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Fact Check: COVID-19 टेस्ट के लिए साल 2015 में नहीं लिखा गया था पेटेंट, वायरल पोस्ट फर्जी

  • By Vishvas News
  • Updated: October 26, 2020

नई दिल्ली (विश्वास टीम)। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हो रही है, जिसके जरिए एक पेटेंट एप्लिकेशन का स्क्रीनशॉट साझा किया जा रहा है। वायरल स्क्रीनशॉट के साथ लिखे कैप्शन में दावा किया गया है कि रॉथ्सचाइल्ड नामक व्यक्ति ने साल 2015 में ही नोवल कोरोनावायरस के टेस्ट में लिए पेटेंट का आवेदन कर दिया था, लिहाजा COVID-19 एक स्कैम है।

विश्वास न्यूज ने पड़ताल में पाया कि वायरल तस्वीर साल 2020 में फाइल किए गए चाइल्ड एप्लिकेशन का स्क्रीनशॉट है। यह एप्लिकेशन साल 2015 में सब्मिट की गई पेरेंट पेटेंट एप्लिकेशन के तहत दाखिल की गई थी और इसका COVID-19 से कोई लेना-देना नहीं है। पेरेंट एप्लिकेशन बायोमेट्रिक डेटा को एक्वायर करने व ट्रांस्मिट करने के तरीके के बारे में थी। वायरल पोस्ट फर्जी है।

क्या है वायरल पोस्ट में?

सोशल मीडिया पोस्ट में पेटेंट एप्लिकेशन का स्क्रीनशॉट साझा किया जा रहा है। इसके साथ अंग्रेजी में कैप्शन लिखा गया है, जिसका हिंदी अनुवाद है— यह उनके लिए है जिन्हें यह नहीं लगता कि COVID-19 एक स्कैम है और कुछ साल पहले ही इसकी प्लैनिंग की गई थी। कृपया समझाएं कि रॉथ्सचाइल्ड ने COVID-19 का पेटेंट साल 2015 में ही कैसे कर लिया था?!?! ..5 साल पहले?!?”

पोस्ट का आर्काइव्ड वर्जन यहां देखा जा सकता है।

पड़ताल

पेटेंट एप्लिकेशन के वायरल स्क्रीनशॉट पर लिखा हुआ है कि यह एप्लिकेशन “कोविड 19 टेस्टिंग के मैथड व सिस्टम” के लिए है जिसे एप्लकेंट रिचर्ड ए रॉथ्सचाइल्ड ने फाइल किया है।

स्क्रीनशॉट के अनुसार, यह एप्लिकेशन 17 मई 2020 को फाइल की गई थी। डॉक्युमेंट में हाईलाइट किए हुए हिस्से में लिखा गया है, प्रोविजनल एप्लिकेशन 13 अक्टूबर 2015 को फाइल की गई थी।

विश्वास न्यूज ने Espacenet की वेबसाइट पर इस पेटेंट को सर्च किया। Espacenet ऐसा प्लेटफॉर्म है, जिसके जरिए पेटेंट व इसके लिए लगाई गई एप्लिकेशंस को ढूंढा व देखा जा सकता है। इसमें विश्वभर से डेटा उपलब्ध है।

हमें “सिस्टम एंड मैथड फॉर टेस्टिंग फॉर कोविड—19” की एप्लिकेशन Espacene पर भी मिली।

इसके अनुसार, फाइल की गई एप्लिकेशन पहले से मौजूद एप्लिकेशन के ही अंतर्गत डाली गई है। रॉथ्सचाइल्ड ने 2015 में जो पेटेंट फाइल किया था, वह बायोमेट्रिक डेटा ट्रांसमिट करने व एक्वायर करने के मेथड से संबंधित था।

हालांकि, पेटेंट के एब्स्ट्रैक्ट के अनुसार, बाद में इस एप्लिकेशन को मई 2020 में “यूजर वायरल इन्फेक्शन जैसे कि कोविड—19 से पीड़ित है या नहीं यह पता करने” के मेथड के नाम से सब्मिट किया गया था।

हमें गूगल पेटेंट्स पर भी यह एप्लिकेशन मिली।

विश्वास न्यूज ने पेटेंट एजेंट चैतन्य जानपुरे से बात की। कौर ने बताया कि वायरल दावा गलत है। वायरल स्क्रीनशॉट साल 2020 में दाखिल की गई चाइल्ड एप्लिकेशन की तस्वीर है। रॉथ्सचाइल्ड ने पेरेंट एप्लिकेशन को साल 2020 में संशोधित कर फिर से दाखिल किया था। पेटेंट एप्लिकेशन साल 2020 में संशोधित हुए हैं, लिहाजा यह कहना गलत होगा कि कोविड—19 की टेस्टिंग के लिए साल 2015 में ही पेटेंट फाइल किया गया था।

फेसबुक पर यह पोस्ट ‘Clinton Wensley’ नामक यूजर ने शेयर की है। हमने जब इस चैनल को स्कैन किया तो पाया कि इस यूजर ने अपनी प्रोफाइल में ज्यादा जानकारियां साझा नहीं की हैं।

निष्कर्ष: विश्वास न्यूज ने पड़ताल में पाया कि वायरल तस्वीर साल 2020 में फाइल की गई चाइल्ड एप्लिकेशन की तस्वीर है। यह एप्लिकेशन साल 2015 में फाइल की गई पेरेंट पेटेंट एप्लिकेशन के ही तहत दाखिल की है, लेकिन साल 2015 में दाखिल की गई एप्लिकेशन का कोविड—19 से कोई संबंध नहीं है।

  • Claim Review : कोविड—19 टेस्टिंग पेटेंट साल 2015 में ही दाखिल कर दिया गया था, कोविड—19 एक स्कैम है।
  • Claimed By : FB user: Clinton Wensley
  • Fact Check : झूठ
झूठ
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