल्ली में बड़ी रैली को संबोधित करते हुए जन संघ के प्रेसिडेंट अटल बिहारी वाजपेयी।’

न्यूज एजेंसी AP Archive के वेरिफाइड यूट्यूब चैनल पर 12 अगस्त 1971 को हुई रैली के वीडियो को देखा जा सकता है, जिसमें जनसंघ के सदस्यों को बांग्लादेश को मान्यता दिए जाने के बैनर के साथ प्रदर्शन करते हुए देखा जा सकता है।

‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ के आर्काइव में उस खबर को देखा जा सकता है, जिसके मुताबिक दिल्ली में बांग्लादेश सत्याग्रह के 12वें और आखिरी दिन जन संघ के करीब 10,000 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया था।

Source-ToI Archive

वरिष्ठ पत्रकार कंचन गुप्ता ने नरेंद्र मोदी की वर्ष 1978 में लिखी किताब ‘संघर्षमां गुजरात’ के कवर और बैक कवर की तस्वीर को साझा किया है, जिसमें उन्होंने बांग्लादेश सत्याग्रह के दौरान जेल जाने की जानकारी साझा की है।

बैक कवर पर गुजराती में लिखे शब्दों का अनुवाद भी उन्होंने साझा किया है, जो इस प्रकार है, ”आपातकाल के बीस महीने, सरकारी तंत्र की नाकामयाबी को साबित करते हुए भूगर्भ में रहकर काम किया और संघर्ष प्रवृति को चलाए रखा। इससे पहले बांग्लादेश के सत्याग्रह के समय तिहाड़ जेल होकर आए।” यह किताब narendramodi.in वेबसाइट पर उपलब्ध है।

गौरतलब है कि यह किताब वर्ष 1978 में लिखी गई थी, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बांग्लादेश सत्याग्राह के दौरान दिल्ली के तिहाड़ जेल में जाने का जिक्र किया है।
इसके साथ यह भी जानना जरूरी है कि यह पहली बार नहीं है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद के बांग्लादेश सत्याग्रह में शामिल होने की जानकारी को साझा किया है। बांग्लादेश की तरफ से जब पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को मुक्ति युद्ध सम्मान से नवाजा गया था, तब खराब स्वास्थ्य की वजह से इस सम्नान को लेने वह बांग्लादेश नहीं जा सके थे। उनकी तरफ से नरेंद्र मोदी ने ढाका जाकर इस पुरस्कार को ग्रहण किया था। इस कार्यक्रम का वीडियो नरेंद्र मोदी के आधिकारिक यू-ट्यूब चैनल पर (7 जून 2015 को अपलोडेड) मौजूद है।

31 मिनट 12 सेकेंड के इस वीडियो में 16 मिनट आठ सेकेंड के फ्रेम में मोदी उस सत्याग्रह की यादों को साझा करते हुए बताते हैं, ‘वाजपेयी जी का स्वास्थ्य अगर ठीक होता और यहां मौजूद होते तो इस अवसर को चार चांद लग जाते। आप सबने अटलजी के स्वस्थ होने की प्रार्थना की है और मुझे उम्मीद है कि आपकी प्रार्थना फलेगी और वह स्वस्थ होकर फिर से हम सबका मार्गदर्शन करेंगे। मैं राजनीतिक जीवन में काफी देर से आया। 90 के आखिर कालखंड में आया। लेकिन एक नौजवान एक्टिविस्ट के नाते, एक युवा वर्कर के नाते…क्योंकि मैं कभी राजनीतिक दल का सदस्य नहीं था। मैं भारतीय जनसंघ का कभी कार्यकर्ता नहीं रहा, लेकिन जब अटलजी के नेतृत्व में भारतीय जनसंघ ने बांग्लादेश के निर्माण के समर्थन के लिए एक सत्याग्रह किया था, जिसका उल्लेख इस प्रशस्ति पत्र में हैं, उस सत्याग्रह में एक वॉलिंटियर के रूप में मैं मेरे गांव से दिल्ली आया था और जो एक गौरवपूर्ण लड़ाई आप लोग लड़े थे, जिसमें हर भारतीय आपके सपनों को साकार होते देखना चाहता था, उन करोड़ों सपनों में एक मैं भी था।’

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