X
X

Fact Check: छत्तीसगढ़ में पुलिस और गांववालों के बीच हुई झड़प के वीडियो को अरावली बचाने के आंदोलन से जोड़कर किया गया वायरल 

विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में पाया कि राजस्थान में अरावली बचाने के नाम पर वायरल हो रहा प्रदर्शन का वीडियो असल में 3 दिसंबर 2025 का है, जब छत्तीसगढ़ के सरगुजा में अमेरा कोल माइन के विस्तार का विरोध कर रहे ग्रामीणों और पुलिस के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इस वीडियो को अब अरावली आंदोलन से जोड़कर गलत संदर्भ में साझा किया जा रहा है।

नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। दुनिया की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखलाओं में शामिल अरावली को बचाने के लिए राजस्‍थान में आंदोलन हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के बाद से ही अरावली को बचाने की मुहिम चल पड़ी है। इस आदेश में कहा गया है कि 100 मीटर से ऊंचे पहाड़ को ही अरावली माना जाएगा। अब इसे लेकर सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच होती झड़प देखी जा सकती है। वीडियो को शेयर कर यूज़र्स दावा कर रहे हैं कि यह राजस्थान में अरावली बचाने को लेकर हुए प्रदर्शन का वीडियो है।

विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में पाया कि वायरल किया जा रहा दावा भ्रामक है। असल में, यह वीडियो छत्तीसगढ़ का है। राज्‍य के सरगुजा में कोयला खदान के विस्तार के विरोध के दौरान गांववालों और पुलिस के बीच झड़प हो गई थी। अब इसी वीडियो को अब अरावली बचाने को लेकर हो रहे प्रदर्शनों से जोड़ कर भ्रम  फैलाया जा रहा है।

क्या है वायरल पोस्ट में ?

फेसबुक यूजर nareshrabarii04 ने 21 दिसंबर 2025 को वायरल वीडियो को शेयर करते हुए लिखा “अरावली को काटने आये थे। 25 DECEMBER राजस्थान बंद अरावली बजाओ।”

पड़ताल

वायरल वीडियो की जांच करने के लिए हमने इस वीडियो के स्क्रीनशॉट को गूगल लेंस की मदद से सर्च किया। हमें वायरल वीडियो News18 India के YouTube चैनल पर 3 दिसंबर, 2025 को अपलोड मिला। खबर के अनुसार, यह मामला छत्तीसगढ़ की अमेरा कोल माइन के विस्तार के खिलाफ हुए प्रदर्शन का है, जहाँ गांववालों ने पुलिस पर पत्थर फेंके थे और पुलिस ने आंसू गैस के गोले और लाठीचार्ज भी किया था।

हमें इससे जुड़ा वीडियो Argus News के वेरिफाइड X हैंडल पर भी 3 दिसंबर, 2025 को अपलोड मिला। यहां भी इसे छत्तीसगढ़ की घटना का बताया गया था।

इस मामले में पुष्टि के लिए हमने छत्तीसगढ़ में नईदुनिया के वरिष्ठ पत्रकार सतीश श्रीवास्तव से भी बात की। उन्होंने भी कन्फर्म किया कि यह वीडियो सरगुजा  का है, जहाँ 3 दिसंबर 2025 को अमेरा कोल माइन के विस्तार के खिलाफ हो रहा प्रदर्शन हिंसक हो गया था।

क्या है अरावली मामला?

अरावली विवाद मुख्य रूप से इसकी नई तकनीकी परिभाषा और ‘100 मीटर नियम’ को लेकर है। ख़बरों के अनुसार, हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की एक समिति की सिफारिशों को मंजूरी दी है, जिसके तहत केवल उन्हीं भौगोलिक संरचनाओं को ‘अरावली पहाड़ी’ माना जाएगा, जिनकी ऊंचाई अपने आसपास के धरातल से 100 मीटर या उससे अधिक है। विवाद का कारण यह है कि पर्यावरणविदों और जानकारों के अनुसार, राजस्थान और हरियाणा में अरावली का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा 100 मीटर से कम ऊंचाई वाला है। डर यह है कि इस परिभाषा के लागू होने से कम ऊंचाई वाली पहाड़ियों से कानूनी सुरक्षा कवच हट जाएगा, जिससे वहां बेरोकटोक खनन और निर्माण कार्यों का रास्ता साफ हो सकता है। यह स्थिति न केवल मरुस्थलीकरण के खतरे को बढ़ाएगी, बल्कि दिल्ली-एनसीआर समेत पूरे उत्तर-पश्चिम भारत के भूजल स्तर और इकोसिस्टम के लिए भी विनाशकारी साबित हो सकती है।

यही कारण है कि आज पूरे भारत में अरावली को बचाने के लिए बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हैं। लोग इसे ‘ग्रीन लंग्स’ पर हमला मान रहे हैं और सरकार से मांग कर रहे हैं कि पहाड़ियों की परिभाषा ऊंचाई के आधार पर नहीं, बल्कि उनके पारिस्थितिक महत्व के आधार पर तय की जाए।

वीडियो शेयर करने वाले यूजर nareshrabarii04 को 6 हजार से ज्यादा लोग फॉलो करते हैं।

निष्कर्ष: विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में पाया कि राजस्थान में अरावली बचाने के नाम पर वायरल हो रहा प्रदर्शन का वीडियो असल में 3 दिसंबर 2025 का है, जब छत्तीसगढ़ के सरगुजा में अमेरा कोल माइन के विस्तार का विरोध कर रहे ग्रामीणों और पुलिस के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इस वीडियो को अब अरावली आंदोलन से जोड़कर गलत संदर्भ में साझा किया जा रहा है।

  • Claim Review : यह राजस्थान में अरावली बचाने को लेकर हुए प्रदर्शन का वीडियो है।
  • Claimed By : FB User nareshrabarii04
  • Fact Check : झूठ

पूरा सच जानें... किसी सूचना या अफवाह पर संदेह हो तो हमें बताएं

सब को बताएं, सच जानना आपका अधिकार है। अगर आपको ऐसी किसी भी मैसेज या अफवाह पर संदेह है जिसका असर समाज, देश और आप पर हो सकता है तो हमें बताएं। आप हमें नीचे दिए गए किसी भी माध्यम के जरिए जानकारी भेज सकते हैं...

टैग्स

अपनी प्रतिक्रिया दें

No more pages to load

संबंधित लेख

Next pageNext pageNext page

Post saved! You can read it later