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Fact Check: अमृतसर के स्वर्ण मंदिर की फोटोशॉप तस्वीर हो रही है वायरल

नई दिल्‍ली (विश्‍वास टीम)।सोशल मीडिया पर आजकल लोग एक तस्वीर शेयर कर रहे हैं, जिसमें अमृतसर के स्वर्ण मंदिर को लाइटों से सजा-धजा देखा जा सकता है। तस्वीर में लोग बड़ी संख्या में स्वर्ण मंदिर के बाहर दीए और मोमबत्तियां जला रहे हैं। साथ ही ,आसमान में हजारों की संख्या में उड़ती कागज की लालटेनें देखी जा सकती है। इन पोस्टों में दावा किया जा रहा है कि यह तस्वीर अमृतसर के स्वर्ण मंदिर के दिवाली उत्सव की है। हमने अपनी पड़ताल में पाया कि यह तस्वीर पूरी तरह सही नहीं है, इस तस्वीर से छेड़छाड़ करके इसमें कागज की लालटेनें जोड़ी गई हैं। असली तस्वीर 2017 दिवाली उत्सव की है जब गोल्डन टेंपल (स्वर्ण मंदिर) के बाहर लोगों ने हजारों की संख्या में दीए और मोमबत्तियां जलाए थे। इसी तस्वीर में ऊपर से एडिटिंग टूल्स की मदद से कागज की लालटेनें जोड़ी गयी है। इसी तस्वीर को अब लोग गलत संदर्भ में वायरल कर रहे हैं।

CLAIM

वायरल तस्वीर में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर को लाइटों से सजा-धजा देखा जा सकता है। तस्वीर में लोग बड़ी संख्या में स्वर्ण मंदिर के बाहर दीए और मोमबत्तियां जला रहे हैं। साथ ही, आसमान में हजारों की संख्या में उड़ती कागज की लालटेनें देखी जा सकती है। पोस्ट के साथ डिस्क्रिप्शन में लिखा है, “Diwali celebrations in India ✨ Golden Temple, Harmandir Sahib, India.” जिसका हिंदी अनुवाद होता है “भारत के स्वर्ण मंदिर, हरमंदिर साहिब में दीपावली समारोह।”

FACT CHECK

इस तस्वीर की पड़ताल करने के लिए हमने सबसे पहले इस तस्वीर का स्क्रीनशॉट लिया और उसे गूगल रिवर्स इमेज पर सर्च किया। हमने पाया कि इस तस्वीर को बड़ी संख्या में लोग 2017 से शेयर कर रहे हैं। 2017 में इस तस्वीर को बॉलीवुड अभिनेता अमिताभ बच्चन ने भी शेयर किया था।

थोड़ी पड़ताल करने के बाद हमें वर्ल्ड नोमेड्स नाम की एक वेबसाइट पर एमिली पोलर नाम की फोटोग्राफर का एक ट्रैवल ब्लॉग मिला। एमिली पोलर ने इस फोटो ब्लॉग में बहुत-सी तस्वीरें अपलोड की थीं और उनके बारे में लिखा था। पूरी स्टोरी गोल्डन टेंपल यानी स्वर्ण मंदिर के बारे में थी। इस पेज पर दसवीं तस्वीर वायरल तस्वीर से मिलती है, जहां पर लोगों को दीए और मोमबत्तियां जलाते देखा जा सकता है। तस्वीर में गोल्डन टेंपल भी उसी तरह सजा-धजा है, जैसा वायरल तस्वीर में है। मगर, एमिली की तस्वीर में कहीं भी कागज की लालटेन नजर नहीं आ रही है। यह ट्रैवल ब्लॉग 20 जुलाई 2018 को अपलोड किया गया था। इस विशेष तस्वीर के नीचे कैप्शन लिखा था, ‘दिवाली के मौके पर अमृतसर के कैंपस में दीए, लाइट और मोमबत्तियां जलाते लोग।’

हमें ये तस्वीर एमिली पोलर के ब्लॉग पर भी मिली जिसके उपर ©ELILYPOLAR2015 लिखा था। इससे लगता है कि ये तस्वीर 2015 की भी हो सकती है। हमने ज़्यादा पुष्टि के लिए एमिली पोलर को मेल किया है। उनका जवाब आते ही इस स्टोरी को अपडेट किया जाएगा।

वायरल पोस्ट में फोटो क्रेडिट नवकरण बरार को दिया गया है। थोड़ा-सा ढूंढने पर हमने पाया कि इस वायरल तस्वीर को सबसे पहले 20 अक्टूबर 2017 को नवकरण बरार नाम के एक ट्विटर हैंडल द्वारा अपलोड किया गया था। इस तस्वीर के साथ कैप्शन लिखा था ‘#HappyDiwali2017 #goldentemple picart by me If you are going to post this then please give proper credit🙏🏼 #amritsar (Copyright).” इस ट्वीट में नीचे एक व्यक्ति ने कमेंट किया था कि यह तस्वीर फोटोशॉप है। जिस पर नवकरण ने रिप्लाई किया था – ‘हाँ, यह सच में फोटोशॉप तस्वीर है। इसे मैंने एक आर्ट के रूप में कुछ तस्वीरों को जोड़कर बनाया है। इसका मकसद किसी को पागल बनाना नहीं है, बल्कि आर्ट क्रिएट करना है, थैंक यू।” नवकरण द्वारा क्रिएटिविटी के मकसद से बनाई गई इस तस्वीर को बाद में लोगों ने असली तस्वीर समझकर शेयर करना शुरू कर दिया।

इस मसले पर हमने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रवक्ता कुलविंदर सिंह से बात की। उन्होंने कहा कि यह तस्वीर गुरुद्वारा श्री हरमंदिर साहिब की है पर इसे एडिट किया गया है और ऊपर से कागज की लालटेनें चिपकायी गयीं हैं। अक्सर कई अवसरों पर लोग श्रद्धा अनुसार, घी के दीए जलाते हैं, पर कागज़ की लालटेनों का चलन अभी तक यहाँ नहीं है।”

इस पोस्ट को बहुत-से लोग शेयर कर रहे हैं। इनमें से एक है, Places To Visit Before You Die नाम का एक फेसबुक पेज। इस पेज के 738,653 फेसबुक फ़ॉलोअर्स हैं।

निष्कर्ष: हमने अपनी पड़ताल में पाया कि यह तस्वीर पूरी तरह सही नहीं है। इस तस्वीर से छेड़छाड़ करके इसमें कागज की लालटेनें जोड़ी गई हैं। असली तस्वीर 2017 दिवाली उत्सव की है, जब गोल्डन टेंपल (स्वर्ण मंदिर) के बाहर लोगों ने हजारों की संख्या में दीए और मोमबत्तियां जलाए थे। इसी तस्वीर में ऊपर से एक एडिटर ने एडिटिंग टूल्स की मदद से कागज की लालटेनें जोड़ी थीं। इसी तस्वीर को अब लोग गलत संदर्भ में वायरल कर रहे हैं।

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